
900 करोड़ रुपए के रिफंड की मांग को लेकर दिल्ली HC पहुंची इंडिगो, जज ने खुद को कर लिया सुनवाई से अलग
कस्टम्स ट्रिब्यूनल ने पहले अपने फैसले में कहा था कि ऐसे री-इम्पोर्ट पर दोबारा कस्टम्स ड्यूटी लगाना गैर-कानूनी है, लेकिन इसके बावजूद कस्टम्स अथॉरिटी ने इंडिगो को क्लियरेंस के लिए 900 करोड़ रुपए से ज्यादा की ड्यूटी देने के लिए मजबूर किया।
देश में जारी इंडिगो संकट के बीच विमान कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका लगाई, जिसमें उसने विदेश से ठीक होकर भारत में दोबारा आयात किए गए एयरक्राफ्ट इंजन और पार्ट्स पर चुकाई गई 900 करोड़ रुपए से ज्यादा की कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) को रिफंड करने की मांग की। हालांकि याचिका पर सुनवाई शुरू होने से पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट की जज शैल जैन ने शुक्रवार को खुद को इस मामले से अलग कर लिया।
यह मामला जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और शैल जैन की बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्टेड था, लेकिन जस्टिस जैन ने सुनवाई से पहले ही खुद को इससे अलग कर लिया क्योंकि उनका बेटा इंडिगो में पायलट के रूप में काम करता है। जिसके बाद इस बारे में जारी अपने ऑर्डर में कोर्ट ने कहा, 'चीफ जस्टिस के ऑर्डर के तहत, इसे एक ऐसी बेंच के सामने लिस्ट किया जाए जिसमें हममें से एक (जस्टिस शैल जैन) सदस्य न हो।' यह मामला संभवतः अब 19 दिसंबर को दूसरी बेंच के सामने जाएगा।
इंडिगो के वकील वी.लक्ष्मीकुमारन ने कहा कि एयरलाइन ने बिना किसी विवाद के उस वक्त बेसिक कस्टम ड्यूटी का पेमेंट किया था, जब उसके एयरक्राफ्ट इंजन और पार्ट्स रिपेयर के बाद दोबारा इंपोर्ट किए गए थे। इसके अलावा, क्योंकि रिपेयर एक्टिविटी एक सर्विस के तौर पर थी, इसलिए उसने रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत GST भी डिस्चार्ज कर दिया।
हालांकि, कस्टम अधिकारियों ने उसी ट्रांजैक्शन को सामान के इंपोर्ट के तौर पर माना और एक बार फिर उस पर कस्टम ड्यूटी लगाने की कोशिश की। वकील ने आगे कहा कि कस्टम्स ट्रिब्यूनल ने पहले अपने फैसले में कहा था कि ऐसे री-इम्पोर्ट पर दोबारा कस्टम्स ड्यूटी लगाना गैर-कानूनी है, लेकिन कस्टम्स अथॉरिटी ने कथित तौर पर इंडिगो को एयरक्राफ्ट इंजन और दूसरे जरूरी पार्ट्स की क्लियरेंस के लिए 900 करोड़ रुपए से ज्यादा की ड्यूटी देने के लिए मजबूर किया।
उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद जब उनके क्लाइंट ने रिफंड क्लेम फाइल किया, तो कस्टम्स अथॉरिटी ने इस आधार पर मना कर दिया कि एयरलाइन को पहले हर बिल ऑफ एंट्री का पुनर्निर्धारण करवाना होगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्होंने प्रिंसिपल कमिश्नर समेत कई लोगों के सामने बार-बार रिप्रेजेंटेशन दिया, लेकिन कोई रीअसेसमेंट ऑर्डर पास नहीं किया गया।
हाई कोर्ट के सामने यह याचिका एक ऐसे समय आई है जब एयरलाइन अपने ऑपरेशन में बड़ी रुकावट का सामना कर रही है। जिसके चलते 3 दिसंबर से लेकर अबतक कंपनी की हजारों फ्लाइट कैंसिल हो गई हैं और एयरपोर्ट्स पर कंपनी के ग्राहकों में अफरा-तफरी मची हुई है।
इंडिगो में जारी संकट को देखते हुए सरकार ने नए पायलट आराम नॉर्म्स को कुछ समय के लिए रोक दिया है, साथ ही टिकटों की कीमत में बेतहाशा वृद्धि को रोकने के लिए हवाई किराए पर कैप भी लगा दी है और एयरलाइन की वजह से दिक्कत में फंसे यात्रियों की सुविधा के लिए कई ट्रेनें भी चलाई हैं।
मंगलवार को, सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने देखा कि इंडिगो अपने सर्दियों और गर्मियों के शेड्यूल को अच्छे से ऑपरेट नहीं कर पा रही थी और इसलिए एयरलाइन को सभी सेक्टर में अपने ऑपरेशन में 10% की कटौती करने का निर्देश दिया था। साथ ही बुधवार को हाई कोर्ट ने केंद्र और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) की आलोचना की थी कि उन्होंने इंडिगो के खिलाफ तुरंत कार्रवाई नहीं की, क्योंकि वह नए FDTL नियमों को पूरा करने के लिए ज़रूरी मैनपावर तैनात करने में नाकाम रही, जिसके कारण हाल ही में बड़े पैमाने पर फ़्लाइट कैंसल होने के कारण लाखों यात्री देश भर के एयरपोर्ट पर फंसे रहे।





