जनकपुरी बाइक हादसे में चार्जशीट दाखिल, 3 लोग आरोपी बनाए गए; कौन-कौन सी धाराएं लगीं

Apr 09, 2026 10:54 am ISTSubodh Kumar Mishra एएनआई, नई दिल्ली
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दिल्ली पुलिस ने द्वारका कोर्ट में बाइकर कमल ध्यानी की मौत के मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। ध्यानी इस साल फरवरी में जनकपुरी इलाके में अपनी बाइक चलाते समय एक गड्ढे में गिर गए थे। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाते हुए आपराधिक साजिश और गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी धाराएं लगाई हैं।

जनकपुरी बाइक हादसे में चार्जशीट दाखिल, 3 लोग आरोपी बनाए गए; कौन-कौन सी धाराएं लगीं

दिल्ली पुलिस ने द्वारका कोर्ट में बाइकर कमल ध्यानी की मौत के मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। ध्यानी इस साल फरवरी में जनकपुरी इलाके में अपनी बाइक चलाते समय एक गड्ढे में गिर गए थे। पुलिस ने इस मामले में आपराधिक साजिश और गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी धाराएं लगाई हैं।

जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास हरजोत सिंह औजला ने मंगलवार को चार्जशीट पर विचार करने के लिए 30 अप्रैल की तारीख तय की। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख पर एसएचओ को स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया है। जुडिशियल मजिस्ट्रेट औजला ने 7 अप्रैल को आदेश दिया कि इस मामले को 30 अप्रैल को विचार के लिए दोबारा लिस्ट किया जाए। अगली सुनवाई की तारीख पर स्पष्टीकरण देने के लिए जांच अधिकारी और एसएचओ को तलब किया जाए। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में राजेश कुमार प्रजापति और योगेश नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

मंगलवार को अदालत में दाखिल की गई चार्जशीटमें तीन लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें राजेश और योगेश भी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस ने बीएनएस की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 238 A (सबूत मिटाना), 61 (2) (छोटे अपराध के लिए आपराधिक साजिश), 238 B (बड़े अपराध में सबूत मिटाना) और 340 (2) (जाली दस्तावेजों को असली के तौर पर इस्तेमाल करना) लगाई हैं।

इस बीच, बुधवार को अदालत ने सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश कुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें पुलिस थाने में गैर-कानूनी रूप से हिरासत में रखा गया था। जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने कहा कि रिकॉर्ड पर सामने वाले गेट की सीसीटीवी फुटेज, गिरफ्तारी मेमो, जीडी एंट्री और सीडीआर रिकॉर्ड रखे गए हैं। ये सबूत यह साबित करते हैं कि आरोपी को गैर-कानूनी रूप से हिरासत में नहीं रखा गया था। उसकी गिरफ्तारी तथा उसके बाद की हिरासत 7 फरवरी को जांच की सामान्य प्रक्रिया के तहत ही हुई थी। उन्होंने थाने से सीसीटीवी फुटेज मंगवाने के लिए निर्देश देने की मांग की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट के साथ सीडीआर भी जमा किया है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि आवेदक द्वारा अवैध हिरासत के संबंध में उठाए गए तर्क की जांच करने में काफी न्यायिक समय और मेहनत खर्च हुई है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आवेदक की ओर से किसी भी ठोस सामग्री या यहां तक कि प्रथम दृष्टया सबूतों से भी इस तर्क की पुष्टि नहीं हुई है। इसके विपरीत रिकॉर्ड विशेष रूप से सीडीआर कुछ और ही संकेत देता है।

कोर्ट ने कहा कि बुनियादी सामग्री के अभाव में खासकर तब जब आरोपों को रिकॉर्ड से कोई समर्थन नहीं मिल रहा हो, अदालत से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह कोई 'फिशिंग और रोविंग' (तलाश और छानबीन वाली) जांच शुरू करे। अदालत ने जनकपुरी थाने के जांच अधिकारी/एसएचओ को निर्देश दिया था कि वे 6 फरवरी से 8 फरवरी की अवधि का थाने से संबंधित सीसीटीवी फुटेज पेश करें।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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