पुलिस वाला बन गया कॉन्ट्रैक्ट किलर, एयरफोर्स के पूर्व अफसर को बेटों ने मरवा डाला
गाजियाबाद के लोनी थाना पुलिस ने एयरफोर्स के रिटायर्ड अफसर की हत्या का खुलासा कर दिया है। मृतक के दोनों बेटों ने ही रिटायरमेंट फंड के रुपयों के लिए यूपी पुलिस के एक सिपाही को 5 लाख रुपये की सुपारी देकर पिता की हत्या कराई थी।

गाजियाबाद के लोनी थाना पुलिस ने एयरफोर्स के रिटायर्ड अफसर की हत्या का खुलासा कर दिया है। मृतक के दोनों बेटों ने ही रिटायरमेंट फंड के रुपयों के लिए यूपी पुलिस के एक सिपाही को 5 लाख रुपये की सुपारी देकर पिता की हत्या कराई थी। सिपाही ने अपने साले संग मिलकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया था।
सिपाही के साले को पुलिस ने गिरफ्तार कर बाइक, तमंचा, चार कारतूस और लोहे का पाइप बरामद किया है। बाकी तीनों आरोपी अभी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपी पर 17 साल पहले पिता के साथ मिलकर परिवार के सात लोगों की हत्या करने का आरोप है।
अशोक विहार कॉलोनी निवासी एयरफोर्स के रिटायर्ड वारंट अफसर योगेश कुमार की दिल्ली सहारनपुर रोड किनारे 26 दिसंबर को बाइक सवार दो बदमाशों ने दो गोली मारकर हत्या कर दी थी। योगेश के बेटे नितेश ने इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम ने बताया कि मामले की जांच के दौरान पड़ोसी अरविंद और उसके जीजा नवीन कुमार निवासी चंडौस, अलीगढ़ का नाम सामने में आया। नवीन यूपी पुलिस में सिपाही है और कौशांबी जिले की मीडिया सेल में तैनात है।
अरविंद ने पुलिस को बताया कि योगेश को रिटायरमेंट के बाद बड़ी रकम मिली थी, जो वह परिवार के लोगों को नहीं दे रहे थे। दोनों बेटे इससे नाराज थे। दूसरी महिलाओं से संबंध के चलते योगेश की पत्नी भी अक्सर अरविंद के सामने अपना दुखड़ा रोती थीं। आरोपी ने बताया कि वह भी योगेश से रंजिश रखता था, क्योंकि वह कुत्तों को खाना खिलाता था और योगेश उन कुत्तों को मारकर गली से भगा देते थे। कुछ समय पहले योगेश के बेटों ने अपनी परेशानी उसके सामने रखी और पिता को मारने के लिए 5 लाख रुपये देने की बात कही। इसके बाद अपने जीजा नवीन के साथ मिलकर शराब पीने के बाद योगेश की हत्या कर दी। एक गोली अरविंद और एक नवीन ने मारी थी।
नाई की दुकान पर योजना बनाई : अरविंद ने बताया कि 12वीं की पढ़ाई के बाद वर्ष 2008 में उसने पिता रणवीर के साथ औरंगाबाद, बुलंदशहर में चाचा सुखबीर समेत सात लोगों की हत्या कर दी थी। इस मामले में पिता को फांसी की सजा हुई थी, जो कि आजीवन कारावास में तब्दील हो गई। नाबालिग होने के चलते उसे बाल सुधार गृह में भेजा गया था। वहां से आने के बाद उसने शादी की और पत्नी और बच्चों के साथ अशोक विहार कॉलोनी में आकर रहने लगा। पड़ोसी के बेटों को उसका इतिहास पता था। गुड्डू ने हत्या के एक सप्ताह पूर्व मकान की छत पर बैठकर हत्या के बारे में बात की थी और नितेश कुमार ने हत्या से एक दिन पहले कॉलोनी स्थित नाई की दुकान पर योजना बनाई थी।
रिटायरमेंट के बाद मिली राशि नहीं मिलने से नाराज थे
अरविंद ने पुलिस को बताया कि हत्या के लिए सिपाही नवीन ने ही कौशांबी से तमंचा और कारतूस दिलाए थे। एसीपी ने बताया कि कौशांबी पुलिस से संपर्क करने पर पता चला कि आरोपी सिपाही करीब करीब पांच माह से गैरहाजिर चल रहा है। उसके खिलाफ रिपोर्ट तैयार कर कौशांबी भेजी जाएगी। घटनास्थल पर भी उसकी लोकेशन मिली है। अरविंद को पकड़े जाने के बाद से ही तीनों आरोपी फरार चल रहे हैं। नितेश नेहरू प्लेस स्थित आईटी कंपनी में असिस्टेंट रीजनल मैनेजर और गुड्डू गुरुग्राम के बीपीओ में कस्टमर रिव्यू मैनेजर है। दोनों लंबे समय से पिता से व्यापार के लिए रिटायरमेंट के बाद मिले रुपये मांग रहे थे। रकम न मिलने और उनके व्यवहार से परेशान होकर दोनों ने साजिश रची।
इस तरह हुआ वारदात का खुलासा
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी कॉलोनी की एक सुनसान गली में बाइक खड़ी कर कपड़े बदले और दूसरी बाइक से फरार हो गए थे। बाइक कॉलोनी में ही रहने वाले सलमान की थी। सलमान ने बताया कि उसका दोस्त बाइक मांगकर ले गया था। दोस्त से पूछताछ की तो वह अरविंद का किरायेदार निकला। इसके बाद पुलिस ने अरविंद को धर दबोचा।
सिद्धार्थ गौतम, एसीपी लोनी, ''पुलिस ने बुधवार रात आरोपी अरविंद कुमार को अशोक विहार कॉलोनी से गिरफ्तार कर लिया, जबकि योगेश का बड़ा बेटा नितेश, छोटा बेटा गुड्डू और सिपाही नवीन फरार हैं। इनकी गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।''



