
किस्सा दिल्ली का: कभी देखी है जामुन वाली गली? जितना रोचक नाम उतनी मजेदार कहानी
Kissa Dilli Ka Part 28: 'किस्सा दिल्ली का' सीरीज के पार्ट-28 में आज हम दिल्ली की 'जामुन वाली गली' की रोचक कहानी बता रहे हैं। जितना रोचक इसका नाम है उतना ही खास इसका इतिहास भी है।
दिल्ली की पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में एक नाम है – 'जामुन वाली गली'। सुनने में लगता है जैसे अभी भी कोई विशाल जामुन का पेड़ खड़ा होगा, जिसके नीचे बच्चे लाठियों से फल झाड़ते होंगे। लेकिन सच ये है कि यहां आज एक भी पेड़ नहीं है। न जामुन, न कोई और। बस नाम बचा है और कुछ बूढ़ी आंखों में उसकी चमकती यादें।
बचपन का वो विशालकाय जामुन, जिसे बच्चे लाठी मार-मारकर लूटते थे
60 पार कर चुके मुहम्मद सईद आज भी उसी गली में लिफाफा बनाने की छोटी-सी वर्कशॉप चलाते हैं। शाम ढले जब वो कुर्सी डालकर बाहर बैठते हैं, तो उनका दोस्त और लोकल पत्रकार फसीउल्लाह भी आ जाते हैं। आंखें मूंदकर सईद बताते हैं, 'वो पेड़ इतना बड़ा था कि उसकी छांव में आधी गली ढक जाती थी। जामुन का सीजन आते ही हम बच्चे लाठी लेकर दौड़ते। ऊपर से जामुन बरसते, तो लगता जैसे कोई काली बारिश हो रही हो।'
मस्जिद का आंगन, मीठे पानी का कुआं और वो डरावना फैसला
उसी गली में है जामुन वाली मस्जिद। सईद बताते हैं कि पेड़ मस्जिद के आंगन में था और उसके बगल में एक कुआं। पानी इतना मीठा कि आज भी ज़ुबान पर आ जाता है। बच्चे कुएं में गिर न जाएं इसलिए उसे ढक दिया गया। फिर एक दिन पेड़ कमजोर होने लगा। डर था कि गिर पड़ेगा, किसी को चोट लग जाएगी। इसलिए करीब 50 साल पहले इसे काट दिया गया।

दिल्ली की गलियां जो पेड़ों के नाम पर जिंदा हैं
फसीउल्लाह बताते हैं कि दिल्ली में ये पहली ऐसी गली नहीं है जिसका नाम किसी पेड़ पर है। दिल्ली में पहाड़ी गली भी जहां कभी इमली का पेड़ था। वहीं अमरूद वाली गली भी है जहां गुटली वाले अमरूद का पेड़ था। लेकिन बस अब गली के नाम में ही पेड़ बचे हैं।





