MCD में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा, डिप्टी कमिश्नर रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार
सीबीआई ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के शाहदरा नॉर्थ जोन में भ्रष्टाचार के बड़े मामले का खुलासा किया है। डिप्टी कमिश्नर (निगम उपायुक्त) अभिषेक मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी देवांशु गौतम को रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।

सीबीआई ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के शाहदरा नॉर्थ जोन में भ्रष्टाचार के बड़े मामले का खुलासा किया है। डिप्टी कमिश्नर (निगम उपायुक्त) अभिषेक मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारी देवांशु गौतम को रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि निगम उपायुक्त अभिषेक मिश्रा एमसीडी के दो निलंबित कर्मचारियों के खिलाफ एक शिकायत की जांच कर रहे थे। आरोप है कि देवांशु गौतम ने निगम उपायुक्त की ओर से शिकायतकर्ताओं से चार लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह रकम उनके पक्ष में जांच रिपोर्ट आगे बढ़ाने के बदले मांगी गई थी।
सीबीआई ने शिकायत के आधार पर 30 मार्च 2026 को मामला दर्ज किया था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने शिकायत के आधार पर जाल बिछाया और कार्रवाई करते हुए प्रशासनिक अधिकारी को रंगे हाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।
अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान डिप्टी कमिश्नर अभिषेक मिश्रा की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई ने दोनों आरोपियों को राउज एवेन्यू स्थित विशेष जज दिग्विनय सिंह की अदालत में पेश किया। अदालत ने आरोपी अधिकारियों को पूछताछ के लिए एक दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है।
निगम में 50% पद आरक्षित किए जाएं
दिल्ली में निगम के डीसी और प्रशासनिक अधिकारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने पर लोगों ने एमसीडी में प्रतिनियुक्ति पर अधिकारियों की तैनाती पर सवाल उठाए हैं। चांदनी चौक नागरिक मंच के महासचिव प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि एमसीडी में डिप्टी कमिश्नर और अतिरिक्त कमिश्नर के कम से कम 50 फीसदी पद दानिक्स या एमसीडी वर्ग के अफसरों के लिए आरक्षित किए जाएं।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


