
ISI तक भारतीय सिम कार्ड पहुंचाने वाला नेपाली शख्स दिल्ली से गिरफ्तार, इस वजह से कर रहा था गद्दारी
मामले की जानकारी देते हुए पुलिस ने कहा कि US वीजा और नौकरी पाने के बदले आरोपी अपने नेपाली परिचित के जरिए उन तक भारतीय सिम कार्ड और DRDO व अन्य रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पहुंचा रहा था।
दिल्ली पुलिस ने एक नेपाली नागरिक को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI तक भारतीय सिम कार्ड पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पाक एजेंसी द्वारा जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ जासूसी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता था। भारत में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करने और यहां रहकर नौकरी करने वाले इस नेपाली शख्स को पाक एजेंसी ने अमेरिकी वीजा और वहां पत्रकारिता में नौकरी दिलवाने का लालच देते हुए इस गद्दारी के लिए तैयार किया।

पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर 28 अगस्त को कार्रवाई को अंजाम दिया और आरोपी को दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी शख्स की पहचान नेपाल के बीरगंज इलाके के रहने वाले प्रभात कुमार चौरसिया (43) के रूप में हुई है। कार्रवाई के दौरान उसके पास से पुलिस ने आपत्तिजनक कंटेंट वाले कई डिजिटल डिवाइसेस और सिम कार्ड वाले कई लिफाफे बरामद किए।
पुलिस उपायुक्त (विशेष प्रकोष्ठ) अमित कौशिक ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि, 'चौरसिया ने आधार कार्ड का इस्तेमाल करके निजी दूरसंचार कंपनियों के कम से कम 16 सिम कार्ड खरीदे थे और इसके बाद उन्हें अपने देश नेपाल भेज दिया था। वहां उन सिम कार्डों को तस्करी करके ISI के गुर्गों तक पहुंचा दिया जाता था।'
डीसीपी ने कहा, 'पाकिस्तानी हैंडलर्स द्वारा भारतीय नंबरों के दुरुपयोग के बारे में गुप्त सूत्रों से जानकारी मिली थी, जिसके बाद एक टीम ने लक्ष्मी नगर में निगरानी करना शुरू किया और आरोपी प्रभात चौरसिया को 28 अगस्त को विजय ब्लॉक इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान, उसने खुलासा किया कि आईएसआई के गुर्गों ने उसे अमेरिकी वीज़ा और विदेश में पत्रकारिता के अवसरों का वादा करके अपने जाल में फंसाया था।'
आगे उन्होंने कहा कि, 'चौरसिया के वहां भेजे सिम कार्ड में से 11 सिम कार्ड लाहौर, बहावलपुर और पाकिस्तान के अन्य शहरों में वॉट्सएप चलाने के लिए सक्रिय रूप से इस्तेमाल किए जा रहे थे।' अधिकारी ने कहा कि 'ये सिम कार्ड ISI के हैंडलर्स द्वारा भारतीय सैन्य कर्मियों से संपर्क करने और सोशल मीडिया के माध्यम से जासूसी करने के लिए काम में लिए जा रहे थे।'
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी शख्स ने नेपाल और बिहार से अपनी पढ़ाई पूरी की है। ग्रेजुएशन के दौरान उसने सूचना प्रौद्योगिकी में बीएससी की डिग्री ली और इसके अलावा कंप्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग में डिप्लोमा की पढ़ाई भी की है। वह महाराष्ट्र और दिल्ली में मेडिकल फील्ड में मेडिकल रिप्रेंजेंटेटिव और एरिया सेल्स मैनेजर के रूप में भी काम कर चुका है।
डीसीपी कौशिक ने बताया कि 'साल 2017 में उसने काठमांडू में एक लॉजिस्टिक्स कंपनी शुरू की थी, जो कि घाटे के कारण बंद हो गई और फिर वह गहरे आर्थिक संकट में फंस गया। साल 2024 में वह काठमांडू में एक नेपाली परिचित के जरिए ISI के गुर्गों के संपर्क में आया। इसके बाद विदेश में बसने के अपने सपने को पूरा करने के लिए उसने ISI के गुर्गों तक सिम कार्ड पहुंचाना शुरू कर दिया और साथ ही वह रक्षा संबंधी जानकारी भी इकट्ठा करने के लिए तैयार हो गया।'
उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) और 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही उसके सहयोगियों की पहचान करने, उसके कूरियर नेटवर्क का पता लगाने और इसमें शामिल अन्य हैंडलर्स को पकड़ने के लिए आगे की जांच जारी है।



