हद हो गई! AIIMS में 14 साल से नहीं मिली ऑपरेशन की डेट, बेटी को लेकर भटक रहा बेबस पिता
बीमारी के इलाज में एक दिन की भी देरी मरीज और उसके परिवार के लिए बहुत कष्टकारी होती है। इसके बाद भी सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अपना इलाज कराने के लिए महीनों लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसा ही एक बेबस पिता बेटी के हार्ट की सर्जरी के लिए पिछले 14 साल से एम्स के चक्कर लगा रहा है।

सर्जरी की लंबी तारीख मिलने की बात तो दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में अक्सर सामने आती है, लेकिन कोटा के रहने वाले मुकेश कुमार पिछले 14 साल से अपनी बेटी के दिल का ऑपरेशन कराने के लिए दिल्ली एम्स के चक्कर काट रहे हैं।
वर्ष 2012 में अपनी पौने दो साल की बेटी के दिल के छेद का ऑपरेशन कराने के लिए दिल्ली एम्स पहुंचे मुकेश को डॉक्टरों ने सर्जरी के लिए सितंबर 2015 की तारीख दी थी, लेकिन अभी तक ऑपरेशन नहीं किया गया। बच्ची अब 16 साल की हो चुकी है और अपनी बीमारी के साथ ही जीवन जी रही है।
कपड़े की दुकान पर सेल्समैन की नौकरी करने वाले गुमानपुर कोटा निवासी मुकेश कुमार का कहना है कि उनकी बेटी तनवी के जन्म से ही वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (दिल में छेद) है। पहली बार वे 10 अक्टूबर 2012 को दिल्ली एम्स में उसे दिखाने आए थे। डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए कहा और 2 सितंबर 2015 को बुलाया। बाद में इस तय तारीख को बदलकर 16 नवंबर 2015 कर दिया गया। फिर दिसंबर में बुलाया गया और तनवी को भर्ती कर लिया गया। आरोप है कि दांतों में कीड़े लगे होने की बात कहकर सर्जरी टाल दी गई और 4 जनवरी, 2016 को बुलाया गया। इसके बाद बार-बार तारीख बदली गई, लेकिन ऑपरेशन नहीं हुआ, तभी से वो चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सर्जरी नहीं हो पा रही है।
1.55 लाख रुपये और चार यूनिट ब्लड भी ले लिया
मुकेश का आरोप है कि 4 अप्रैल 2014 को एम्स के डॉक्टर ने उनसे ऑपरेशन के लिए 1,25,000 लाख रुपये जमा करा लिए और चार यूनिट रक्त भी जमा लिया। इसके बाद सर्जरी के लिए दो सितंबर 2015 की तारीख दे दी गई, लेकिन अस्पताल आने पर बेड खाली नहीं होने की बात कह कर भर्ती नहीं किया। बाद में बताया कि एक इंप्लांट डालना पड़ेगा। इसके लिए डॉक्टर ने दवा कंपनी के एक प्रतिनिधि का नंबर लिखकर दिया। उसने 30 हजार रुपये लिए और कहा कि इंप्लांट सीधे अस्पताल में पहुंच जाएगा। अब तक 1.55 लाख रुपये और चार यूनिट रक्त लेने के बाद भी ऑपरेशन नहीं किया गया।
कहीं सांसद के पीए का फोन तो वजह नहीं
तनवी के पिता मुकेश का आरोप है कि बार-बार तारीख बदले जाने से परेशान होकर उन्होंने अपने क्षेत्र के सांसद से अनुरोध किया। उनके पीए ने एम्स के संबंधित डॉक्टर को फोन किया। इस पर दोनों में बहस हो गई। आरोप है कि अब एम्स के संबंधित डॉक्टर नाराजगी के कारण ऑपरेशन नहीं कर रहे हैं। अब कभी जीबी पंत तो कभी हैदराबाद के अस्पताल में जाकर इलाज कराने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि हैदराबाद में सर्जरी का खर्च 6 लाख रुपये है और वे इतनी रकम जुटाने में असमर्थ हैं।
डॉ. रीमा दादा, मीडिया प्रभारी, एम्स दिल्ली, ''यह चिंता का विषय है। मामले की जांच की जाएगी और इस समस्या का समाधान कराया जाएगा।''


