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शव सौंपा पर LNJP अस्पताल ने कर दी एक गलती, परिजनों को नहीं मिलेगा मुआवजा!

शव सौंपा पर LNJP अस्पताल ने कर दी एक गलती, परिजनों को नहीं मिलेगा मुआवजा!

संक्षेप:

जुम्मन शास्त्री पार्क स्थित बुलंद मस्जिद के पास सपरिवार रहता था। उसके चाचा मो. इदरीश ने बताया कि विस्फोट में जुम्मन का सिर, हाथ व कमर का हिस्सा नहीं था। सिर व कमर के नीचे का हिस्सा उड़ गया था। सिर्फ शरीर के बीच का सिर्फ आधा हिस्सा ही बचा था।

Nov 13, 2025 08:53 pm ISTUtkarsh Gaharwar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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अब इसे मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (एमएएमसी) व लोकनायक अस्पताल के फॉरेंसिक विभाग के डॉक्टरों की लापरवाही कहें या भूलवश हुई गलती, लेकिन लाला किला के पास हुए विस्फोट में जान गंवाने वाले 35 वर्षीय जुम्मन के मामले में एक बात सामने आई है। उसके शव की पहचान होने पर पोस्टमार्टम कर उसे परिजनों को सौंप दिया गया। परिजनों ने उसे सुपूर्दे खाक(अंतिम संस्कार) भी कर दिया, लेकिन शव की पहचान होने पर डॉक्टर एमएलसी पर उसका नाम चढ़ाना भूल गए। इस वजह से उसके परिजनों को अब मुआवजा मिलना मुश्किल हो जाएगा। लिहाजा, परिजन अब एमएलसी पर अज्ञात की जगह उसका नाम चढ़वाने के लिए अस्पताल और र्माचरी में भटकते दिखे।

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जुम्मन शास्त्री पार्क स्थित बुलंद मस्जिद के पास सपरिवार रहता था। उसके चाचा मो. इदरीश ने बताया कि विस्फोट में जुम्मन का सिर, हाथ व कमर का हिस्सा नहीं था। सिर व कमर के नीचे का हिस्सा उड़ गया था। सिर्फ शरीर के बीच का सिर्फ आधा हिस्सा ही बचा था। इस वजह से उसे पहचान पाना मुश्किल था। लोकनायक अस्पताल में उसकी एमएलसी अज्ञात के रूप में बनी थी। वह लाल किला और चांदनी चौक के आसपास ई-रिक्शा चलता था। प्रतिदिन की भांति उस दिन भी वह ई-रिक्शा चला रहा था। जुम्मन के ई-रिक्शा में जीपीएस लगा था। उसके जीपीएस का अंतिम लोकेशन घटना स्थल के पास का दिखा रहा था। इस वजह से घटना के बाद परिवार के लोग उसका बहुत तलाश कर रहे थे। लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा था।

उसने ब्लू रंग का कपड़ा पहना था। बाद में कपड़े और टैटू से उसके शव की पहचान हुई थी। इसके बाद पोस्टमार्टम हुआ। तत्पश्चात शव के साथ जो एमएलसी की जो कागज मिली उस पर अज्ञात ही दर्ज था। उस पर उसका नाम नहीं लिखा था। परिवार के लोगों ने मुआवजे के लिए जब गुहार लगाना शुरू किया तब यह गलती पकड़ में आई। जुम्मन शादीशुदा था। उसकी दो बेटियां व एक बेटा सहित तीन बच्चे हैं। उनका परवरिश करने वाला अब कोई नहीं है।

अब तक नहीं मिली आर्थिक सहायता परिजनों ने बताया कि जुम्मन ने कर्ज लेकर ई-रिक्शा लिया था। अभी उसकी किश्तें भी बाकी है। उसकी बहन नजमा ने बताया कि जुम्मन की पत्नी दिव्यांग हैं। वह नौकरी करने योग्य नहीं है। घर में पत्नी व तीन बच्चों के अलावा बूढ़ी मां भी है। हाल ही में किश्तों पर मोबाइल खरीदकर अपनी पत्नी को दिया था। यदि मुआवजा नहीं मिला तो ई-रिक्शा व मोबाइल का कर्ज कैसे चुकेगा और उसके बच्चाें की परवरिश कैसे होगी। घटना के चार दिन बाद भी परिवार को कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली है। मो. इदरीश ने बताया कि कागजात मॉर्चरी में सौंप दी है। उसमें सुधार करने का हमें भरोसा दिया गया है।

Utkarsh Gaharwar

लेखक के बारे में

Utkarsh Gaharwar
एमिटी और बेनेट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता के गुर सीखने के बाद अमर उजाला से करियर की शुरुआत हुई। अमर उजाला में बतौर एंकर सेवाएं देने के बाद 3 साल नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर काम किया। वर्तमान में लाइव हिंदुस्तान में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हूं। एंकरिंग और लेखन के अलावा मिमिक्री और थोड़ा बहुत गायन भी कर लेता हूं। और पढ़ें
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