
दिल्ली एम्स में घटेगी किडनी ट्रांसप्लांट की वेटिंग; अब 2 विभाग देंगे नया जीवन, टार्गेट सेट
दिल्ली एम्स में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधाएं बढ़ने वाली है। एम्स के जनरल सर्जरी विभाग के अलावा अब यूरोलॉजी विभाग में भी किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू कर दी गई है।
Delhi AIIMS में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधाएं बढ़ने के साथ वेटिंग कम होने वाली है। दिल्ली एम्स के जनरल सर्जरी विभाग के साथ अब यूरोलॉजी विभाग में भी किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू कर दी गई है। इस विभाग के डॉक्टरों ने एक वर्ष में 21 मरीजों की किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी कर उन्हें नई जिंदगी दी है। खास बात यह कि यूरोलॉजी विभाग ने अगले वर्ष किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी दोगुना से ज्यादा बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
कम होगी वेटिंग
Delhi AIIMS यूरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि एम्स में अब दो विभागों विभागों द्वारा किडनी प्रत्यारोपण का कार्यक्रम संचालित किए जाने से अधिक मरीजों की किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी हो सकेगी। इससे किडनी प्रत्यारोपण के लिए वेटिंग कम होगी।
पहले थी सुविधाओं की कमी
एम्स में 40 वर्ष से अधिक समय से किडनी प्रत्यारोपण होता है। पहले सिर्फ जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टर ही सर्जरी करते थे। मौजूदा समय में एम्स में किडनी प्रत्यारोपण के लिए करीब एक वर्ष तक की वेटिंग है। यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर एम्स में किडनी प्रत्यारोपण नहीं करते थे। इसका एक कारण पहले विभाग में सुविधाओं की कमी होना बताया जा रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर भी बढ़ा
डॉक्टर बताते हैं कि पहले भी यूरोलॉजी विभाग में किडनी प्रत्यारोपण शुरू करने के प्रयास किए गए थे लेकिन सीमित संसाधनों के कारण नियमित तौर पर यह सुविधा शुरू नहीं हो पाई थी। डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि दो-तीन वर्षों में एम्स में ढांचागत सुविधाएं बढ़ी है।
जनरल सर्जरी विभाग नए ब्लॉक में ट्रांसफर
सर्जिकल ब्लॉक बनने से जनरल सर्जरी विभाग नए ब्लॉक में स्थानांतरित हो गया। इस वजह से मुख्य अस्पताल में जनरल सर्जरी विभाग के ऑपरेशन थियेटर और वार्ड खाली हुए। इससे यूरोलॉजी विभाग के ऑपरेशन थियेटर बढ़ गए हैं। साथ ही मुख्य अस्पताल में मौजूद प्रत्यारोपण एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) वार्ड जो पहले जनरल सर्जरी विभाग संचालित करता था उसे यूरोलॉजी विभाग को मिल गया।
टार्गेट भी सेट
अब यूरोलॉजी विभाग में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू हो गई है। अभी विभाग में हर महीने औसतन दो मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगले साल यूरोलॉजी विभाग में 50 से 100 मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण करने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद इसे और बढ़ाकर वर्ष में 150 करने का प्रयास किया जाएगा।
150 मरीजों का होता है प्रत्यारोपण
सर्जरी ब्लॉक में जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टर अभी वर्ष भर में करीब 150 मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण करते हैं। कुछ माह पहले ही सर्जरी ब्लॉक में रोबोटिक किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा भी शुरू की गई है। सर्जरी ब्लॉक में भी किडनी प्रत्यारोपण और बढ़ाने की क्षमता है। ऐसे में जनरल सर्जरी व यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर मिलकर आने वाले समय में वर्ष भर में 300 से ज्यादा किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी कर सकेंगे।
मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
ब्लड प्रेशर, मधुमेह जैसी बीमारियां बढ़ने के साथ किडनी की बीमारी भी बढ़ती जा रही है। लेकिन सरकारी क्षेत्र के कम अस्पतालों में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा होने से बहुत कम मरीजों को प्रत्यारोपण की सुविधा मिल पाती है। दिल्ली में भी सरकारी क्षेत्र के एम्स, सफदरजंग व आरएमएल अस्पताल में ही किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा है। यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस) में भी किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा है लेकिन इसमें प्रत्यारोपण का खर्च थोड़ा ज्यादा है।
दक्ष डॉक्टर भी होंगे अधिक तैयार
एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि दो विभागों द्वारा किडनी प्रत्यारोपण कार्यक्रम संचालित करने से किडनी प्रत्यारोपण के दक्ष डॉक्टर भी अधिक तैयार होंगे, जो एम्स से जाने के बाद दूसरे अस्पतालों में प्रत्यारोपण कर सकेंगे। इससे भी मरीजों को फायदा होगा।





