MBA-MCA पास युवा चला रहे थे जासूसी नेटवर्क, भारत में ISI ने बदला भर्ती का तरीका
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अब समाज के पिछड़े या अनपढ़ लोगों के बजाय ‘तेज तर्रार और पढ़े-लिखे युवाओं’ को अपना निशाना बना रही है। इस गैंग में MBA और BCA डिग्री धारक युवा शामिल थे।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जिस 'जासूसी-आतंक' मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, उसने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अब समाज के पिछड़े या अनपढ़ लोगों के बजाय ‘तेज तर्रार और पढ़े-लिखे युवाओं’ को अपना निशाना बना रही है। इस गैंग में MBA और BCA डिग्री धारक युवा शामिल थे, जो तकनीक का इस्तेमाल कर जासूसी को अंजाम दे रहे थे।
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा दिल्ली पुलिस ने बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) के गुर्गों मनु अगवान और मनिंदर बिल्ला को ऐसे मॉड्यूल के मुख्य हैंडलर के रूप में पहचाना है। वर्तमान में ग्रीस, पुर्तगाल और जर्मनी के बीच घूम रहे अगवान ने 2025 में अमेरिका में हैप्पी पासिया की गिरफ्तारी के बाद BKI मॉड्यूल के एक हिस्से का ऑपरेशनल चार्ज संभाल लिया था। वह पाकिस्तान में हरविंदर सिंह, उर्फ रिंदा संधू द्वारा बनाए गए एक ग्रुप के साथ मिलकर काम करता है। बिल्ला को आखिरी बार मलेशिया में देखा गया था और वह खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) के गुटों के साथ कॉर्डिनेशन करता है।
सूत्रों ने बताया अगवान 2022 में थाईलैंड भाग गया था और फिर पुर्तगाल में BKI एक बेस में शिफ्ट हो गया। वह तब से पंजाब में हमलों की साजिश रच रहा है और अब उसका फोकस दिल्ली पर है।
दिल्ली पुलिस की जांच में पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा भर्ती की रणनीति में बदलाव का भी खुलासा हुआ है। पहले आमतौर पर हाशिए पर या अशिक्षित लोगों को टारगेट किया जाता था, लेकिन अब पढ़े-लिखे, होनहार और तेज तर्रार युवाओं को BKI-ISI में शामिल करने की एक सोची-समझी चाल का पता चला है। ऑपरेशन ने कट्टरपंथ के जाल को उजागर कर दिया है, जहां एमबीए ग्रेजुएट्स और टेक्नोलॉजी में माहिर युवा मजदूरों, ड्राइवरों और किसानों के साथ मिलकर हथियारों और ड्रग्स की तस्करी और हाईटेक निगरानी में मदद कर रहे थे।
इनके हाथ में थी कमान
दिल्ली के रोहिणी का रहने वाला अतुल राठी इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड और मुख्य चेहरा था। न्यूजीलैंड से MBA कर चुका अतुल दोहरी जिंदगी जी रहा था। एडिशनल सीपी (स्पेशल सेल) प्रमोद कुशवाह ने कहा, न्यूजीलैंड से एमबीए करने के बाद वह दोहरी जिंदगी जीने के लिए भारत लौट आया था। रोहिणी का ही रहने वाले रोहित भी एमबीए ग्रेजुएट है, जो अतुल के साथ मिलकर पंजाब से विदेशी हथियार लाने का काम करता था।
वहीं बीसीए ग्रेजुएट मनप्रीत इस गैंग की 'डिजिटल रीढ़' था। तकनीक में माहिर होने के कारण वह विदेश में बैठे हैंडलर्स संग संपर्क बनाए रखने के साथ ही गोला-बारूद के वितरण के प्रबंधन और फर्जी आईडी पर सिम कार्ड लेने का काम करता था।
कैसे करते थे काम?
यह मॉड्यूल समाज के हर तबके में पैठ बना चुका था। जहां MBA पास युवा रणनीति बनाते थे। ग्रेजुएशन कर चुके अजय और डीजे ऑपरेटर सलविंदर सिंह ने सहायता प्रदान करते थे। वहीं वॉलपेपर चिपकाने वाले अनमोल और साहिल जैसे लोग दूर से निगरानी रखने के लिए संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी कैमरे और सोलर पावर्ड जासूसी उपकरण लगाने का काम करते थे। इनका मकसद भारतीय सेना और BSF की आवाजाही पर रियल-टाइम नजर रखना था।
पुलिस ने कहा कि दूसरी यूनिट ने नार्को-टेरर और सैन्य जासूसी के मेल पर ध्यान केंद्रित किया। कुशवाहा ने आगे बताया, “एक किसान गुरजीत सिंह और एक तस्कर बूटा सिंह ने भारतीय सेना की छावनियों की रेकी करने के लिए सीमा पार अपने पारिवारिक संबंधों का इस्तेमाल किया। उन्होंने एक ड्राइवर रिंपलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी के साथ मिलकर काम किया। इनका काम ड्रग्स की बिक्री से मिली रकम की मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर BSF और अर्धसैनिक बलों की रियल टाइम एक्टिविटीज पर नजर रखने के लिए सोलर पावर से चलने वाले निगरानी उपकरणों को लगाने की योजना बनाना था।”


