
चीनी जालसाज गूगल ट्रांसलेट से युवाओं को दे रहे ट्रेनिंग, सिखा रहे साइबर ठगी
म्यांमार में चीनी नागरिकों द्वारा संचालित साइबर ठगी रैकेट भारतीय युवाओं को कॉल सेंटर में कठोर प्रशिक्षण देकर ठगी करवा रहा था, जिसमें वे गूगल ट्रांसलेट और हिंदी-चीनी ट्रांसलेटर का उपयोग करते थे, जिसका खुलासा मानेसर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों ने किया है।
म्यांमार में चीनी जालसाज अवैध रूप से ठगी करने के लिए कॉल सेंटर स्थापित कर भारतीय युवाओं को प्रशिक्षित कर ठगी के लिए तैयार कर रहे थे। जालसाज भारतीय युवाओं से बातचीत करने के लिए गूगल ट्रांसलेट का इस्तेमाल कर रहे थे,ताकि बातचीत करने में ज्यादा दिक्कतें न हो।
जालसाजों ने बातचीत करने के लिए ट्रांसलेटर भी रखे हुए है,जिनको हिंदी और चीनी भाषा भी आती है। संपर्क करवाने में ट्रांसलेटर भी मदद करते थे। साइबर थाना मानेसर के द्वारा गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया। आरोपियों ने पूछताछ में खुलासा किया म्यांमार सेना ने अक्तूबर माह में केके पार्क क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। यह इलाका विभिन्न एशियाई देशों से लाए गए लोगों को बंधक बनाकर ठगी करवाने के लिए जाना जाता है।
इस छापेमारी के दौरान कई भारतीय नागरिक पकड़े गए, जिन्हें पहले एक कैंप में रखा गया और फिर डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई। 11 नवंबर को इन पीड़ितों को भारत वापस भेजा गया। जैसे ही वे गाजियाबाद एयरपोर्ट पर उतरे, उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनसे प्रारंभिक पूछताछ की ताकि इस अंतर्राष्ट्रीय रैकेट की कार्यप्रणाली को समझा। म्यामांर की तरफ से तीन फ्लाइट में भारतीय नागरिकों को वापस भारत भेजा गया,इनमें 64 हरियाणा के लोग शामिल है।
इंस्टाग्राम पर हुई थी बातचीत
संदीप ने पूछताछ में खुलासा किया कि 12वीं से पढ़ाई करने के बाद आईटीआई का कोर्स किया। साल 2024 में इंस्टाग्राम पर उत्तरप्रदेश निवासी नीरव जाट से इंस्टाग्राम पर बातचीत हुई। नीरव ने बैंकांक में नौकरी की बात कहीं,रुपयों की जरूरत होने पर साइबर ठगी दिसंबर 2024 में की नौकरी शुरू की। पहले चरण में विदेशी नागरिकों की तलाश करने का काम दिया गया। वहां केके पार्क की बिल्डिंग में एचआर ने भारतीय नागरिकों को ठगी के लिए बुलाने के लिए कहा गया और उसके एवज में कमीशन देने की बात कहीं।
ठगी के रैकेट का चीनी मॉडल
यह रैकेट पूरी तरह से चीन के नागरिकों द्वारा संचालित किया जाता है। गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि ठगी के इस खेल के लिए उन्हें कई चरणों में कठोर प्रशिक्षण दिया जाता था। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पिग बुचरिंग जैसे जटिल साइबर स्कैम को अंजाम देना है। प्रशिक्षण के दौरान भारतीय युवकों को विशेष रूप से विदेशी नागरिकों (जैसे अमेरिका, कनाडा या यूरोपीय देशों के लोग) की पहचान करना और उन्हें भावनात्मक रूप से फंसाना सिखाया जाता है। उन्हें बताया जाता था कि कैसे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना है।





