कनाडा में गाजियाबाद के युवक के हत्यारे को उम्रकैद की सजा, 4 साल पहले हुआ था कार्तिक का मर्डर

Subodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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गाजियाबाद के युवक कार्तिक वासुदेव के हत्यारे को कनाडा की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद कार्तिक के माता-पिता को चार वर्ष की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिले इंसाफ से उन्हें कुछ सुकून मिला है। राजेंद्र नगर निवासी कार्तिक वासुदेव वर्ष 2022 में पढ़ाई के लिए कनाडा के टोरंटो गए थे।

कनाडा में गाजियाबाद के युवक के हत्यारे को उम्रकैद की सजा, 4 साल पहले हुआ था कार्तिक का मर्डर

गाजियाबाद के युवक कार्तिक वासुदेव के हत्यारे को कनाडा की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद कार्तिक के माता-पिता ने मंगलवार को हिन्दुस्तान से फोन पर विशेष बातचीत में कहा कि चार वर्ष की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिले इंसाफ से उन्हें कुछ सुकून मिला है। राजेंद्र नगर निवासी कार्तिक वासुदेव वर्ष 2022 में प्रबंधन की पढ़ाई के लिए कनाडा के टोरंटो गए थे।

राजेंद्र नगर निवासी कार्तिक वासुदेव वर्ष 2022 में प्रबंधन की पढ़ाई के लिए कनाडा के टोरंटो गए थे। वहां सेनेका कॉलेज में पढ़ाई शुरू किए करीब तीन माह ही हुए थे कि सात अप्रैल 2022 को कार्तिक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया। कार्तिक के पिता जितेश वासुदेव गुरुग्राम की एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जबकि मां पूजा वासुदेव गृहिणी हैं।

कार्तिक का छोटा भाई पार्थ दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री अरबिंदो कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा। पिता ने बताया कि बेटे की हत्या के बाद से ही वह लगातार न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे। उन्हें कई बार कनाडा जाना पड़ा। सुनवाई के समय बेटे के हत्यारे को बार-बार देखना बेहद तकलीफ देता था।

मानसिक बीमारी की दलील अदालत ने नहीं मानी

पिता जितेश वासुदेव ने बताया कि हत्यारे रिचर्ड एडविन ने अपनी मानसिक बीमारी की दलील दी, मगर कनाडा सरकार की ओर से उनके बेटे के लिए पैरवी कर रही वकील एनाटेन हाउस ने तथ्यों के साथ उसकी दलील को खारिज किया। रिचर्ड एडविन ने उनके बेटे की हत्या के दो दिन बाद एक और हत्या को अंजाम दिया था। कनाडा की शीर्ष अदालत ने माना कि घटना के समय एडविन ‘सिजोफ्रेनिया’ से पीड़ित था, लेकिन उसकी दलीलें खारिज कर दी और उनके परिवार को न्याय मिला।

सजा के बावजूद हत्या की वजह स्पष्ट नहीं

दोषी को सजा हो जाने के बाद भी कार्तिक की हत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी। पिता ने बताया कि शुरुआत में कनाडा की मीडिया ने लूटपाट के लिए हत्या की आशंका जताई थी, मगर ऐसा कोई प्रयास कार्तिक के साथ नहीं हुआ। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान इस बिंदु पर कोई चर्चा नहीं की गई। पिता के अनुसार, कार्तिक को पढ़ाने के लिए उन्होंने 20 लाख रुपये का ऋण लिया था। हत्या के बावजूद इसे माफ नहीं किया गया और पूरा भुगतान करना पड़ा।

सुनवाई के दौरान कई कठिनाइयां आईं

कार्तिक की मां पूजा वासुदेव ने कहा कि बेटे को खोने का दर्द कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन हत्यारे को सजा मिलने से उन्हें संतोष है। इस पूरे समय में परिवार को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। हत्यारा ताउम्र जेल में रहेगा और उसे 25 वर्ष तक पैरोल भी नहीं मिलेगी। वहीं, पिता ने बताया कि अंतिम सुनवाई 20 अप्रैल को हुई। वह इसके लिए पत्नी के साथ कनाडा पहले ही पहुंच गए थे।

Subodh Kumar Mishra

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Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

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