50 दिन जेल में कैद, 25 दिन होटल बंद, 19 घंटे का खौफनाक सफर… तब जाकर ईरान से भारत लौट सके केतन
ईरान में फंसे गाजियाबाद के केतन मेहता की कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। करीब 50 दिन तक ईरानी जेल में रहने के बाद जब उन्हें रिहा किया गया, तो लगा कि अब वे सुरक्षित घर लौट पाएंगे। लेकिन हालात ऐसे बदले कि युद्ध के बीच ईरान में फंस गए और उन्हें 25 दिन तक होटल में कैद रहना पड़ा।

ईरान में फंसे गाजियाबाद के केतन मेहता की कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है। करीब 50 दिन तक ईरानी जेल में रहने के बाद जब उन्हें रिहा किया गया, तो लगा कि अब वे सुरक्षित घर लौट पाएंगे। लेकिन हालात ने अचानक ऐसा मोड़ लिया कि वे इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच फंस गए और उन्हें 25 दिन तक होटल में ही कैद रहना पड़ा।
28 फरवरी को लौटना था भारत, लेकिन…
गाजियाबाद के केतन मेहता ने घर लौटने के बाद एनडीटीवी से अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया- 27 फरवरी को उन्हें जेल से निकालकर एक होटल में शिफ्ट किया गया था। अगले दिन यानी 28 फरवरी को उन्हें भारत लौटना था, लेकिन उसी दिन अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू हो गए। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए।
जेल के बाद मिली होटल की कैद
मेहता ने बताया, “हमें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि युद्ध शुरू होने वाला है। अगले ही दिन बमबारी शुरू हो गई। एयरपोर्ट बंद हो गया और हमें होटल से बाहर निकलने से मना कर दिया गया।” उनका होटल बंदर अब्बास शहर के बेहद करीब था, जो ईरानी नौसेना का प्रमुख ठिकाना है और हमलों का मुख्य निशाना बना हुआ था।
हर दिन 100-200 बम गिरने की आती थीं आवाजें
उन्होंने बताया कि हर दिन 100 से 200 बम गिरने की आवाजें सुनाई देती थीं। “हम होटल की खिड़की से बाहर देखते थे और सामने मिसाइलें गिरती दिखती थीं। डर का माहौल था, समझ नहीं आ रहा था क्या करें।” करीब 25 दिन तक इसी डर के माहौल में जीते रहे, फिर आखिरकार उन्होंने भारत लौटने का जोखिम भरा फैसला किया।
19 घंटे बस से सफर करके पहुंचे आर्मेंनिया
मेहता ने बताया कि उन्होंने बंदर अब्बास से आर्मेनिया तक लगभग 1800 किलोमीटर का सफर बस से तय किया, जिसमें 18-19 घंटे लगे। इस दौरान भी रास्ते में लगातार धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं और बस हिलती रहती थी। पूरे रास्ते पहाड़ों से गूंजती विस्फोटों की आवाजें आती रहीं। डर के बीच किसी तरह हम आर्मेनिया बॉर्डर तक पहुंचे। इस दौरान भारतीय दूतावास लगातार उनके संपर्क में रहा और उन्हें जरूरी निर्देश देता रहा। आखिरकार आर्मेनिया पहुंचने के बाद उन्होंने फ्लाइट ली और भारत लौट आए।
किस मामले में ईरान की जेल में थे कैद
दरअसल, यह पूरा मामला 8 दिसंबर का है, जब ईरानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ‘एमटी वैलिएंट रोअर’ नाम के एक ऑयल टैंकर को जब्त कर लिया था। आरोप था कि जहाज में अवैध डीजल ले जाया जा रहा था, हालांकि कंपनी ने इन आरोपों से इनकार किया है। इस मामले में 10 भारतीय क्रू मेंबर्स को गिरफ्तार कर ईरान की जेल में रखा गया था।
विदेश मंत्रालय ने बताया था कि इन सभी भारतीयों को कांसुलर एक्सेस दिया गया था। अब केतन मेहता की सुरक्षित वापसी के बाद उनकी कहानी सामने आई है, जो युद्ध और कैद के बीच जिंदगी की जंग की एक दर्दनाक दास्तान बयां करती है।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
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