
रोजाना 3200 मीट्रिक टन कचरे को रिसाइकिल करेगी एमसीडी, पेश होंगे प्रस्ताव
दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी प्रशासन ने रोज जमा होने वाले नए कचरे को रिसाइकल करने की योजना बनाई है। योजना कुल 3200 मीट्रिक टन कचरे को रिसाइकिल करने की है। इसको लेकर प्रस्ताव पेश किए जाएंगे।
दिल्ली नगर निगम प्रशासन ने रोज एकत्रित होने वाले नए कचरे को रिसाइकल व निस्तारण करने की योजना बनाई है। इसके तहत कुल 3200 मीट्रिक टन नए कचरे को रिसाइकिल किया जाएगा। इसमें भलस्वा लैंडफिल साइट में 1800 मीट्रिक टन और ओखला लैंडफिल साइट में 1400 मीट्रिक टन नए कचरे को रिसाइकल व निस्तारण किया जाएगा। इस संबंध में आगामी छह नवंबर को गुरुवार के दिन निगम के सदन की बैठक में दो प्रस्ताव प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। अब तक निगम प्रशासन तीनों लैंडफिल साइटों में मौजूद वर्षों पुराने कूड़े के ढेर को जैव खनन करते हुए उसे खत्म कर रहा था।

हर दिन जमा हो रहा 12 हजार मीट्रिक टन कूड़ा
इस संबंध में पर्यावरण प्रबंधन सेवाएं समिति के अध्यक्ष संदीप कपूर ने बताया कि अब निगम प्रशासन द्वारा दिल्ली से हर दिन 12 हजार मीट्रिक टन कूड़ा इकट्ठा किया जा रहा है। इसमें से छह हजार मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण व रिसाइकल चार वेस्ट टू एनर्जी प्लांट, सी एंड प्लांट व अन्य से किया जाता है। अन्य छह हजार मीट्रिक टन कूड़े में से 3200 मीट्रिक टन नए कचरे को रिसाइकल किया जाएगा।
कचरे को रिसाइकल कर बनाए जाएंगे उत्पाद
भलस्वा लैंडफिल साइट में पुराने कचरे को जैव खनन की प्रक्रिया से खत्म कर 25 एकड़ भूमि वापस प्राप्त हुई है। इसमें से भलस्वा लैंडफिल साइट में 15 एकड़ भूमि पर नई ट्रोमल मशीनों को स्थापित करेंगे। जिसके जरिए 1800 मीट्रिक टन कूड़े को रिसाइकिल किया जाएगा। इसी तरह से ओखला लैंडफिल साइट पर जैव खनन करने के बाद खाली हुई भूमि पर 1400 मीट्रिक टन कूड़े को रिसाइकिल करेंगे। इसके जरिए सूखे व गीले कचरे को रिसाइकल कर उत्पाद बनाए जाएंगे। गीले कचरे से खाद बनाएंगे।
'निगम का प्रयास लैंडफिल साइट में नया कचरा न पहुंचे'
संदीप कपूर ने बताया कि निगम की योजना है कि दिल्ली से हर दिन इकट्ठा होने वाले कचरे को पूरी तरह से अपशिष्ट प्रबंधन के तहत रिसाइकल करें। जिससे लैंडफिल साइट पर प्रत्येक दिन इकट्ठा होने वाला नया कचरा न पहुंचे। निगम इस योजना पर काम कर रहा है। गुरुवार को सदन में प्रस्तुत होने वाले प्रस्ताव के जरिए नए कचरे को रिसाइकल करने में सहयोग मिलेगा। वर्षों पुराने मौजूद कचरे की जैव खनन की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी।





