जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में तो जा नहीं रहे थे केजरीवाल, अब क्यों राजी; क्या थी वह शर्त
जस्टिस मनोज जैन की अदालत को बताया गया है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से तीन वकीलों को वकालतनामा दिया गया है। इससे साफ हो गया है कि अब उन्होंने बहिष्कार का अपना फैसला बदल लिया है।

जज के खिलाफ ही मोर्चा, अदालत से सोशल मीडिया तक तमाम दलीलें और बहिष्कार तक का ऐलान…; दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आखिरकार अब कथित शराब घोटाले की हाई कोर्ट में हो रही सुनवाई में शामिल होने को राजी हो गए हैं। जस्टिस मनोज जैन की अदालत को बताया गया है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की ओर से तीन वकीलों को वकालतनामा दिया गया है। इससे साफ हो गया है कि 'आप' नेताओं ने 'बहिष्कार' वाले अपने रुख में बदलाव कर लिया है। इसकी प्रबल संभावना भी थी, क्योंकि केजरीवाल ने जो शर्त रखी थी वह जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने पूरी कर दी थी, भले ही उनके खिलाफ ऐक्शन लेने के बाद।
अदालत ने सोमवार को कहा, 'यदि उन्होंने वकालतनामा दाखिल किया है, तो अगली सुनवाई में हम देख सकते हैं कि कौन सी तारीख दी जा सकती है और एक कार्यक्रम तैयार किया जा सकता है... ऐसा लगता है कि कोई वकालतनामा दाखिल किया गया है।' अदालत ने आगे की सुनवाई स्थगित कर दी ताकि वकीलों की उपस्थिति सुनिश्चित हो सके, क्योंकि सोमवार को वकील हड़ताल पर थे। 'वकालतनामा' वह दस्तावेज है जो किसी वकील की ओर से अदालत में किसी पक्ष का प्रतिनिधित्व करने के लिए पेश किया जाता है।
केजरीवाल की क्या थी शर्त
दरअसल अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक के रुख में बदलाव इसलिए आया है, क्योंकि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस केस को दूसरी बेंच में ट्रांसफर कर दिया और इसके साथ ही 'आप' नेताओं की वह मांग पूरी हो गई जिसकी वजह से उन्होंने खुद को अदालत की कार्यवाही से दूर कर लिया था। केजरीवाल ने ऐलान किया था कि वह जस्टिस शर्मा की अदालत में चल रही शराब घोटाले की सुनवाई में हिस्सा नहीं लेंगे। वह ना तो खुद पेश होंगे और ना ही किसी वकील को भेजेंगे। बाद में सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी इसी को दोहराया।
अरविंद केजरीवाल ने शर्त रखी थी कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की किसी भी उस कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे जिसमें दूसरा पक्ष केंद्र की भाजपा सरकार और सीबीआई है। केजरीवाल ने कहा था कि यदि जस्टिस स्वर्ण कांता की अदालत में किसी और पक्ष के साथ उनका कोई मामला जाता है तो वह पेश होंगे। अब चूंकि मामला ही दूसरी बेंच के पास चला गया तो केजरीवाल और अन्य ने कानूनी प्रक्रिया का सामना करने का फैसला किया है।
क्यों किया था केजरीवाल ने बहिष्कार
दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर कई तरह के संदेह जाहिर करते हुए कहा था कि उन्हें उनकी अदालत में न्याय नहीं मिल पाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री ने जस्टिस शर्मा पर हितों के टकराव और आरएसएस से जुड़े संगठन के कार्यक्रम में जाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्हें न्याय मिलने का भरोसा नहीं है। आप प्रमुख ने कहा था कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं और उन्हें सीबीआई का पक्ष रख रहे तुषार मेहता ही केस आवंटित करते हैं, ऐसे में जस्टिस शर्मा सीबीआई के खिलाफ कोई फैसला नहीं दे सकती हैं।
जस्टिस शर्मा ने क्यों छोड़ा केस
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की रिक्यूजल याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, बाद में उन्होंने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत छह नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की और नियमों का हवाला देते हुए केस को दूसरी बेंच के सामने ट्रांसफर कर दिया।
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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
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