अब 'कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक' लॉन्च, मनीष ने कहा- इसे केजरीवाल की टीम नहीं बनने देंगे

एएनआई, नई दिल्ली
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अभिजीत दीपके की सीजेपी के बाद अब 'कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक'लॉन्च किया गया है। गुरुवार को इस पॉलिटिकल प्लेटफॉर्म को लॉन्च करने का ऐलान करते हुए मनीष ब्रह्मभट्ट ने वॉलंटियर्स से अपील की कि वे इसे केजरीवाल की टीम बनाने के बजाय एक ऐसी नेशनल टीम बनाएं जो सच में लोकतांत्रिक और पारदर्शी हो।

कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक
कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक

कॉकरोच जनता पार्टी के बाद अब 'कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक'लॉन्च किया गया है। गुरुवार को इस पॉलिटिकल प्लेटफॉर्म को लॉन्च करने का ऐलान करते हुए मनीष ब्रह्मभट्ट ने वॉलंटियर्स से अपील की कि वे इसे केजरीवाल की टीम बनाने के बजाय एक ऐसी नेशनल टीम बनाएं। मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि हम 'कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक' लॉन्च कर रहे हैं। इसके लिए आज हम देश के लिए सोशल मीडिया अकाउंट्स, एक वॉट्सऐप नंबर और एक मिस्ड-कॉल नंबर की घोषणा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह संगठन पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान देगा। उन्होंने दावा किया कि अहम फैसले लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए लिए जाएंगे, जिसमें इसके सदस्य शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि जो कोई भी 'कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक' से जुड़ना चाहता है और पारदर्शिता व जवाबदेही का समर्थन करता है वे इसमें शामिल हो सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर उन लोगों का स्वागत है जिनका मानना ​​है कि जवाबदेही सिर्फ सरकार की ही नहीं, बल्कि टीम की भी होनी चाहिए। जो इस बात से सहमत हैं कि सभी फैसले लेने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाई जानी चाहिए।

ब्रह्मभट्ट ने कहा कि यह पहल उस चिंता से उपजी है कि किस तरह बाद में व्यापक आंदोलन का स्वरूप बदल गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिसे उन्होंने 'जन-आंदोलन' बताया था, उस पर राजनीतिक हितों ने कब्जा कर लिया। उन्होंने कहा कि हमारा एकमात्र मकसद यही है कि हमने उनसे प्यार से गुजारिश की और हर तरह से समझाने की कोशिश की कि यह देश का आंदोलन है, देश जाग चुका है। देश के प्रति इस योगदान को समझें और लोकतांत्रिक तरीके से देश की टीम बनाने की कोशिश करें। अपनी टीम बनाएं, इसे केजरीवाल की टीम न बनाएं।

उन्होंने उस प्रक्रिया की भी आलोचना की जिसके तहत एक और टीम बनाई गई थी। उनका आरोप था कि वॉलंटियर्स से ठीक से सलाह-मशविरा नहीं किया गया और चुने हुए लोगों को प्राथमिकता दी गई। ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि दिल्ली में वॉलंटियर्स की एक मीटिंग के दौरान लोगों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए थे। उनसे कहा गया था कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि मीटिंग की कार्यवाही रिकॉर्ड न हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसे काम उस पारदर्शिता के खिलाफ थे जिसकी उम्मीद वे एक ऐसे आंदोलन से करते थे जो स्थापित राजनीतिक व्यवस्थाओं को चुनौती देना चाहता था।

उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ पहले चले अभियानों का भी जिक्र किया और कहा कि उनके ग्रुप ने किसी खास राजनीतिक पार्टी के बजाय मुद्दों का समर्थन किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नया प्लेटफॉर्म भ्रष्टाचार और जिसे उन्होंने गटर सिस्टम कहा, उसके खिलाफ सवाल उठाएगा। चाहे उसमें कोई भी राजनीतिक पार्टी या सरकार शामिल हो।

ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनका मकसद सिर्फ एक पार्टी को हराना है। उनकी मंशा लोगों की बात रखने, लड़ने या किसी भ्रष्ट या बेकार सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने की नहीं है, चाहे वह कोई भी पार्टी या राज्य हो। इसीलिए आज हम 'कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक' बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए अपनी राष्ट्रीय टीम चुनेगा और फैसले लेने में पारदर्शिता बरतेगा। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि हमारा हर फैसला पारदर्शिता के साथ, लोकतांत्रिक तरीके से और सबकी राय लेकर लिया जाएगा। यह सभी लोगों और देश से हमारा वादा है। उन्होंने नागरिकों और वॉलंटियर्स से अपील की कि वे घोषित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वाट्सऐप और मिस्ड-कॉल सुविधा के जरिए इस पहल से जुड़ें।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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