
अरुण और अब्दुल की राम मंदिर पर चल रही थी बहस, जेल में आतंकी की हत्या पर नया खुलासा
फरीदाबाद की नीमका जेल में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की सहबंदी अरुण चौधरी ने पत्थर मारकर हत्या कर दी। जांच में सामने आया है कि दोनों के बीच पिछले कई दिनों से राम मंदिर को लेकर बहस चल रही थी।
फरीदाबाद की नीमका जेल में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की सहबंदी अरुण चौधरी ने पत्थर मारकर हत्या कर दी। जांच में सामने आया है कि दोनों के बीच पिछले कई दिनों से राम मंदिर को लेकर बहस चल रही थी। मामले की जांच डीएलएफ क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है और न्यायिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में शव का पोस्टमार्टम किया गया है।
सुरक्षाकर्मियों के बयान किए गए दर्ज
जिला जेल नीमका में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या के मामले की जांच शुरू हो गई है। पहले दिन पुलिस ने जेल के सुरक्षाकर्मियों के बयान दर्ज किए और जांच समिति ने साक्ष्य भी जुटाए। साथ ही मामले की जांच डीएलएफ क्राइम ब्रांच फरीदाबाद को सौंप दी गई है। इसके अलावा अब्दुल रहमान के शव का पोस्टमार्टम ईएसआईसी अस्पताल में किया गया। उसके बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
हमले में इस्तेमाल हुआ पत्थर बरामद
एसीपी अशोक कुमार ने बताया कि प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमआईसी) संचिता सिंह की मौजूदगी में पुलिस प्रशासन ने जेल परिसर में घटनास्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान मौके से हमला करने में प्रयुक्त पत्थर और वह कपड़ा बरामद किया गया, जिसमें पत्थर बांधकर वार किए जाने की बात सामने आई। बरामद वस्तुओं को पुलिस ने कब्जे में लेकर आगे की फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, घटना के समय जेल में ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी कलमबंद किए गए हैं। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि उच्च सुरक्षा वाली जेल में हमले के लिए इस्तेमाल किया गया सामान आरोपी तक कैसे पहुंचा। एसीपी अशोक कुमार ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच करेगी और सभी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि अब्दुल रहमान की रविवार देर रात सहबंदी द्वारा हमले के बाद मौत हो गई थी। अब्दुल रहमान को पिछले वर्ष मार्च में गांव पाली के खेत में बने एक कमरे से उसको गिरफ्तार किया था। उससे दो हैंड ग्रेनेड बरामद किए थे और उन पर राम मंदिर पर हमला करने की साजिश रचने का आरोप था।
अरुण और अब्दुल की हुई थी बहस
अयोध्या मंदिर पर हमले की साजिश के आरोप में गिरफ्तार बंदी संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की जिला जेल में हुई हत्या के मामले में नया खुलासा सामने आया है। जेल सूत्रों के अनुसार, पिछले कई दिनों से सहबंदी अरुण चौधरी और अब्दुल रहमान के बीच राम मंदिर को लेकर बहस चल रही थी। बताया जा रहा है कि इसी विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
पिता बोले, बेटा बेगुनाह था
जिला जेल में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की मौत के बाद उसका परिवार गहरे सदमे में है। इकलौते बेटे को खोने का दर्द पिता अबू बकर की आंखों में साफ झलक रहा था। उन्होंने कहा, हमने शुरू से कहा था, अगर मेरा बेटा दोषी है तो कानून उसे सजा दे, लेकिन अगर बेगुनाह है तो उसे सजा नहीं मिलनी चाहिए। अब्दुल रहमान अपने माता-पिता का इकलौता बेटा और तीन बहनों का अकेला भाई था। परिवार के अनुसार, उसकी बड़ी बहन आसमा की उम्र 16 वर्ष, दूसरी बहन अल्फिया 13 वर्ष और सबसे छोटी बहन अल्फिशा मात्र 6 वर्ष की है। भाई की मौत से तीनों बहनों का सहारा छिन गया है। परिजनों ने बताया कि गिरफ्तारी से पहले अब्दुल रहमान रिक्शा चलाकर परिवार का हाथ बंटाता था। उसके पिता अबू बकर भी रिक्शा चलाते हैं और साथ ही मीट की छोटी दुकान चलाकर किसी तरह परिवार का गुजारा करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर यह परिवार अब बेटे की मौत के बाद और अधिक असहाय महसूस कर रहा है। पिता का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है, लेकिन बेटे की इस तरह मौत ने उनके विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने आने की मांग की है।
हाईकोर्ट से जमानत की उम्मीद थी: पिता
जिला जेल में बंद संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या के बाद उसके परिवार ने कई भावुक और गंभीर बातें सामने रखी हैं। मृतक के पिता अबू बकर ने दावा किया कि उनके बेटे को हाईकोर्ट से जल्द जमानत मिलने की उम्मीद थी। उन्होंने बताया कि उनके वकील सुरजीत के अनुसार जमानत पर सकारात्मक सुनवाई की संभावना थी और राहत मिलने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन उससे पहले ही उसकी हत्या कर दी गई।
राम मंदिर को लेकर विवाद की आशंका
अयोध्या मंदिर पर हमले की साजिश के आरोप में गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की जेल में हुई हत्या के मामले में मंगलवार को ईएसआई मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फरीदाबाद में उसका पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम तीन सदस्यीय फॉरेंसिक मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट संचिता सिंह की निगरानी में किया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई। मंगलवार सुबह कड़ी सुरक्षा के बीच शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया।





