रूस पढ़ने गए अंशु का शव आया भारत, यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ा रेवाड़ी का लाल; ताबूत में साथ आए वर्दी-जूते

Praveen Sharma हिन्दुस्तान, गुरुग्राम
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गुरुग्राम से सटे रेवाड़ी के काठुवास गांव के रहने वाले 22 वर्षीय अंशु का शव शुक्रवार को जब ताबूत में गांव पहुंचा तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। अंशु जो एमबीए की पढ़ाई करने रूस गया था। अंशु के पिता का आरोप है कि दलालों ने उसे धोखे से रूसी सेना में भर्ती कराकर यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर झोंक दिया।  

रूस पढ़ने गए अंशु का शव आया भारत, यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ा रेवाड़ी का लाल; ताबूत में साथ आए वर्दी-जूते

गुरुग्राम से सटे हरियाणा के रेवाड़ी के काठुवास गांव में शुक्रवार उस समय मातम छा गया, जब एमबीए की पढ़ाई करने रूस गए 22 वर्षीय अंशु का शव ताबूत में लिपटकर घर पहुंचा। गांव के श्मशान घाट पर कटर मशीन से ताबूत को खोला गया। उसमें में अंशु के शव के साथ-साथ उसकी रूसी सेना की वर्दी और जूते भी साथ भेजे गए। पिता का कहना है कि दलालों ने छात्र को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कराकर मौत के मोर्चे (रूस-यूक्रेन युद्ध) पर झोंक दिया।

पिता ने अपनी आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने सजाकर जिस बेटे को पढ़ने के लिए विदेश भेजा था, उसकी अर्थी उठते देख पूरे गांव का कलेजा फट गया। अंशु के बड़े भाई मोहित ने नम आंखों से अंशु की चिता को मुखाग्नि दी। लोगों का कहना था कि यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन दलालों की साजिश का नतीजा है, जिन्होंने शिक्षा के नाम पर एक होनहार छात्र को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कराकर मौत के मोर्चे पर झोंक दिया।

दलालों ने पढ़ाई छुड़वाकर युद्ध में भेजा

परिवहन विभाग में कार्यरत पिता राकेश कुमार ने बताया कि अंशु बीए करने के बाद एमबीए का सपना लेकर 30 अप्रैल 2025 में स्टडी वीजा पर रूस गया था। कुछ महीने कॉलेज में पढ़ाई भी की, लेकिन फिर दलालों के जाल में फंस गया। दलालों ने बेटे अंशु को जबर्दस्ती सितंबर 2025 में रूसी सेना में भर्ती करा दिया। अंशु ने आखिरी बार 18 अक्टूबर 2025 को घर बात की थी। अंशु ने बताया था कि सितंबर में वह रूस की सेना में भर्ती हुआ है। अब युद्ध के लिए उसे यूक्रेन की फर्स्ट लाइन में जा रहा है और अब कुछ दिनों के बाद ही बातचीत हो पाएगी।

सबका लाडला था अंशु

काठुवास निवासी राकेश कुमार की पत्नी का देहांत पहले ही हो चुका था। तीन भाई-बहनों में अंशु सबसे छोटा और सबका लाडला था। पिता ने अपनी जमा-पूंजी लगाकर उसे पढ़ने के लिए रूस भेजा था ताकि वह बड़ा आदमी बन सके, लेकिन घर लौटी तो सिर्फ उसकी यादें और ताबूत। गांव वालों का कहना है कि सरकार को उन दलालों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो मासूम युवाओं को पढ़ाई के नाम पर मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। रूस गए हरियाणा के सात बेटे अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

अनजान रहा परिवार

● जानकारी के अनुसार फोन पर बातचीत के कुछ समय बाद ही अंशु की मौत को हो चुकी थी, लेकिन परिवार छह महीने तक अनजान रहा। 2 अप्रैल को देश के विदेश मंत्री से मुलाकात हुई।

● 4 अप्रैल 2026 को पिता राकेश कुमार के पास रूस के मॉस्को से फोन आया। उन्हें बताया गया कि अंशु की मौत हो चुकी है और उसका शव मिल चुका है और भारत में भेजने में 10 से 15 दिन लगेंगे।

● 16 अप्रैल को सूचना मिली कि शव शुक्रवार को दिल्ली एयरपोर्ट आ रहा है। शुक्रवार सुबह दिल्ली से शव लेने के बाद परिवार 10 बजे गांव के श्मशान घाट में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

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प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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