JNUSU पदाधिकारियों पर FIR, पुलिस ने पूछताछ के लिए थाना बुलाया; क्या मामला

Jan 03, 2026 02:12 pm ISTSubodh Kumar Mishra पीटीआई, नई दिल्ली
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जेएनयू के बीआर अंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय के मुद्दे पर छात्र संघ और जेएनयू प्रशासन आमने-सामने दिख रही है। जेएनयू प्रशासन द्वारा केस दर्ज कराने के बाद दिल्ली पुलिस ने छात्र संघ के पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष को नोटिस जारी कर थाना बुलाया है। 

JNUSU पदाधिकारियों पर FIR, पुलिस ने पूछताछ के लिए थाना बुलाया; क्या मामला

जेएनयू के बीआर अंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय के मुद्दे पर छात्र संघ और जेएनयू प्रशासन आमने-सामने दिख रही है। जेएनयू प्रशासन द्वारा केस दर्ज कराने के बाद दिल्ली पुलिस ने छात्र संघ के पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष को नोटिस जारी कर थाना बुलाया है। वहीं, छात्र संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्र प्रतिनिधियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने एक बयान में विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्र प्रतिनिधियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। दरअसल, दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय के सेंट्रल लाइब्रेरी में निगरानी उपायों का विरोध करने के लिए वर्तमान और पूर्व संघ पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है।

एफआईआर के बाद पुलिस ने नोटिस जारी किए

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ये नोटिस जेएनयू प्रशासन द्वारा जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका, महासचिव सुनील, संयुक्त सचिव दानिश और पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के बाद जारी किए गए हैं। पीटीआई से बात करते हुए छात्र संघ के वर्तमान अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने बताया कि जेएनयूएसयू के पदाधिकारियों और जेएनएसयू के पूर्व अध्यक्ष को पूछताछ के लिए थाना बुलाया गया है।

कैमरे और मैग्नेटिक इंट्रेंस द्वार लगाने का विरोध

छात्र संघ के बयान में कहा गया है कि बी आर अंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय में चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे और मैग्नेटिक इंट्रेंस द्वार लगाने का विरोध करने के लिए दिल्ली पुलिस ने जांच नोटिस जारी किए हैं। आरोप लगाया है कि यह कदम छात्रों की आवाज को दबाने और कार्यकर्ताओं को डराने के उद्देश्य से उठाया गया है।

निजता का उल्लंघन होता है

जेएनएसयू के बयान में आगे कहा गया है कि छात्र लंबे समय से केंद्रीय पुस्तकालय की दयनीय स्थिति को लेकर चिंता जताते रहे हैं। कई सालों से वे अधिक पुस्तकों, बैठने की क्षमता और पुस्तकालय का समय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसके उलट संघ ने कहा कि प्रशासन सीमित संसाधनों को निगरानी तंत्र में निवेश कर रहा है। छात्रों का यह भी कहना है कि इससे आवागमन प्रतिबंधित होता है और निजता का उल्लंघन होता है।

आश्वासन का उल्लंघन किया

जेएनयूएसयू के अनुसार, मैग्नेटिक इंट्रेंस द्वार पिछले साल अगस्त में बिना सलाह के लगाए गए थे। तत्कालीन जेएनयूएसयू अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के नेतृत्व में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासन को द्वार हटाने के लिए मजबूर किया। पुस्तकालय अधिकारियों ने बाद में छात्रों को आश्वासन दिया था कि भविष्य में कोई भी निर्णय छात्रों के प्रतिनिधित्व वाली एक स्वतंत्र समिति द्वारा लिया जाएगा।

छात्र नेताओं के खिलाफ मामले वापस लेने की मांग

छात्र संघ ने दावा किया कि प्रशासन ने नवंबर 2025 में जेएनयूएसयू चुनावों के दौरान गेटों को फिर से लगाकर इस आश्वासन का उल्लंघन किया। उस समय छात्र चुनाव प्रक्रिया में व्यस्त थे। छात्र संघ ने इस कदम का विरोध करते आरोप लगाया कि प्रशासन ने प्रॉक्टोरियल नोटिस जारी किए और पुलिस में शिकायतें दर्ज कराईं। जेएनयूएसयू ने इसकी कड़ी निंदा की और छात्र नेताओं के खिलाफ सभी मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग की।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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