मुस्लिमों ने मान ली BJP विधायक की अपील, इस तरह मनाया बकरीद का त्योहार

Subodh Kumar Mishra पीटीआई, गाजियाबाद
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गाजियाबाद के लोनी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बीजेपी विधायक की एक अपील की मान रख ली। उन्होंने असली बकरे की जगह केक से बने बकरे को काटकर बकरीद मनाया। विधायक ने जानवरों की बलि देने के बजाय पर्यावरण के अनुकूल त्योहार मनाने की अपील की थी।

मुस्लिमों ने मान ली BJP विधायक की अपील, इस तरह मनाया बकरीद का त्योहार

गाजियाबाद के लोनी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बीजेपी विधायक की एक अपील की मान रख ली। उन्होंने असली बकरे की जगह केक से बने बकरे को काटकर बकरीद मनाया। विधायक ने जानवरों की बलि देने के बजाय पर्यावरण के अनुकूल त्योहार मनाने की अपील की थी।

पर्यावरण अनुकूल त्योहार मनाया

गाजियाबाद के लोनी में इस ईद-उल-अजहा पर कई मुस्लिम परिवारों ने जानवरों की कुर्बानी की जगह बकरे के आकार के केक काटकर त्योहार मनाया। बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर की अपील के बाद लोगों ने पर्यावरण के अनुकूल तरीके से यह त्योहार मनाया। लोनी के अलग-अलग हिस्सों से सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आए हैं। इन वीडियो में लोग अपने परिवार के साथ बकरे के आकार के केक काटते हुए या बकरे की तस्वीरों से सजे केक काटते दिख रहे हैं।

समय के साथ बदलाव जरूरी

स्थानीय लोगों खालिद, चांद, अरबाज, कमरुद्दीन अंसारी, हाजी लियाकत और हाजी बाबू ने विधायक की अपील का स्वागत किया। इन लोगों ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा और आपसी भाईचारा हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। कुछ लोगों ने कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है। इस तरह की पहल से प्यार, भाईचारा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में मदद मिलती है।

मिसाल कायम करने वाला बताया

बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने लोनी में मुस्लिम समुदाय के लोगों को बधाई दी और इस पहल को ऐतिहासिक और मिसाल कायम करने वाला बताया। विधायक ने कहा कि पर्यावरण-अनुकूल बरकीद का संदेश न केवल लोनी को बल्कि पूरे समाज को प्रेरित करेगा। उन्होंने आगे कहा कि त्योहार शांति, प्रेम और भाईचारे के प्रतीक होते हैं।

पूरी दुनिया में जाएगा संदेश

एक वीडियो बयान में, विधायक गुर्जर ने कहा कि लोनी के मुसलमान बकरी के आकार के केक काटकर पर्यावरण-अनुकूल तरीके से ईद मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संदेश न केवल पूरे उत्तर प्रदेश और देश में बल्कि पूरी दुनिया में जाएगा। विधायक ने जानवरों की बलि को प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से भी जोड़ा।

जानवरों की बलि देने से परहेज

एक वीडियो में एक मुस्लिम परिवार को बकरी के आकार का केक काटते हुए दिखाया गया है। इसमें परिवार के एक बुज़ुर्ग सदस्य ने कहा कि उन्होंने इस तरह से बकरीद मनाकर विधायक की अपील पूरी की है। सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो के अनुसार, त्योहार के दौरान कई अन्य लोगों को भी इसी तरह के केक आपस में बांटते और खाते हुए देखा गया। उन्होंने जानवरों की बलि देने से परहेज किया।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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