सिसोदिया की 2020 की जीत को चुनौती; हाईकोर्ट का सुनवाई से इनकार, क्या कहा?

Feb 26, 2026 01:03 pm ISTKrishna Bihari Singh हिन्दुस्तान, हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
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दिल्ली हाई कोर्ट ने मनीष सिसोदिया के 2020 चुनाव की जीत को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने शिकायत वापस ले ली। जानें अदालत ने क्या कहा?

सिसोदिया की 2020 की जीत को चुनौती; हाईकोर्ट का सुनवाई से इनकार, क्या कहा?

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें 2020 के विधानसभा चुनावों में पटपड़गंज निर्वाचन क्षेत्र से आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी गई थी।

क्या बोली अदालत?

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह अपील उच्च न्यायालय में सुनवाई योग्य नहीं है और इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 116ए के तहत सर्वोच्च न्यायालय में दायर किया जाना चाहिए।

क्या कहता है कानून?

बता दें कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 116ए चुनाव याचिकाओं के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए किसी भी अंतिम आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सीधी अपील का प्रावधान करती है।

प्रताप चंद्र ने डाली थी अपील

यह अपील प्रताप चंद्र द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में सिसोदिया के विरुद्ध चुनाव लड़ा था।

सुप्रीम कोर्ट का करना होगा रुख

चूंकि चंद्र आज स्वयं उपस्थित हुए, इसलिए पीठ ने प्रारंभ में ही उनसे धारा 116ए को पढ़ने के लिए कहा और इस बात पर जोर दिया कि यदि वे एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देना चाहते हैं तो उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का रुख करना होगा।

वापस ली अपील

इस बात की ओर ध्यान दिलाए जाने पर चंद्र ने अपील वापस ले ली। उच्च न्यायालय ने कहा कि यह बताए जाने पर कि विवादित आदेश आरपीए की धारा 116ए के तहत सर्वोच्च न्यायालय में अपील योग्य है, अपीलकर्ता ने अपील वापस लेने का अनुरोध किया है। इसलिए अपील वापस ले ली गई मानकर खारिज की जाती है।

क्या लगाया था आरोप?

प्रताप चंद्र ने आरोप लगाया था कि मतदान समाप्त होने से पहले प्रतिबंधित 48 घंटे की अवधि के दौरान सिसोदिया द्वारा चुनाव प्रचार और चुनाव सामग्री का प्रदर्शन जारी रहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिसोदिया ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 के तहत 2013 में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर का विवरण नहीं दिया, जो महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के बराबर है।

सिंगल बेंच ने क्या कहा था?

उनकी चुनौती को खारिज करते हुए एकल न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि चंद्र द्वारा उल्लेखित आपराधिक मामले में कोई आरोप निर्धारित नहीं किया गया है। वह यह साबित करने में भी विफल रहे हैं कि सिसोदिया को उक्त एफआईआर की जानकारी थी। न्यायालय ने आगे टिप्पणी की कि चंद्र अपनी चुनाव याचिका में कोई विशिष्ट कारण स्थापित करने में विफल रहे हैं।

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