‘मिनी-ट्रायल,सबूतों की चुनिंदा रीडिंग’; शराब नीति केस में 23 लोगों को बरी करने पर दिल्ली हाईकोर्ट गई CBI

Mar 02, 2026 01:11 pm ISTPraveen Sharma नई दिल्ली, एएनआई
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सीबीआई ने दिल्ली शराब नीति केस में फंसे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 लोगों को आरोपमुक्त करने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सीबीआई की ओर से अपील में कहा गया है कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के डिस्चार्ज और चार्ज फ्रेम करने के तय सिद्धांतों के खिलाफ है।

‘मिनी-ट्रायल,सबूतों की चुनिंदा रीडिंग’; शराब नीति केस में 23 लोगों को बरी करने पर दिल्ली हाईकोर्ट गई CBI

सीबीआई ने दिल्ली शराब नीति केस में फंसे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 लोगों को आरोपमुक्त करने के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सीबीआई ने अपनी अपील में आरोप लगाया है कि ट्रायल कोर्ट ने चार्ज फ्रेम करने के स्टेज पर ‘मिनी-ट्रायल’ किया और प्रॉसिक्यूशन के केस को चुनिंदा ढंग से पढ़कर ‘साफ तौर पर गैर-कानूनी और गलत’ ऑर्डर पास किया। सीबीआई की ओर से अपील में कहा गया है कि यह ऑर्डर सुप्रीम कोर्ट के डिस्चार्ज और चार्ज फ्रेम करने के तय सिद्धांतों के खिलाफ है। हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा की बेंच 9 मार्च को सीबीआई की अपील पर सुनवाई करेगी।

सीबीआई ने अपील यह दलील दी कि स्पेशल कोर्ट ने यह देखने के बजाय कि पहली नजर में कोई मामला बनता है या नहीं, पूरे ट्रायल की तरह सबूतों की डिटेल में जांच की। सीबीआई ने कहा कि स्पेशल जज ने कथित साजिश को अलग-अलग हिस्सों में बांटा और उन्हें अलग-अलग जांचा और जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों के कुल असर को नजरअंदाज कर दिया।

सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में बताईं गलतियां

सीबीआई की अपील के अनुसार, जिस आदेश पर सवाल उठाया गया है, उसमें रिकॉर्ड देखने पर साफ दिखने वाली गलतियां हैं और यह प्रॉसिक्यूशन के केस को सही नजरिये से समझने में नाकाम रहा है।

सीबीआई ने कहा कि चार्ज फ्रेम करने के स्टेज पर रिकॉर्ड में मौजूद साक्ष्यों को बिना किसी विवाद के माना जाना चाहिए। यह तय करने के लिए कि आगे बढ़ने को काफी आधार हैं या नहीं, सिर्फ एक बड़े असेसमेंट की जरूरत है। इसके बजाय, ट्रायल कोर्ट ने कथित तौर पर छोटी-मोटी उलझनों और उन पहलुओं की जांच की जो प्रॉसिक्यूशन के केस के लिए जरूरी भी नहीं थे।

'स्पेशल जज ने साजिश की थ्योरी की बुनियाद को नजरअंदाज किया'

सीबीआई ने आगे कहा कि भले ही आरोपियों के अलग-अलग कामों से अकेले यह साबित न हो कि उन्होंने गलत काम किया है, लेकिन जब उन्हें एक साथ देखा जाता है, तो वे अब खत्म हो चुकी शराब नीति से पैसे कमाने की एक बड़ी साजिश का खुलासा करते हैं। सेंट्रल जांच एजेंसी ने दावा किया कि स्पेशल जज ने साजिश की थ्योरी की बुनियाद को नजरअंदाज किया और उसकी जगह अलग-अलग आरोपियों की भूमिकाओं का अपना मतलब बताया।

सीबीआई ने जांच अधिकारी पर की गई टिप्पणियों को बताया समझ से परे

सीबीआई ने जांच एजेंसी और जांच अधिकारी के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को चुनौती देते हुए उन्हें गैर-जरूरी और समझ से परे बताया। इसके साथ ही यह भी बताया कि एग्जीक्यूटिव के सबसे ऊंचे लेवल पर करप्शन के आरोपों से जुड़ा केस गलत कानूनी नतीजों और रिकॉर्ड को गलत तरीके से पढ़ने के आधार पर खारिज कर दिया गया।

ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को दिया था आदेश

गौरतलब है कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने 27 फरवरी को दिल्ली शराब नीति 2021-22 के संबंध में सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए केस में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने माना कि प्रथमदृष्टया कोई केस नहीं बनता और कहा कि प्रॉसिक्यूशन की साजिश की थ्योरी कानूनी तौर पर ठोस सबूतों के बजाय अंदाजों पर आधारित थी।

ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई के एक अप्रूवर के बयान पर भरोसा करने पर भी चिंता जताई थी और यह इशारा किया था कि वह सीबीआई के कुछ अफसरों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश करेगा। यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें कहा गया था कि शराब नीति कुछ खास प्राइवेट लाइसेंस होल्डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थी, जिससे कथित तौर पर रिश्वत मिली और दिल्ली सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें