जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव को सजा तो 21 महीने की दी पर जेल में कम रहना होगा
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने अभिनेता राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए सात मामलों में तीन-तीन महीने जेल की सजा सुनाई पर कोर्ट ने कहा कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए राजपाल यादव को तीन महीने ही जेल में रहना होगा।

बॉलीवुड की फिल्मों में अपने हास्य-विनोद से दर्शकों को लोटपोट करने वाले राजपाल यादव चेक बाउंस मामले में बुरी तरह घिर गए हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराए जाने के फैसले को शुक्रवार को बरकरार रखा। जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा की बेंच ने राजपाल यादव को सभी सात मामलों में तीन-तीन महीने की सजा दी, जुर्माना लगाया और फटकारा भी। हालांकि, जस्टिस शर्मा ने रहम दिखाते हुए कहा कि सभी मामलों में सजा एक साथ चलेगी, जिससे राजपाल यादव को 21 बजाय 3 महीने ही जेल में रहना होगा। इसके अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए समय देते हुए राजपाल यादव को अदालत से ही जेल भेजने की बजाय 2 महीने का समय दिया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिकाएं दायर करने में 1,894 दिन या पांच वर्ष से अधिक की असाधारण देरी को माफ करने से इनकार कर दिया। साथ ही उन्होंने यादव को सातों शिकायतों में शिकायतकर्ता को एक-एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का निर्देश दिया है। बेंच ने साफ किया कि अभिनेता की ओर से पहले ही अदा की जा चुकी लगभग दो करोड़ रुपये की राशि का समायोजन किया जाएगा।
अभिनेता का बयान ही बना सजा का आधार
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने फैसले में कहा कि राजपाल यादव को कई मौके दिए गए, लेकिन वह अपने वादों को पूरा करने में विफल रहे। जस्टिस शर्मा ने कहा, 'इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि इन याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के दिन राजपाल यादव ने इस अदालत के सामने कहा कि वह शिकायतकर्ता को कोई राशि देने के लिए तैयार नहीं है। पैसे लौटाने के बजाय पांच बार जेल जाना पसंद करेगा।'
जेल के साथ जुर्माना भी
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता राजपाल नौरंग यादव को सातों शिकायत में से प्रत्येक में तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है। प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाता है। बता दें शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2013 में यादव ने वर्ष 2010 में एक फिल्म के लिए उन्हें दी गई पांच करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता के निपटान के लिए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक दिए थे, जो बाउंस हो गए।
अदालत ने फटकारते हुए कहा- कानून स्क्रिप्ट नहीं कि बदल दिया जाए
अदालत ने कहा कि यदि कोई याचिकाकर्ता कोर्ट में दिए गए वचनों को पूरा करने की बजाय यदि जेल जाने का रास्ता चुनता है तो यह उसकी मर्जी है। अदालत ने राजपाल यादव को फटकार लगाते हुए कहा, 'कानून कोई स्क्रिप्ट नहीं जो किसी ऐक्टर की मर्जी के मुताबिक दोबारा लिख दिया जाए और न ही रणनीति में हर बदलाव के साथ कानूनी स्थिति बदली जा सकती है चाहे वादी कोई भी हो। अदालतें स्थापित कानूनी सिद्धांतों और अपने सामने मौजूद रिकॉर्ड के आधार पर फैसला करती हैं और सभी पर समान रूप से कानून लागू करती हैं। हर पक्षकार से निष्पक्षता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान की उम्मीद करती हैं। मौजूदा पक्षकार भी इस नियम का अपवाद नहीं हो सकता।'
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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
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