दिल्ली पुलिस को गृहमंत्री देते हैं 'लाठी-हथियार' चलाने का आदेश? किरण बेदी ने क्या बताया
देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर गृह मंत्रालय से आदेश नहीं आता है। उन्होंने कहा कि यह मौके पर मौजूद अधिकारियों को तय करना होता है कि कब क्या करना है।

जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से पुलिस पर अत्यधिक बलप्रयोग का आरोप लगाया जा रहा है। विपक्षी पार्टियां इसको लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर हमलावर हैं। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सदन में भी उन पर निशाना साधा। इस बीच देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कहा है कि पुलिस को ऐक्शन लेने के लिए किसी के निर्देश की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि स्थिति के मुताबिक मौके पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारी या ड्यूटी पर तैनात अफसर यह फैसला करते हैं।
किरण बेदी ने पीटीआई से बात करते हुए सवाल किया कि गृह मंत्री से निर्देश आने का दावा करने वालों के पास क्या कोई सबूत है? क्या किसी अधिकारी ने उन्हें बताया है कि उन्हें निर्देश मिला था? बेदी ने गृहमंत्री पर लगाए जा रहे आरोपों को गलत बताते हुए अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा, 'इस तरह की कानून व्यवस्था की स्थिति में मौके पर मौजूद अधिकारियों के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति से निर्देश की आवश्यकता नहीं होती। यदि वरिष्ठ अधिकारी वहां नहीं हैं और अधिकारी को लगता है कि ऐसी परिस्थिति बन गई है कि जान-माल को खतरा है तो वह ऐक्शन ले सकता है। उसे वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश का इंतजार करने की जरूरत नहीं।'
ना आता है ऐसा आदेश, ना ही वैध है: बेदी
बेदी ने कहा कि जब आप (पुलिस अफसर) ऐसी परिस्थिति से निपटते हैं तो आदेश का इंतजार नहीं करते हैं, जैसी स्थिति होती है, पूरी जवाबदेही और नियंत्रण के साथ ऐक्शन लिया जाता है। आप जो भी करते हैं आप जवाबदेह होते हैं, आप यह नहीं कह सकते हैं कि मुझे किसी ने कहा था। यह आपकी जवाबदेही होती है। उन्होंने कहा, 'यदि कोई गृहमंत्री पर आरोप लगा रहा है तो यह गलत है, पहली बात तो ऐसे आदेश आते नहीं, और यदि आए भी तो वैध नहीं और तीसरा कि इसकी जरूरत नहीं होती। मेरी जानकारी के मुताबिक, ऐसा कभी कोई आदेश नहीं आता है।'
बेदी ने दिया अपना उदाहरण
बेदी ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में ऐसे सैकड़ों प्रदर्शन देखे हैं। उन्होंने याद करते हुए कहा, 'हम स्थिति के मुताबिक ऐक्शन लेते थे क्योंकि मैं मौके पर हूं, मैं समझ सकती हूं, मैं देख सकती हूं, मैं समझ सकती हूं कि कब क्या करने की जरूरत है। और जब ऐक्शन लिया जाता है तो पूरे नियंत्रण के साथ क्योंकि रक्षा करना होता है, चोट पहुंचाना उद्देश्य नहीं होता।'


