जंतर-मंतर पर कैसे इतने लोगों को खाना खिलाया, जुनैद ने दिया जवाब; गायब होने की क्या कहानी
जुनैद ने कहा कि उन्होंने अकेले इतने लोगों को खाना नहीं खिलाया, बल्कि जंतर-मंतर पर आने वाले लोग इसमें सहयोग कर रहे थे। जुनैद ने दावा किया कि 24 की रात दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और काफी पूछताछ की।

जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन में खाना-पानी बांटकर सुर्खियों में आए जुनैद ने बताया है कि क्यों धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मनाए गए जश्न में नहीं दिखे। जुनैद का दावा है कि दिल्ली पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था और उसे उत्तराखंड के मसूरी ले जाकर छोड़ दिया गया। जुनैद ने यह भी बताया कि सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके और दूसरे नेताओं से उसकी बात नहीं हो पाई है, लेकिन लीगल काम देखने वालीं रत्ना ने उन्हें फोन करके मदद का भरोसा दिया है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर हुए जश्न में जुनैद के नहीं दिखने को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी गुमशुदगी को लेकर बहुत चर्चा हो रही थी। इस बीच जुनैद ने एक यूट्यूब चैनल से बातचीत करते हुए पूरा किस्सा बताया है। जुनैद ने बताया कि 24 जुलाई की रात उन्हें एक कुत्ते ने काट लिया था और अस्पताल से लौटते हुए रास्ते में पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। जुनैद ने इसके बाद करीब 17-18 घंटे पुलिस हिरासत में रखे जाने का दावा किया।
जुनैद ने कहा, 'उस दिन मुझे कुत्ते ने काट लिया था। रात करीब 11 बजे मैं रेबीज का टीका लगवाने के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल गया था। आधी रात के बाद जब मैं अपने साथी के साथ अस्पताल से बाहर निकला तो हमने एक ऑटो बुक की। 50-60 मीटर ही आगे बढ़े थे कि एक सफेद स्कॉर्पियो सामने आ कर रुक गई। उसमें से कुछ लोग हमारे पास आए और हमें पकड़ लिया। हम घबराए तो उन्होंने कहा कि घबराओं नहीं, हम दिल्ली पुलिस से हैं। उन्होंने अपना कार्ड दिखाया। लेकिन उन्होंने अपना चेहरा कवर किया था। उन्होंने हमें गाड़ी में बिठा लिया। हमारी आंखों पर भी बट्टी बांध दी और फिर हमें किसी अज्ञात जगह पर ले गए। वह हमें किसी इमारत में दूसरी मंजिल पर ले गए, जहां पूरी रात रखा।'
जुनैद ने कहा कि अगले दिन जब अधिकारी आए तो उनसे पूछताछ की गई। लेकिन सवाल जवाब के बाद अधिकारी ने उन्हें छोड़ देने कहा। जुनैद ने कहा, 'हमें जब वहां से निकाला गया तब भी आंखों पर पट्टी थी। हमें गाड़ी में डाला और यह 4-6 घंटे तक चलती रही। जब हमने पट्टी उतारा तो पहाड़ ही दिखे। हमें पता चला कि हम मसूरी उत्तराखंड में हैं।' जुनैद ने यह भी कहा कि इस दौरान उनके साथ अच्छ व्यवहार किया गया, कोई मारपीट नहीं की गई और पुलिसकर्मियों ने जो खुद खाया, वही खाना उन्हें भी खिलाया। जुनैद ने पिता और ससुराल के कई लोगों को उठाए जाने और उनसे पूछताछ की बात भी कही।
क्या करता है जुनैद और कैसे इतने लोगों को खाना खिलाया?
जुनैद ने बताया कि वह पेशे से वकील हैं और सरकारी नौकरी की तलाश में हैं। उन्होंने कहा कि 6 तारीख को अभिजीत दीपके की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में भी वह शामिल हुए थे और 20 जून को जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की शुरुआत हुई तो उस दिन वह सरकारी नौकरी के लिए एक परीक्षा देने गए थे। शाम को परीक्षा के बाद वह जंतर-मंतर गए। जुनैद ने कहा, 'मैंने शाम को देखा कि लोग इतने अच्छे उद्देश्य के लिए जुड़े हुए हैं और पानी के लिए भी छटपटा रहे हैं। इतनी गर्मी थी उस दिन। मैंने संकल्प लिया कि उनके लिए कुछ होना चाहिए। मैंने खुद अपने प्रयास और फिर कुछ लोगों को साथ जोड़कर पानी की व्यवस्था की। धीर-धीरे खाना-पानी जुटाने लगा।'
जुनैद ने किसी तरह की फंडिंग मिलने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने किसी से ना तो कैश लिया और ना ही ऑनलाइन कोई पेमेंट। जुनैद ने कहा, 'मैंने किसी से कोई पैसा नहीं लिया। मैंने कहा कि किसी को योगदान करना है तो पानी, बिस्किट, दवा कुछ भी दे दीजिए। सब लोग मिलजुलकर सहयोग और खाने पीने की व्यवस्था कर रहे थे। कोई अकेला आदमी नहीं कर सकता। जो लोग वहां आते थे वह सामान लाते थे। कोई पानी, कोई बिस्किट, कोई 20 आदमी का खाना ले आता था। कोई घर से कुछ बनाकर ले आया। सब मिलजुलकर चल रहा था।'
क्या सीजेपी के नेता संपर्क में हैं?
जुनैद ने इस सवाल के जवाब मं कहा कि उनकी अभिजीत दीपके या अन्य लोगों से बात नहीं हो पाई है, लेकिन लीगल मामलों को देख रहीं रत्ना ने फोन पर बातचीत करके सहयोग का भरोसा दिया है। जुनैद ने कहा, 'अभी तक तो किसी का फोन नहीं आया। हो सकता है कि व्यस्त हों, आराम कर रहे हों। अभिजीत भाई तो बीमार हैं, तस्वीर भी आई थी। लीगल टीम से रत्ना जी का फोन आया था कि मदद की जाएगी। हो सकता है कि बिजी हो, कोई कारण रहा हो। समय मिलेगा तो अवश्य बात करेंगे। '


