किरण बेदी ने दिया ‘जंतर-मंतर पर आंदोलन बैन’ वाला आइडिया, सिस्टम की एक गलती भी बताई
देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कहा है कि प्रदर्शनकारी छात्रों के सामने सीधे पुलिस को ना लाया जाए, बल्कि पहले सिविल डिफेंस और उसके बाद बिना लाठी के महिला पुलिस को रखा जाए।

देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी चाहती हैं कि जंतर-मंतर पर ‘धरना-प्रदर्शन और आंदोलन वाला स्थान’ नहीं रहने दिया जाए। बेदी का कहना है कि यहां से संसद भवन बेहद नजदीक है और बाजारों पर भी असर होता है। उन्होंने विचार दिया है कि जंतर-मंतर की बजाय धरना प्रदर्शन स्थल रामलीला मैदान को बना दिया जाए। उन्होंने सीजेपी आंदोलन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच टकराव और पैलेट गन चलने की नौबत को सिस्टम की गलती बताया और भविष्य में इससे बचने के लिए कई सुझाव दिए हैं।
तेज तर्रार और ईमानदार पुलिस अफसर के बाद अन्ना आंदोलन में सक्रिय भूमिका और भाजपा में शामिल होकर राजनीति का भी अनुभव ले चुकीं किरण बेदी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलनकारी छात्रों के सामने सीधा सशस्त्र बलों को लाना सिस्टम की एक बड़ी गलती है और यह अंग्रेजों की बनाई व्यवस्था जिसे बदलने की आवश्यकता है।
किरण बेदी ने कहा, ‘समस्या यहां आती है कि छात्र आंदोलन सीधे तौर पर सशस्त्र बलों के साथ टकराव में क्यों आया? ये हमारे सिस्टम की कमी है। हमारे यहां औपनिवेशिक ब्रिटिश व्यवस्था है... ये गलत है। इसका दुरुपयोग हो रहा है... छात्र आंदोलन का पहला लाइन ऑफ डिफेंस है सिविल पुलिस है। हमने सिविल पुलिस का इस्तेमाल क्यों नहीं किया?’
20 जुलाई को 'संसद चलो मार्च' के दौरान आंदोलनकारियों पर पैलेट गन चलाए जाने के आरोपों को लेकर किए गए सवाल पर किरण बेदी ने कहा, ' समस्या यहां आती है कि छात्र आंदोलन सीधे तौर पर सशस्त्र बलों के साथ टकराव में क्यों आया? ये हमारे सिस्टम की कमी है। हमारे यहां औपनिवेशिक ब्रिटिश व्यवस्था है... ये गलत है। इसका दुरुपयोग हो रहा है। छात्र आंदोलन का पहला लाइन ऑफ डिफेंस है सिविल डिफेंस है। हमने सिविल डिफेंस का इस्तेमाल क्यों नहीं किया?
तीसरी पंक्ति में हो पुलिस और परिस्थिति के मुताबिक ले ऐक्शन
किरण बेदी ने सलाह दी कि प्रदर्शनकारी छात्रों के सामने सबसे पहले सिविल डिफेंस को रखना चाहिए जिनके पास लाठी ना। उन्होंने कहा, 'अगर गैर-कानूनी जमावड़ा घोषित हो गई तो पहला एनकाउंटर सिविल डिफेंस से होगा... अगर बैरिकेट्स को तोड़ते हैं तो दूसरी लाइन ऑफ डिफेंस महिला पुलिस कर दीजिए। उनके पास भी लाठियां नहीं हैं, लेकिन (उनकी सुरक्षा के लिए) हेड गियर और आर्मर है... लेकिन अगर भीड़ बेकाबू हो रही है तो आखिर में सशस्त्र बल आने चाहिए।' सशस्त्र बलों परिस्थिति देख कर कार्रवाई करेगी। ये उसकी जिम्मेदारी है... वॉटर कैनन आखिरी स्टेज है। कैमरा आपको सब बताएगा कि कौन व्यक्ति क्या कर रहा है... ऊपर से ड्रोन से निगरानी भी की जानी चाहिए... आखिर में आपको पता होगा कि किसने क्या किया।'
क्यों ‘जंतर-मंतर को शिफ्ट’ करने की सलाह
किरण बेदी ने कहा कि जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन की इजाजत नहीं देनी चाहिए और इसके लिए उन्होंने कई कारण बताए। बेदी ने कहा, 'हम सीधा प्रदर्शनकारियों को संसद भवन के दरवाजे दिखाते हैं। गंतव्य हम संसद भवन दिखाते हैं, क्यों? इसको शिफ्ट करो राम लीला मैदान, इस वैन्य को। जंतर-मंतर छोटी सी (जगह) है। मार्केट के सामने है। मार्केट को भी बंद नहीं करना पड़ेगा। मार्केट का सारा कारोबार ठप हो जाएगा और आपने देखा कि दुकानें जल्दी बंद करनी पड़ी, वहां लूटपाट भी हुई।' बाद में एक सोशल मीडिया पोस्ट में बेदी ने कहा कि उन्होंने इसलिए यह सलाह दी है क्योंक रामलीला मैदान में पर्याप्त स्थान है। यदि शांतपूर्वक प्रदर्शन का भरोसा हो तब भी रामलीला मैदान की ही अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि मुख्य वजह राष्ट्रीय सुरक्षा और संसद भवन के दरवाजों से दूर रखना है। इसके अलावा कनॉट प्लेस को उत्पात से बचाया जा सकता है।


