काम की बात: नोएडा-गाजियाबाद में श्रमिकों को मिलेगी सबसे ज्यादा ‘सैलरी’, कितनी बढ़ी; UP की पूरी लिस्ट
नोएडा-गाजियाबाद से फरीदाबाद-पलवल तक एनसीआर में सोमवार को हुए उग्र श्रमिक आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी की दरों में इजाफा कर दिया है।

नोएडा-गाजियाबाद से लेकर पलवल-फरीदाबाद तक में सोमवार को हुए श्रमिक आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में इजाफा कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित उच्च अधिकार प्राप्त समूह की सिफारिशों पर अकुशल, अर्धकुशल और कुशल मजदूरों के न्यूनतम वेतन में वृद्धि की गई है। खास बात यह है कि सबसे अधिक मजदूरी नोएडा और गाजियाबाद में मिलेगी। इसके अलावा नगर निगम वाले अन्य जनपदों और गैर नगर निगम वाले जनपदों में मजूदरी की दर अलग-अलग है।
अकुशल कर्मचारियों को कितना वेतन मिलेगा
उत्तर प्रदेश में अभी तक अकुश मजदूरों को 11313 रुपये न्यूनतम मजदूरी (मूल वेतन और महंगाई भत्ता) मिलती थी। नोएडा और गाजियाबाद में अब 2377 रुपये का इजाफा किया गया है। इन दो जनपदों में काम करने वाले अकुशल मजदूरों को अब न्यूनतम 13690 रुपये मिलेंगे। नगर निगम वाले अन्य जनपदों के लिए यह दर 13006 रुपये, जबकि अन्य जनपदों के लिए 12356 रुपये तय की गई है।
अर्धकुशल श्रमिकों के लिए कितनी खुशखबरी
अर्धकुशल कर्मचारियों के लिए उत्तर प्रदेश में पहले 12445 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय थी। नोएडा और गाजियाबाद में अर्धकुशल श्रमिकों के लिए मासिक 2614 रुपये का इजाफा किया गया है। नोएडा गाजियाबाद में अब उन्हें 1509 रुपये, अन्य नगर निगम वाले जनपदों में 14306 रुपये और अन्य जनपदों में 13591 रुपये मिलेंगे।
कुशल श्रमिकों को कितना लाभ
कुशल श्रमिकों के लिए उत्तर प्रदेश में अभी तक 13940 रुपये न्यूनतम मजदूरी तय थी। नोएडा, गाजियाबाद में कुशल श्रमिकों को अब मासिक 2908 रुपये अधिक मिलेंगे। प्रति माह उन्हें न्यूनतम 16868 रुपये मिलेंगे। नगर निगम वाले अन्य जनपदों में अब 16025 रुपये और अन्य जनपदों में 15224 रुपये मिलेंगे।
20 हजार सैलरी वाली बात झूठी
नोएडा डीएम की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह मनगढ़ंत एवं झूठा समाचार प्रचारित किया जा रहा है कि श्रमिकों का न्यूनतम वेतन ₹20000 प्रति माह निर्धारित कर दिया गया है, जिसका अनुपालन नियोक्ता संगठनों द्वारा नहीं किया जा रहा है। वस्तुस्थिति यह है कि भारत सरकार द्वारा नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम "फ्लोर वेज" निर्धारित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। इस पहल का उद्देश्य देशभर के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की एक समान आधार रेखा सुनिश्चित करना है, जिससे सभी राज्यों में श्रमिकों को न्यायसंगत एवं उचित पारिश्रमिक प्राप्त हो सके। राज्य सरकार द्वारा भी नियोक्ता संगठनों एवं श्रमिक संगठनों सहित सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है। प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण किया जा रहा है, ताकि संतुलित एवं व्यावहारिक निर्णय लिया जा सके।
लेखक के बारे में
Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
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