
गुरुग्राम की जिस हाई-राइज हाउसिंग सोसायटी पर लगा था करोड़ों रुपए का जुर्माना, उसे NGT से मिली बड़ी राहत
सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने आगे नोट किया कि दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 में बोर्ड के इंस्पेक्शन में STP को सही पाया गया, जिससे अपील करने वाले की यह दलील मजबूत हुई कि फरवरी 2023 के बाद भी वहां उल्लंघन जारी नहीं था।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गुरुग्राम में BPTP बिल्डर की बनाई फ्रीडम पार्क लाइफ AOA को शुक्रवार को बड़ी राहत दे दी। इस दौरान उसने उस जुर्माने की रकम को कम कर दिया, जो हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड(HSPCB) ने सोसाइटी पर लगाया था। बोर्ड ने सोसाइटी पर नियमों का उल्लंघन करते हुए प्रदूषण फैलाने का आरोप लगाते हुए करीब डेढ़ करोड़ रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया था, लेकिन अब एनजीटी ने इस राशि को बहुत कम कर दिया है। जुर्माने की नई रकम 68.25 लाख रुपए कर दी गई है, जो कि आधी से भी कम है।
HSPCB ने इस हाउसिंग सोसाइटी पर आरोप लगाया गया था कि उसका सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 415 दिनों से काम नहीं कर रहा था, और इसके एवज में उस पर 1 करोड़ 55 लाख 62 हजार 500 रुपए की पेनल्टी लगाई थी। हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि बोर्ड द्वारा किया गया पेनल्टी कैलकुलेशन गलत था और उसके समर्थन में वह सबूत भी नहीं दे सका। इस मामले को लेकर सोसायटी की तरफ से एडवोकेट सुमित गहलोत, टीएस ठाकराओं, मंजू गहलोत और अभिषेक सिंह ने ट्रिब्यूनल में अपील की।
सुनवाई के दौरान एडवोकेट सुमित गहलोत ने कहा कि खराबी सिर्फ अगस्त 2022 में आई भयंकर बाढ़ की वजह से हुई थी, जिससे STP के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा था। हालांकि 20 जनवरी, 2023 तक रिपेयर का काम पूरा हो गया था। वकीलों ने बाद की टेस्ट रिपोर्ट को भी प्रस्तुत किया, जिससे पता चलता है कि रिपेयर के बाद प्लांट नियमों के मुताबिक काम कर रहा था।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद, जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ.ए.सेंथिल वेल की NGT बेंच ने पाया कि रिकॉर्ड में जो सामग्री प्रस्तुत की गई है, वह 27 अगस्त, 2022 से 24 फरवरी, 2023 तक सिर्फ़ 182 दिनों के लिए ही नियमों में गड़बड़ी (गैर-अनुपालन) के बारे में बता रही है। साथ ही ट्रिब्यूनल ने नोट किया कि HSPCB ने कोई नया निरीक्षण किए बिना या कोई तर्क दिए बिना ही वहां पर नियम उल्लंघन का समय 14 अक्टूबर, 2024 तक बढ़ा दिया। इस दौरान ट्रिब्यूनल ने पाया कि इस एक्सटेंशन के समर्थन में HSPCB ने कोई ठोस सबूत भी नहीं दिया और इसी कारण पेनल्टी बढ़ा दी गई।
ट्रिब्यूनल ने आगे नोट किया कि दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 में बोर्ड के इंस्पेक्शन में STP को सही पाया गया, जिससे अपील करने वाले की यह दलील मजबूत हुई कि फरवरी 2023 के बाद भी वहां उल्लंघन जारी नहीं था। इसके बाद NGT ट्रिब्यूनल ने यह मानते हुए कि 182 दिनों के लिए जुर्माना सही था, NGT ने फैसला सुनाया कि उल्लंघन का समय बढ़ाने की बोर्ड की कोशिश टिकने लायक नहीं थी।
अपने आखिरी ऑर्डर में, ट्रिब्यूनल ने अपील को कुछ हद तक मान लिया और पर्यावरण क्षतिपूर्ति को 1.55 करोड़ रुपए से घटाकर 68.25 लाख रुपए कर दिया, जिससे सोसाइटी में रहने वाले 573 परिवारों को काफी राहत मिली।

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