जनकपुरी हादसे पर चौंकाने वाला खुलासा, कमल को 4 लोगों ने गड्ढे में देखा, लेकिन बचाया नहीं

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में जनकपुरी हादसे को लेकर इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हादसे का पता चलने के बावजूद विपिन घर चला गया, गार्ड जाकर चैन से कुर्सी पर बैठ गया, योगेश झुग्गी में जाकर सो गया और ठेकेदार राजेश चुप्पी मार गया।  

जनकपुरी हादसे पर चौंकाने वाला खुलासा, कमल को 4 लोगों ने गड्ढे में देखा, लेकिन बचाया नहीं

राजधानी दिल्ली में जनकपुरी हादसे को लेकर इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। हादसे का पता चलने के बावजूद विपिन घर चला गया, गार्ड जाकर चैन से कुर्सी पर बैठ गया, योगेश झुग्गी में जाकर सो गया और ठेकेदार राजेश चुप्पी मार गया। इन चारों ने गुरुवार की रात कमल को 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरे देखा था, मगर उसे निकालने की कोशिश तो दूर किसी ने पुलिस को कॉल तक नहीं की। कमल उसी गड्ढे में तड़प-तड़प कर मर गया।

सीसीटीवी फुटेज में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए

गड्ढे के पास मौजूद एक कैफे की सीसीटीवी फुटेज में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। घटना वाली रात 12 बजे के आसपास बाइक सवार कमल जब गड्ढे में गिरा था तो वहां से कार सवार परिवार गुजर रहा था। कार चला रहे विपिन ने तुरंत अपनी गाड़ी रोकी और देखा कि गड्ढे में कमल बाइक के नीचे दबा था, उसकी बाइक की लाइट जल रही थी।

विपिन ने तुरंत एक कैफे के बाहर खड़े कॉलोनी के सुरक्षाकर्मी देशराज को इसकी जानकारी दी। सुरक्षाकर्मी ने वहां मौजूद दिल्ली जल बोर्ड कर्मचारी योगेश को घटना के बारे में बताया। योगेश ने जल बोर्ड के ठेकेदार राजेश प्रजापति को फोन पर बताया। इसके बाद कार सवार विपिन सागरपुर स्थित अपने घर चला गया। साथ ही सुरक्षाकर्मी कैफे के बाहर जाकर बैठ गया और कुछ देर बाद योगेश भी अपनी झुग्गी में जाकर सो गया।

सूचना पर ठेकेदार राजेश त्रिनगर स्थित अपने घर से मौके पर पहुंचा। उसने भी कमल को गड्ढे में पड़े देखा, लेकिन उसे निकालने की कोई कोशिश नहीं की और न ही पुलिस को सूचना दी। राजेश, कमल को वहीं छोड़कर अपने घर चला गया।

अधिकारी-ठेकेदार की लापरवाही ने ली जान

जनकपुरी में गड्ढे में गिरने से हुई युवक की मौत मामले में दिल्ली जल बोर्ड की प्राथमिक रिपोर्ट सामने आ गई है। इसमें घटनास्थल पर ठेकेदार की लापरवाही और अधिकारियों की चूक को लेकर कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही भविष्य में इस तरह की घटना न हो, इसके लिए भी अधिकारियों को लगातार निरीक्षण एवं प्रत्येक 24 घंटे में रिपोर्ट लेने की सलाह दी गई है।

दिल्ली जल बोर्ड की टीम ने शुक्रवार को मौके का निरीक्षण करने के बाद अपनी प्राथमिक रिपोर्ट दी है। इसमें बताया गया है कि यह सड़क दोनों तरफ से बैरिकेड लगाकर बंद की गई थी और यातायात को दूसरे मार्ग पर डायवर्ट किया गया था, लेकिन बैरिकेड लगाते समय बीच में खाली जगह छोड़ दी गई। इस कारण युवक बाइक के साथ भीतर प्रवेश कर गया। जांच में पाया गया है कि इस जगह पर घटना के समय कोई गार्ड या कर्मचारी मौजूद नहीं था जो सुरक्षा में सबसे बड़ी चूक है। मौके पर सुरक्षा के सभी उपाय सुनिश्चित करना ठेकेदार की जिम्मेदारी है। वहीं चीफ इंजीनियर की जिम्मेदारी इन नियमों का पालन करने की है।

इन अधिकारियों पर हो कार्रवाई : रिपोर्ट में बताया गया है कि इस जगह की देखरेख करने के लिए इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट डिविजन की भी जिम्मेदारी थी। इसके चलते सीनियर इंजीनियर रमेश कुमार गुप्ता, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर आजाद सिंह ग्रेवाल, असिस्टेंट इंजीनियर वंदना और जूनियर इंजीनियर आलोक कुमार (संविदा कर्मचारी) की जवाबदेही तय होनी चाहिए और विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। कमेटी ने सुझाव दिया है कि ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए और उनके जवाब के बाद इसे लेकर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

नहीं हटने चाहिए बैरिकेड : कमेटी ने कहा है कि किसी भी कार्यस्थल के चारों तरफ लोहे की बैरिकेडिंग लगाना अनिवार्य है, ताकि वहां सुरक्षा के साथ काम हो सके। इस तरह के बैरिकेड को तभी हटाया जाना चाहिए जब काम पूरा हो जाए और सड़क लोगों के इस्तेमाल करने के लायक हो जाए। इसके अलावा हरे रंग के पर्दों का इस्तेमाल ऐसी जगह किया जाना चाहिए, जहां गड्ढे ना हो। उन्होंने अन्य जगहों पर सुरक्षा जांच बेहतर करने की आवश्यकता बताई है।

प्रतिदिन लेनी चाहिए सुरक्षा रिपोर्ट : कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस तरह की घटना भविष्य में ना हो इसके लिए सभी कार्यस्थलों पर बैरिकेडिंग अनिवार्य रूप से लगने चाहिए। ऐसे कार्यस्थलों से इंजीनियर प्रतिदिन सुरक्षा को लिए किए गए बंदोबस्त की निगरानी करें और प्रत्येक 24 घंटे पर रिपोर्ट लें। इसके अलावा समय-समय पर चीफ इंजीनियर द्वारा मौके पर जाकर औचक निरीक्षण किया जाए। इस तरह के कार्यस्थलों की समय-समय की फोटो भी मंगवाई जाए, ताकि सुरक्षा की जानकारी मिल सके।

नहीं थे सुरक्षा के उपकरण

दिल्ली पुलिस की एफआईआर में भी जलबोर्ड की लापरवाही दर्ज की गई है। एफआईआर के अनुसार, जनकपुरी के पोसंगीपुर पार्क के पास मुख्य रोड पर बनाए गए गड्ढे को ढंका नहीं गया था। खुदाई के बाद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। वहां कोई भी चेतावनी चिह्न या रिफ्लेक्टर मौजूद नहीं था। साथ ही रोशनी के प्रबंध नहीं थे। इस कारण यह हादसा हुआ है।

रिफ्लेक्टर नहीं लगे थे

एफआईआर के अनुसार, दिल्ली जल बोर्ड और उसके ठेकेदार द्वारा मुख्य रोड पर बनाए गए गड्ढे को ना ढंकने, खुदाई के काम के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होने, चेतावनी चिह्न या रिफ्लेक्टर इत्यादि ना लगाने के कारण हादसा हुआ।

चेहरे पर थे चोट के निशान

डॉक्टरों ने बताया कि कमल के पेट और चेहरे पर चोट के निशान थे। जिससे यह पता चलता है कि कमल मुंह के बल गड्ढे में गिरा था। उसकी नाक से खून निकलने के निशान भी मिले। बाइक उसके उपर थी। उसे अंदरूनी चोट लगने की आशंका जताई गई है।

गड्ढा 14 फीट गहरा और 20 फीट लंबा था

एफआईआर के अनुसार, सुबह सूचना मिली कि एक शख्स गड्ढे में गिर गया है। मौके पर पुलिस टीम को भेजा गया। जहां करीब 20 फुट लंबा 13 फुट चौड़ा व 14 फुट गहरा गड्ढा सड़क के बीचोबीच खोदा गया था। गड्ढे में एक शख्स गिरा हुआ था। घायल को दमकल की मदद से गड्ढे से बाहर निकाला गया।

ठेकेदार गिरफ्तार

जल बोर्ड का ठेकेदार राजेश प्रजापति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा इस मामले में दिल्ली जलबोर्ड की प्राथमिक जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में इस घटना के लिए निगम अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही सामने आई है। इसके लिए निगम के तीन इंजीनियरों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। इस बीच सरकार ने सभी खुदाई स्थलों की रिपोर्ट तीन दिन में मांगी है।

मुआवजा- सरकारी नौकरी की मांग

जनकपुरी हादसे में जान गंवाने वाले युवक के परिजनों को उचित मुआवजा राशि देने की गढ़वाल हितैषिणी सभा (जीएचएस) ने मांग की है। इसे लेकर सभा ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखा है।

इसमें मांग की है कि परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही, हादसे के जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा है। सभा के महासचिव पवन कुमार मैठानी ने आरोप लगाते हुए कहा कि कमल की प्रशासन की लापरवाही से मृत्यु हुई है।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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