जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल के खिलाफ जो केस शुरू किया, उसमें कितनी होती है सजा?

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के छह नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था। ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर किसी को छह महीने तक जेल की सजा हो सकती है।

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अदालत की अवमानना की एक और कार्यवाही शुरू हो चुकी है। दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के आदेश पर अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और आप नेता दुर्गेश पाठक, विनय मिश्रा के खिलाफ आपराधिक अवमानना के मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 'आप' नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रवींद्र डुडेजा की बेंच ने 'आप' नेताओं को नोटिस जारी किया। अदालत ने केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। पीठ ने कहा, 'नोटिस जारी किया जाए। कथित अवमानना ​​करने वाले नोटिस प्राप्त होने की तारीख से चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करेंगे।' पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की।

क्या होती है आपराधिक अवमानना?

अदालत की अवमानना को सरल शब्दों में समझें तो इसका अर्थ है अदालत की अवहेलना या अदालत की गरिमा ठेंस पहुंचाना या फिर न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करना। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रुद्र विक्रम सिंह बताते हैं कि अदालत की अवमानना या कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट दो प्रकार के होते हैं, सिविल और क्रिमिनल कंटेंम्प्ट। कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट ऐक्ट 1971 में इसे परिभाषित किया गया है और साथ ही इसमें सजा का प्रावधान भी है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को अनुच्छेद 215 और सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 129 के तहत अवमानना की कार्यवाही करने और सजा देने का अधिकार बताया गया है।

आपराधिक अवमानना का दोषी होने पर कितनी सजा

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील रुद्र विक्रम सिंह सिवल और क्रिमिनल मामले में अंतर समझाते हुए बताते हैं कि अदालल का आदेश ना मानने या विलंब करने पर सिविल मामला बनता है जबकि कोर्ट को नीचा दिखाने, कोर्ट की कार्यवाही में दखलअंदाजी या न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने पर क्रिमिनल कंटेम्प्ट का केस बनता है। उन्होंने कहा कि क्रिमिनल कंटेम्प्ट में दोषी पाए जाने पर किसी व्यक्ति को छह महीने तक की जेल की सजा और जुर्माने का प्रवाधान है। हालांकि, अदालत कई बार माफी मांगने पर अभियुक्त को माफ भी कर देता है। लेकिन यह अदालत पर निर्भर है कि वह माफी मांगे जाने से संतुष्ट है अथवा नहीं।

केजरीवाल पर क्यों हुआ केस

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल, सिसोदिया और आप के अन्य नेताओं के खिलाफ 14 मई को आपराधिक अवमानना ​​कार्यवाही शुरू की थी। जस्टिस शर्मा ने कहा था कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने उनके फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बजाय उन्हें बदनाम करने की नीयत से सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाया। केजरीवाल चाहते थे कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा शराब घोटाले की सुनवाई से खुद को अलग कर लें। अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आप के कई नेताओं ने जस्टिस शर्मा पर कई आरोप लगाए थे। उनके कुछ वीडियो भी एडिट करके सोशल मीडिया पर शेयर किए गए थे।

Sudhir Jha

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सुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)


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