शराब घोटाला केस में क्या-क्या हुआ? केजरीवाल के बरी होने से जस्टिस कांता के हटने तक की कहानी
दिल्ली शराब घोटाला केस में आप नेताओं को ट्रायल कोर्ट से राहत मिलने के बाद विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया था। यहां जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर सवाल उठे, रिक्यूजल की मांग, केजरीवाल ने सत्याग्रह और केस का बहिष्कार। अब कंटेम्प्ट कार्रवाई के बीच शर्मा ने केस दूसरी बेंच को ट्रांसफर कर दिया है। पढ़िए पूरी कहानी।

दिल्ली के चर्चित शराब नीति केस में पिछले ढाई महीनों के दौरान ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, जिसने इसे सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं रहने दिया। ट्रायल कोर्ट से आम आदमी पार्टी के नेताओं को राहत मिलने के बाद शुरू हुई लड़ाई धीरे-धीरे हाईकोर्ट पहुंची। फिर जज पर सवाल उठे, सुनवाई से हटने की मांग हुई, कोर्ट का बहिष्कार किया गया, सत्याग्रह की बात हुई और आखिर में मामला अदालत की अवमानना तक पहुंच गया। अब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस केस को दूसरी बेंच के पास भेज दिया है और वह केस से हट गई हैं। आइए जानते हैं अपील, बहस, इंकार और ट्रांसफर तक की कहानी।
- ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल समेत 23 अन्य को मिली बड़ी राहत
27 फरवरी 2026 को दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, के. कविता समेत 23 आरोपियों को आबकारी नीति मामले में बरी कर दिया। कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे आरोप तय किए जा सकें।
अदालत ने यहां तक कहा कि एजेंसी का मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया। इस फैसले को आम आदमी पार्टी ने अपनी बड़ी जीत बताया। वहीं, सीबीआई ने साफ कर दिया कि वह फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी।
- CBI की अपील और हाईकोर्ट की एंट्री
सीबीआई दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची और मामला जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच में लगा। हाईकोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में कहा कि ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियां और निष्कर्ष पहली नजर में त्रुटिपूर्ण लगते हैं और उन पर विचार करने की जरूरत है। यहीं से मामला नया मोड़ लेने लगा। आम आदमी पार्टी के नेताओं को लगा कि सुनवाई का रुख उनके खिलाफ जा सकता है। इसलिए आप नेताओं ने जस्टिस कांता से केस से हटने की अपील की।
- जस्टिस कांता से केस से हटने की मांग, उठे सवाल
इसके बाद अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को मामले से अलग करने की मांग उठाई। उन्होंने दावा किया कि जज के बच्चों को केंद्र सरकार के विभिन्न कानूनी पैनलों में काम मिला हुआ है और सीबीआई की तरफ से पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का उससे संबंध है।
इसलिए “हितों के टकराव” की आशंका है। AAP नेताओं ने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा पहले भी इस केस से जुड़े मामलों में उनके खिलाफ आदेश दे चुकी हैं। इसलिए निष्पक्ष सुनवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- कोर्टरूम में खुद उतरे केजरीवाल
मामला उलझने लगा। 6 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल खुद हाईकोर्ट पहुंचे और अपनी बात रखी। करीब एक घंटे तक चली बहस के दौरान उन्होंने जस्टिस शर्मा से सुनवाई से अलग होने का अनुरोध किया। इसी दौरान जस्टिस शर्मा ने हल्के अंदाज में कहा कि “आप अच्छी दलीलें देते हैं, वकील बन सकते हैं।” यह सुनवाई काफी चर्चा में रही, क्योंकि किसी बड़े राजनीतिक नेता का खुद अदालत में खड़े होकर बहस करना कम ही देखने को मिलता है।
- जस्टिस शर्मा ने रिक्यूजल से किया इनकार
20 अप्रैल को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को मामले से अलग करने की मांग खारिज कर दी। उन्होंने साफ कहा कि केवल आशंकाओं या आरोपों के आधार पर कोई जज सुनवाई नहीं छोड़ सकता। उन्होंने यह भी कहा कि किसी जज पर व्यक्तिगत हमला, न्यायपालिका पर हमला माना जाएगा। जस्टिस शर्मा ने कहा कि अगर बिना सबूत के लगाए गए आरोपों के कारण जज मामले छोड़ने लगें, तो यह गलत परंपरा बन जाएगी।
- फिर शुरू हुआ सत्याग्रह और केस के बहिष्कार का दौर
रिक्यूजल याचिका खारिज होने के बाद विवाद और बढ़ गया। अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अब इस अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि “न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।”
इसके बाद केजरीवाल ने फैसला किया कि वह न तो खुद अदालत में पेश होंगे और न ही अपने वकील को भेजेंगे। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के “सत्याग्रह” से जोड़ा। बाद में मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी इसी रास्ते पर चलने की बात कही। इसके बाद केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य नेता राजघाट भी पहुंचे और गांधीजी को श्रद्धांजलि देकर सत्याग्रह के संकल्प की बात की।
- CBI ने लगाया ऑनलाइन कैंपेन का आरोप
मामले ने नया मोड़ तब लिया, जब सीबीआई ने अदालत में कहा कि जस्टिस शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि जज की छवि खराब करने के लिए चुनिंदा जानकारी और पोस्ट सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं। सीबीआई ने कहा कि इस तरह का दबाव न्यायपालिका के लिए खतरनाक है और ऐसी कोशिशों को रोकना जरूरी है।
- जस्टिस शर्मा ने शुरू की कंटेम्प्ट कार्रवाई
आज 14 मई को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने बड़ा कदम उठाया। उन्होंने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक समेत अन्य नेताओं के खिलाफ अदालत की अवमानना यानी क्रिमिनल कंटेम्प्ट की कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया।
जस्टिस शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर “vilifying” और “defamatory” सामग्री पोस्ट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी छवि खराब करने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया गया। जस्टिस शर्मा ने यह भी कहा कि केजरीवाल ने कानूनी रास्ता अपनाने के बजाय उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
- जस्टिस शर्मा ने छोड़ा केस, दूसरी बेंच को ट्रांसफर
इसी सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने साफ किया कि वह तकनीकी रूप से खुद को मामले से अलग नहीं कर रहीं, लेकिन चूंकि उन्होंने कंटेम्प्ट की कार्रवाई शुरू कर दी है, इसलिए आबकारी नीति केस अब दूसरी बेंच के पास भेजा जाएगा।
यानी जिस विवाद की शुरुआत ट्रायल कोर्ट के फैसले से हुई थी, वह अब अदालत बनाम राजनीतिक आरोपों की लड़ाई में बदल चुका है। आने वाले दिनों में यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
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रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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