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साल में चार बार भर्ती के बावजूद एम्स के लिए नहीं मिल रहे काबिल डॉक्टर

साल में चार बार भर्ती के बावजूद एम्स के लिए नहीं मिल रहे काबिल डॉक्टर

संक्षेप:

देश में 19 एम्स में डॉक्टरों के 39 फीसदी पद खाली हैं। सरकार ने साल में चार बार इंटरव्यू आयोजित किए हैं, लेकिन योग्य उम्मीदवार नहीं मिल रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को एम्स में करियर शुरू करने की प्राथमिकता दी है। इसके अलावा, कई डॉक्टर एम्स छोड़ रहे हैं।

Jan 06, 2026 07:04 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। देश में संचालित 19 एम्स में डॉक्टरों के करीब 39 फीसदी पद खाली हैं। इन्हें भरने के लिए सरकार ने साल में चार बार इंटरव्यू किए हैं लेकिन इसके बावजूद एम्स के लिए काबिल डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है, उम्मीदवार तो बहुत आ रहे हैं लेकिन वे एम्स के भर्ती मापदंडों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। सरकार ने गुणवत्ता से समझौता नहीं करने की नीति अपनाई है। शीर्ष सूत्रों ने कहा कि साल में मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में विभिन्न श्रेणी के प्रोफेसरों के लिए इंटरव्यू आयोजित किए जा रहे हैं।

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जबकि नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और ग्रुप बी और सी के स्टाफ की भर्ती साल में दो बार की जा रही है। सबसे ज्यादा कमी प्रोफेसरों की है। हाल में एक आरटीआई से खुलासा हुआ है कि सभी एम्स में फैकल्टी के 4099 पदों में से 1600 पद खाली हैं। यानी 39 फीसदी पद रिक्त हैं। सबसे पुराने एम्स, नई दिल्ली में 1306 में से 524 पद रिक्त थे। सूत्रों ने कहा कि यह रिक्तियां भर्ती प्रक्रिया की वजह से नहीं हैं। साल में चार बार इंटरव्यू करने के अलावा स्थायी नियुक्ति समिति का कार्यकाल पूरे साल कर दिया गया है। असल दिक्कत एम्स की जरूरत के मुताबिक योग्य उम्मीदवारों का नहीं मिलना है। एम्स में ही नियुक्ति पर विचार इस समस्या का दूरगामी समाधान निकालने के लिए एम्स से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को एम्स में ही करियर शुरू करने को प्राथमिकता दी जा रही है। एमबीबीएस करने वालों को जूनियर रेजिडेंट और पीजी करने वालों को सीनियर रेजिडेंट नियुक्त करने में प्राथमिकता दी जाएगी ताकि भविष्य में एम्स में प्रोफेसरों की कमी को दूर किया जा सके। दूसरे एम्स में आवेदन यह भी व्यवस्था की गई है कि एक एम्स का प्रोफेसर अपनी सूहलियत के अनुसार दूसरे एम्स में आवेदन कर सकता है। क्योंकि एम्स के बीच तबादले का प्रावधान नहीं है। इससे भी कई डॉक्टर नई दिल्ली एम्स से दूसरे प्रदेशों के एम्स गए हैं। एम्स छोड़ रहे डॉक्टर सूत्रों ने कहा कि बड़े पैमाने पर एम्स, नई दिल्ली और दूसरे स्थापित एम्स से फैकल्टी का छोड़ना भी चिंता की बात है। इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने काफी गहन विमर्श किया लेकिन इसका कोई समाधान फिलहाल नहीं निकल पाया है। कुल 23 एम्स नई दिल्ली एम्स के अलावा देश में 22 और एम्स हैं, जिनमें से 18 संचालित हैं। जबकि चार एम्स अवन्तीपोरा, रेवाड़ी, मदुरै और दरभंगा विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं। इन सभी एम्स में एमबीबीएस की 2125, पीजी की 1749, सुपर स्पेशियलिटी की 574, नर्सिंग की 1194 तथा एलाइड हेल्थकेयर की 785 सीटें हैं।