नोएडा में अब मेड सड़कों पर उतरीं, वेतन वृद्धि समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन

Apr 16, 2026 06:53 am ISTSubodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान, नोएडा
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नोएडा में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के बाद हाउसिंग सोसाइटियों में काम करने वाली घरेलू सहायिकाओं का भी आंदोलन शुरू हो गया है। वेतन वृद्धि समेत कई अन्य मांगों को लेकर घरेलू सहायिकाओं ने बुधवार को सेक्टर-137 में प्रदर्शन किया। कई सोसाइटियों में घरेलू सहायिकाएं काम करने नहीं पहुंचीं।

नोएडा में अब मेड सड़कों पर उतरीं, वेतन वृद्धि समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन

नोएडा में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के बाद हाउसिंग सोसाइटियों में काम करने वाली घरेलू सहायिकाओं का भी आंदोलन शुरू हो गया है। वेतन वृद्धि समेत कई अन्य मांगों को लेकर आंदोलन में जुटीं घरेलू सहायिकाओं ने बुधवार को सेक्टर-137 में प्रदर्शन किया। इसके चलते कई सोसाइटियों में घरेलू सहायिकाएं काम करने नहीं पहुंचीं। इसके चलते सोसाइटियों में रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

मंगलवार को सेक्टर-74 स्थित सुपरटेक केपटाउन और सेक्टर-121 स्थित क्लियो काउंटी सोसाइटी के बाहर प्रदर्शन हाने के बाद बुधवार को भी सेक्टर-137 में घरेलू सहायिकाओं ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पूर्वांचल सोसाइटी, इकोसिटी सोसाइटी और आसपास की अन्य हाउसिंग सोसाइटी के बाहर किया जा रहा है। बड़ी संख्या में घरेलू सहायिकाओं ने एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि उन्हें काम के बदले उचित वेतन नहीं मिल रहा, साथ ही कई जगहों पर काम के घंटे भी तय नहीं हैं।

इसके अलावा सोसाइटी के कड़े नियम-जैसे प्रवेश-निकास की पाबंदियां, पहचान पत्र की अनिवार्यता और लिफ्ट के उपयोग पर भी प्रतिबंध है। इसके चलते उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ कामगारों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार भी नहीं किया जाता है। हालांकि, सोसाइटी प्रबंधन का कहना है कि ये नियम सुरक्षा कारणों से बनाए गए हैं और सभी कर्मचारियों की पहचान सुनिश्चित करना आवश्यक है। उनका यह भी कहना है कि वे स्थिति को समझदारी से सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं और कामगारों की समस्याओं पर बातचीत के लिए तैयार हैं।

तोड़फोड़-आगजनी करने वाले 600 लोगों पर केस

नोएडा के सेक्टर-58 में सोमवार को श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन के दौरान कंपनी में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की गई। कंपनी प्रतिनिधि ने मंगलवार रात 600 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

सेक्टर-58 स्थित सुंदर हेल्थ बड्डी लिमिटेड के प्रतिनिधि संजय कुमार गुप्ता ने पुलिस को बताया कि वह 13 अप्रैल की दोपहर करीब 12 बजे कंपनी में थे। इसी बीच करीब 500-600 श्रमिक कंपनी के बाहर एकत्र हो गए। बड़ी संख्या में श्रमिक कंपनी के अंदर घुस आए और तोड़फोड़ शुरू कर दी। इसके चलते कंपनी में लगे 50 से अधिक शीशे टूट गए। सिक्योरिटी गार्ड के कमरे में रखे कुर्सी-मेज और आवश्यक दस्तावेजों में आग लगा दी। इस दौरान कंपनी में काम कर रहे कर्मचारी भयभीत हो गए।

सूचना पर पहुंची पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया। दमकलकर्मियों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कंपनी में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है। जल्द ही आरोपियों को चिह्नित करके गिरफ्तार किया जाएगा।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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