एक युवा जिंदगी खत्म हुई है, जज स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ का सास को जमानत देने से इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने बहू को दहेज के लिए तंग करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी सास को जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने टिप्पणी की कि यह मामला एक परेशान करने वाली सामाजिक सच्चाई को दर्शाता है। पीठ ने कहा कि एक युवा जिंदगी दुखद परिस्थितियों में खत्म हो गई।

दिल्ली हाई कोर्ट ने बहू को दहेज के लिए तंग करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी सास को जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने टिप्पणी की कि यह मामला एक परेशान करने वाली सामाजिक सच्चाई को दर्शाता है। पीठ ने कहा कि एक युवा जिंदगी दुखद परिस्थितियों में खत्म हो गई।
युवतियां अपनी जान देने पर मजबूर हो जाती हैं
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महिला को जमानत देने से इनकार कर दिया। इस महिला पर अपनी 19 साल की बहू को दहेज के लिए परेशान करने और शादी के आठ महीने के भीतर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि एक युवा जिंदगी दुखद परिस्थितियों में खत्म हो गई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने मंगलवार को जारी अपने फैसले में कहा कि यह मामला एक परेशान करने वाली सामाजिक सच्चाई को दर्शाता है। इसमें कथित तौर पर माता-पिता द्वारा दहेज की मांग पूरी न कर पाने के कारण युवतियां अपनी जान देने पर मजबूर हो जाती हैं।
घटना के समय शादी को हुए सिर्फ 8 महीने ही हुए थे
कोर्ट ने कहा कि यह मामला समाज की एक परेशान करने वाली सच्चाई को दिखाता है, जहां आज भी लगभग 19 साल की एक लड़की को कथित तौर पर आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया। उसके माता-पिता उसके ससुराल वालों द्वारा कथित तौर पर मांगी गई 3 लाख रुपए की एक गैर-कानूनी मांग को पूरा करने में असमर्थ थे। पैसों की मांग सिर्फ इसलिए की गई थी क्योंकि उस लड़की की शादी उनके परिवार में हुई थी। पीठ ने कहा कि इन आरोपों की गंभीरता इस बात से और भी बढ़ जाती है कि घटना के समय शादी को हुए सिर्फ लगभग आठ महीने ही हुए थे। इस वैवाहिक जीवन की छोटी सी अवधि के दौरान मृतका को कथित तौर पर लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
बेहद दुखद परिस्थितियों में एक युवा जान चली गई
पीठ ने कहा कि इस अदालत की राय है कि बेहद दुखद परिस्थितियों में एक युवा जान चली गई है। जांच के दौरान इकट्ठा की गई सामग्री में मृतका और उसके भाई के बीच हुई एक ऑडियो बातचीत भी शामिल है। इसमें उसे रोते हुए और नग्न घुमाने की धमकी दिए जाने की घटना बताते हुए सुना जा सकता है।
इस मामले में एफआईआर तब दर्ज की गई जब पीड़िता के ससुर ने पुलिस को बताया कि उनकी बहू ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। हालांकि, उसके पिता ने आरोप लगाया कि उसके दामाद और ससुराल वालों ने लगातार और दहेज की मांग की और उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। सास ने दहेज मृत्यु तथा दहेज की मांग के संबंध में क्रूरता के आरोपों से जुड़े मामले में जमानत की मांग करते हुए कोर्ट का रुख किया।
शिकायतकर्ता ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पेश की
जांच के दौरान शिकायतकर्ता ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पेश की। इसमें कथित तौर पर लड़की को अपने भाई से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसके पति (सह-आरोपी) ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसे धमकाया।
हाई कोर्ट में अपनी जमानत याचिका में सास ने यह दलील दी कि घटना से लगभग एक घंटा पहले की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग से पता चलता है कि उनकी बहू अपने पति के साथ किसी दूसरी लड़की के साथ इंस्टाग्राम चैट को लेकर हुए झगड़े से परेशान थी, न कि किसी कथित दहेज की मांग की वजह से। सास ने यह भी दावा किया कि वह न तो झगड़े के समय वहां मौजूद थी और न ही कथित आत्महत्या के समय।
याचिका का विरोध करते हुए दिल्ली पुलिस ने आरोपों को गंभीर बताया। तर्क दिया कि वह महिला सास होने के नाते इस मामले में मुख्य आरोपी थी। खासकर इसलिए क्योंकि मृतका का पति नाबालिग था और कथित तौर पर अपने माता-पिता के प्रभाव में आकर काम कर रहा था।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


