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JNUSU चुनाव: वोटिंग कल, प्रेसिडेंशियल डिबेट में क्या मुद्दे, कब आएंगे नतीजे?

JNUSU चुनाव: वोटिंग कल, प्रेसिडेंशियल डिबेट में क्या मुद्दे, कब आएंगे नतीजे?

संक्षेप:

JNUSU Elections 2025: जेएनयू में मंगलवार को छात्र संघ चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में सोमवार रात को प्रेसिडेंशियल डिबेट कई मुद्दे छाए रहे। मतदान, काउंटिंग और नतीजे तक की पूरी डिटेल…

Mon, 3 Nov 2025 08:21 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में मंगलवार को छात्र संघ चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे। जेएनयूएसयू चुनाव के लिए सोमवार तड़के प्रचार अभियान समाप्त हो गया। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में सोमवार को तड़के प्रेसिडेंशियल डिबेट समाप्त हो गई। रात भर पूरा परिसर सियासी नारों से गूंजता रहा। जेएनयू के खचाखच भरे झेलम लॉन में अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के बीच वाद-विवाद देखा गया। इसके बाद 24 घंटे की अनिवार्य 'नो कैंपेनिंग' अवधि शुरू हो गई है।

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इनके बीच कड़ी टक्कर की उम्मीद

इस चुनाव में वाम गठबंधन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), एनएसयूआई, प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (पीएसए), दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (डीएसओ), बाप्सा और स्वतंत्र उम्मीदवार मैदान में हैं। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, वामपंथी छात्र संगठनों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी के बीच कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है।

लेफ्ट एकजुट होकर लड़ रहा चुनाव

वामपंथी छात्र संगठनों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) शामिल हैं। इस बार वाम संगठन आइसा, एसएफआई और डीएसएफ एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।

लेफ्ट से मैदान में ये सूरमा

लेफ्ट यूनिटी ने अदिति मिश्रा को अध्यक्ष, किझाकूट गोपिका बाबू को उपाध्यक्ष, सुनील यादव को महासचिव और दानिश अली को संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा है।

एबीवीपी से ये दिग्गज

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी ने विकास पटेल को अध्यक्ष, तान्या कुमारी को उपाध्यक्ष, राजेश्वर कांत दुबे को महासचिव और अनुज को संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा है।

मतदान, काउंटिंग और नतीजे

मतदान चार नवंबर को दो सत्रों में होगा। वोटिंग का पहला सत्र सुबह नौ बजे से अपराह्न एक बजे तक चलेगा। दूसरा सत्र अपराह्न 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक चलेगा। मतगणना रात नौ बजे शुरू होगी और अंतिम परिणाम छह नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

उम्मीदवारों ने रखीं बातें

सोमवार रात को हुई प्रेसिडेंशियल डिबेट में वामपंथी, एबीवीपी, एनएसयूआई, प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स एसोसिएशन (पीएसए), दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (डीएसओ) और स्वतंत्र पैनल के छह उम्मीदवारों ने स्टूडेंट्स एक्टिविटी सेंटर में अपनी बातें रखीं। इस गर्मागर्म बहस मं बापसा उम्मीदवार एक निजी कारण से भाग नहीं ले सके। हर प्रत्याशी से दूसरे अध्यक्ष पद के उम्मीदवार से सवाल कर रहा था। कई बार तीखे सवालों पर प्रत्याशी असहज भी दिखे।

प्रेसिडेंशियल डिबेट में छाए ये मुद्दे?

प्रेसिडेंशियल डिबेट में अमेरिका, गाजा, इजराइल, फिलीस्तीन, सूडान सहित, असम में हिंसा, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, नक्सली हिंसा, शिक्षण संस्थानों में फंड की कटौती सहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे छाए रहे। प्रेसिडेंशियल डिबेट में छात्रवृत्ति, शोध निधि और हास्टल्स की सुरक्षा के मुद्दे भी उठाए गए।

लेफ्ट ने किया फलस्तीन का जिक्र

वाम गठबंधन की उम्मीदवार अदिति मिश्रा ने फलस्तीन, सोनम वांगचुक की रिहाई जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। अदिति मिश्रा ने सभी के लिए सुलभ और समावेशी जेएनयू की रक्षा करने का वादा किया।

एबीवीपी का लेफ्ट पर अटैक

एबीवीपी ने अपने चुनाव प्रचार में विकास और राष्ट्रवाद पर केंद्रित अभियान चलाया। एबीवीपी के विकास पटेल ने वामपंथी राजनीति पर हमला करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय वाम राजनीति से थक चुका है। 50 वर्षों से यही लोग राज कर रहे हैं और विश्वविद्यालय को पीछे धकेल रहे हैं।

NSUI ने उठाए ये मुद्दे

एनएसयूआई की तरफ से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विकास ने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मैं गाजा, सूडान, यूक्रेन, अजरबैजान के लोगों को सलाम पेश करता हूं। मौजूदा केंद्र सरकार में जातीय उत्पीड़न बढ़ रहा है। दलितों पर अत्याचार हो रहा है। सीजेआई पर फेंकी गई चप्पल देश के मूल्यों पर हमला थी। वाम और दक्षिण दोनों ने जेएनयू के असली मुद्दों को दरकिनार किया है। छात्रवृत्ति, शोध निधि और छात्रावास सुरक्षा पर कोई बात नहीं होती।

मंच पर फाड़ी नियम पुस्तिका

पीएसए की शिंदे विजयलक्ष्मी वेंकट राव ने ‘चीफ प्रॉक्टर ऑफिस’ (सीपीओ) की नियम पुस्तिका की एक प्रति मंच पर फाड़ दी और कहा कि यह सुरक्षा नहीं, निगरानी का प्रतीक है। उन्होंने अपने भाषण में नामी शायरों के शेर भी सुनाएं। निर्दलीय अंगद सिंह समेत अन्य उम्मीदवारों ने दोनों प्रमुख धड़ों पर फ़ेलोशिप, छात्रावास सुरक्षा और शोध सहायता जैसे मुख्य मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

(पीटीआई और हिन्दुस्तान संवाददाता के इनपुट पर आधारित)

Krishna Bihari Singh

लेखक के बारे में

Krishna Bihari Singh
पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों से केबी उपनाम से पहचान रखने वाले कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह लोकमत, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। मूलरूप से यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लॉ और साइंस से ग्रेजुएट केबी ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमफिल किया है। वह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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