20 रुपये की गड़बड़ी में 34 साल बाद इंसाफ, DTC के बर्खास्त कंडक्टर को दिल्ली हाईकोर्ट ने किया बहाल

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 रुपये की गड़बड़ी करने वाले DTC के एक बर्खास्त बस कंडक्टर को 34 साल बाद राहत देते हुए ड्यूटी पर बहाल करने के आदेश दिए हैं। इस बस कंडक्टर पर सवारियों से पैसे लेकर उन्हें टिकट नहीं देने का आरोप था।

20 रुपये की गड़बड़ी में 34 साल बाद इंसाफ, DTC के बर्खास्त कंडक्टर को दिल्ली हाईकोर्ट ने किया बहाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने 34 साल पुराने एक केस में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। दरअसल, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के एक बर्खास्त बस कंडक्टर को महज 20 रुपये की गड़बड़ी करना बड़ा महंगा पड़ गया। अपनी इस गलती के लिए आरोपी कंडक्टर को 34 साल तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़े। आखिरकार दिल्ली हाई कोर्ट ने अब इस बस कंडक्टर को राहत देते हुए उसकी बहाली के आदेश दिए हैं। इस बस कंडक्टर पर सवारियों से पैसे लेकर उन्हें टिकट नहीं देने का आरोप था।

चीफ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय एवं जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने डीटीसी को कहा है कि इस बस कंडक्टर को नौकरी पर बहाल किया जाए। इसके साथ ही बेंच ने यह भी कहा कि बस कंडक्टर की गलती को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए कंडक्टर को उसके पिछले वेतन का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।

बेंच ने माना कि बेशक बस कंडक्टर को पुन: बहाली का आदेश दिया जा रहा है। इसकी वजह डीटीसी की जांच टीम की कुछ खामियां रही हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि 20 रुपये की गड़बड़ी हुई थी। इसकी जिम्मेदारी बस कंडक्टर की बनती है। इसलिए उसे राहत के साथ ही इसका खामियाजा भी भुगतान पड़ेगा।

यात्रियों को गवाह नहीं बनाया गया

इस मामले में डीटीसी की जांच टीम की खामी रही कि उसने उन यात्रियों को गवाह नहीं बनाया, जिन्होंने दो-दो रुपये बस कंडक्टर को दिए थे। इतना ही नहीं इस टीम द्वारा 20 रुपये की वह रकम भी बस कंडक्टर से बरामद भी नहीं की गई। हाईकोर्ट द्वारा आरोपी कंडक्टर को संदेह का लाभ देने का यही आधार बना।

लाभों से वंचित किया

इस मामले में पहले कड़कड़डूमा कोर्ट की श्रम अदालत और फिर दिल्ली हाई कोर्ट ने माना कि बस कंडक्टर की गलतियां रही हैं। इसलिए वह बकाये वेतन औन वरिष्ठता आदि लाभ पाने का हकदार नहीं है।

दस यात्रियों से दो-दो रुपये लिए थे

आरोपी बस कंडक्टर 24 अप्रैल 1992 को बादशाहपुर रूट पर ड्यूटी पर था। डीटीसी की निरीक्षण टीम ने रास्ते में जब बस को रोककर जब सवारियों की टिकट जांच की तो पाया कि कंडक्टर द्वारा बस में सवार 5 यात्रियों से टिकट के लिए 2-2 रुपये तो लिए गए थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। इसी तरह जांच टीम ने निरीक्षण के दौरान भोंडसी में फिर पाया कि 5 यात्रियों से 2-2 रुपये लिए गए, लेकिन उन्हें भी टिकट नहीं दिया गया। निरीक्षण टीम ने इसकी जानकारी विभाग को दी। इसके बाद डीटीसी ने कंडक्टर को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था।

रिपोर्ट - हेमलता कौशिक

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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