अब 50 करोड़ तक के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकेंगे MCD कमिश्नर, दिल्ली सरकार का फैसला; क्या फायदे
दिल्ली सरकार ने नगर निगम के कमिश्नर के फाइनेंशियल पावर को 10 गुना बढ़ा दिया है। अब वे 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकेंगे। सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि यह फैसला लोगों के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। इससे राजधानी के लोगों को सीधा फायदा होगा।

दिल्ली सरकार ने नगर निगम के कमिश्नर के फाइनेंशियल पावर को 10 गुना बढ़ा दिया है। अब वे 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकेंगे। सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि यह फैसला लोगों के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। इससे राजधानी के लोगों को सीधा फायदा होगा।
मुख्ख्यमंत्री कार्यालय ने शनिवार को बताया कि दिल्ली सरकार ने शहर के म्युनिसिपल कमिश्नर की फाइनेंशियल पावर को 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए कर दिया है। इससे प्रोजेक्ट को तेजी से मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
इस फैसले के बारे में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि विकास के लिए लोकल बॉडीज़ को मजबूत करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह फैसला लोगों के हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। इससे राजधानी के लोगों को सीधा फायदा होगा।
सीएम ने कहा कि विकास कार्यों को समय पर पूरा करने से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा और सरकारी खर्च की क्षमता बढ़ेगी। फिलहाल, दिल्ली नगर निगम कमिश्नर सिर्फ 5 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट को ही मंजूरी दे सकते हैं। दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बयान में कहा गया है कि इस रकम से ज्यादा के प्रोजेक्ट के लिए कॉर्पोरेशन की स्टैंडिंग कमेटी से मंजूरी लेनी होती है, जिसके बाद कॉर्पोरेशन के हाउस से फाइनल मंजूरी मिलती है।
इसमें कहा गया है कि इस मल्टी-टियर अप्रूवल सिस्टम की वजह से अक्सर डेवलपमेंट के कामों को पूरा करने में बेवजह देरी होती थी। बयान में कहा गया है कि कमिश्नर की फाइनेंशियल पावर को बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए करने से योजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया आसान, तेज और ज्यादा असरदार होगी।
इसमें कहा गया है कि फाइनेंशियल पावर के इस बढ़े हुए डेलिगेशन से सड़कों, नालियों, सैनिटेशन, कम्युनिटी सुविधाओं और दूसरी जरूरी नागरिक सेवाओं से जुड़े कामों को समय पर पूरा करने में आसानी होगी। बयान में यह भी कहा गया है कि इससे लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी, प्रोसेस में आने वाली रुकावटें कम होंगी और यह पक्का होगा कि डेवलपमेंट की पहल बिना किसी देरी के लोगों तक पहुंचे।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


