
वाटर मैनेजमेंट और सीवरेज में सुधार करेगी NDMC, कई इलाकों को फायदा; पानी की बर्बादी भी रुकेगी
नई दिल्ली नगर परिषद ने राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख इलाकों में वाटर मैनेजमेंट और सीवरेज सिस्टम के व्यापक सुधार की योजना बनाई है। इन सुधारों से जल की बर्बादी 70 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। इस योजना के केंद्र में एक स्मार्ट सिंचाई प्रणाली है, जिसका उद्देश्य जल की बर्बादी को रोकना और हरियाली बढ़ाना है।
नई दिल्ली नगर परिषद ने राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख इलाकों में जल प्रबंधन और सीवरेज अवसंरचना के व्यापक सुधार की योजना बनाई है। इन सुधारों से जल की बर्बादी 70 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। इस योजना के केंद्र में एक स्मार्ट सिंचाई प्रणाली है, जिसका उद्देश्य जल की बर्बादी को कम करना और हरियाली बढ़ाना है।
एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख इलाकों में जल प्रबंधन और सीवरेज अवसंरचना के व्यापक सुधार की रूपरेखा पेश की। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चहल ने कहा कि 'विकसित भारत' की परिकल्पना के अनुरूप ये आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परियोजनाएं नई दिल्ली को स्वच्छ, हरित और भविष्य के लिए तैयार बनाएगी। इस योजना के केंद्र में एक स्मार्ट सिंचाई प्रणाली है, जिसका उद्देश्य जल की बर्बादी को कम करना और हरियाली बढ़ाना है।
चहल ने कहा कि पार्कों, उद्यानों और हरित क्षेत्रों में स्वचालित और मशीनीकृत सिंचाई शुरू की जाएगी। इससे पानी का उपयोग केवल जरूरत के अनुसार ही संभव हो सकेगा। इससे जल संरक्षण, जलभराव की रोकथाम, हरित क्षेत्र में सुधार और परिचालन लागत में कमी लाने में मदद मिलेगी।
चहल ने बताया कि पहले चरण में लगभग 19.28 किलोमीटर लंबी 11 प्रमुख सड़कों पर स्मार्ट सिंचाई प्रणाली लगाई जाएगी। एनडीएमसी ने टेंडर जारी कर दी हैं, जिन्हें इस महीने के अंत में खोला जाएगा। लगभग 15.94 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत पर मार्च 2026 से पहले कार्य आवंटित किए जाने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित सड़कों में नेहरू पार्क, पेशवा रोड, मंदिर मार्ग, आर के आश्रम मार्ग, भाई वीर सिंह मार्ग, शांति पथ, पंचशील मार्ग, अशोक रोड, सी-हेक्सागन, अरबिंदो मार्ग और अकबर रोड के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना का विस्तार 2026-27 में किया जाएगा। इसमें लगभग 16 करोड़ रुपए की लागत से 11 और सड़कें और लोधी गार्डन और तालकटोरा गार्डन सहित पांच प्रमुख उद्यान शामिल होंगे। वर्ष 2026-27 के दौरान 11 अतिरिक्त मुख्य सड़कों और 5 प्रमुख उद्यानों को शामिल किया जाएगा, जिसकी कुल लंबाई लगभग 19.61 किलोमीटर होगी।
इस चरण में महर्षि रमन मार्ग, लोधी एस्टेट लेन, मैक्स मुलर मार्ग, सुब्रमण्यम भारती मार्ग, सैन मार्टिन मार्ग, जीसस एंड मैरी रोड, मानस मार्ग, मधुलिम्या मार्ग, सत्य मार्ग, चंद्रगुप्त मार्ग और नीति मार्ग के साथ-साथ सत्य सदन के पीछे स्थित कवर्ड नाला पार्क, लोधी गार्डन, टॉकटोरा गार्डन, संजय लेक पार्क और मधुलिम्या मार्ग पर स्थित चिल्ड्रन पार्क शामिल होंगे।
चहल ने ट्रीटेड वाटर के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एनडीएमसी के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। वर्तमान में 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सिंचाई के लिए जल की आपूर्ति करते हैं। चहल ने घोषणा की कि एनडीएमसी लगभग 57 करोड़ रुपए की लागत से 2250 किलोलीटर प्रति दिन की संयुक्त क्षमता वाले पांच और ऐसे संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रहा है, जिनका संचालन नवंबर 2026 तक शुरू होने का लक्ष्य है। इसके अलावा एनडीएमसी ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत 150 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से 8 और ट्रीटमेंट प्लांट का प्रस्ताव रखा है।
चहल ने कहा कि नगर निगम जल्द ही लुटियंस दिल्ली में पुरानी सीवर लाइनों के पुनर्निर्माण के लिए परियोजनाओं पर विचार करेगा, जिनमें से कुछ लाइनें कई दशकों पुरानी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन कार्यों के पूरा होने पर खराबी कम होगी और नागरिक सेवाएं मजबूत होंगी।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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