भारतीय सेना के 9 ठिकानों की फुटेज PAK भेजी, हैंड ग्रेनेड से हमलों की थी साजिश
Delhi News : दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की पूछताछ में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े संदिग्ध जासूसों ने कई बड़े खुलासे किए हैं। आरोपियों ने कुल नौ जगह सीसीटीवी लगाए थे, जहां से सेना और सुरक्षा बलों के नौ ठिकानों की सीसीटीवी फुटेज पाकिस्तान में आईएसआई हैंडलर को जा रही थी।

Delhi News : दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हत्थे चढ़े पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़े संदिग्ध भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के नौ ठिकानों की सीसीटीवी फुटेज सीधे पाकिस्तान में आईएसआई हैंडलर को पहुंचा रहे थे। आरोपियों ने कुल नौ जगहों पर सीसीटीवी लगाए थे और तकरीबन दर्जनभर अन्य जगहों पर लगाने की तैयारी में थे। इन संदिग्धों ने इनमें से कुछ जगहों की रेकी भी की थी, जहां से वे ग्रेनेड हमले की वारदात को अंजाम देने की फिराक में जुटे थे। स्पेशल सेल की पूछताछ में इन संदिग्धों ने यह खुलासा किया है।
पंजाब और राजस्थान में लगाए सीसीटीवी
आरोपियों ने स्वीकार किया कि पंजाब और राजस्थान में इन लोगों ने सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। इनका इरादा अन्य प्रदेशों में स्थित सेना और सुरक्षाबलों के ठिकानों को भी सीसीटीवी की जद में लेने का था।
पाकिस्तानी आकाओं से ऐप के जरिए संपर्क
आरोपी एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़े थे, ताकि सुरक्षा एजेंसियों को इनकी भनक नहीं लगे और ये देशविरोधी काम करते रहें। ये अमूमन वॉट्सऐप, टेलीग्राम और सिग्नल ऐप के जरिये अपने आकाओं के संपर्क में रहते थे। ये संदिग्ध सबसे ज्यादा टेलीग्राम का इस्तेमाल करते थे, क्योंकि इसमें बड़े ग्रुप बनाने की सुविधा मिलती है, जिसके जरिए प्रोपेगेंडा फैलाया जाता था। हालांकि, अब सुरक्षा एजेंसियां इन सभी सोशल मीडिया ऐप पर कड़ाई से नजर रख रही हैं, इसलिए आतंकी अब आपसी बातचीत के लिए ‘सीक्रेट चैट’ फीचर का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
इस तरह सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचते थे
सिग्नल ऐप अपनी मजबूत प्राइवेसी नीतियों के कारण संदिग्धों के बीच काफी लोकप्रिय है। व्हाट्सऐप की व्यापक पहुंच और एन्क्रिप्शन के कारण इसका इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर समन्वय के लिए आरोपी कर रहे थे। इन ऐप पर ही संदिग्धों को सेना और सुरक्षा ठिकानों की फोटो/वीडियो भेजने के लिए निर्देश मिलते थे।
तस्करी के जरिए जुटाई रकम से कैमरे खरीदे
पुलिस पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी हथियार तस्करी के जरिए रकम जुटाते थे। इसी रकम से उन्होंने सीसीटीवी खरीदे थे, जिनका रेकी में इस्मेमाल किया जाता था।
रक्षा प्रतिष्ठानों के पास की सड़कों का करते थे चुनाव
सोलर पावर से चलने वाले सीसीटीवी कैमरों को लगाने के लिए आरोपी रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास की सड़कों को चुनते थे, ताकि इस इलाके की लाइव फुटेज पाक में बैठे हैंडलर को दी जा सके।
बड़े पैमाने पर हमला करने की योजना थी
इस मामले की जांच से जुड़े दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की प्रकृति से पता चलता है कि संदिग्ध इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को भंग करने के मकसद से बड़े पैमाने पर हमले करने की योजना बना रहे थे।
कई जगह छापेमारी
आईएसआई और बब्बर खालसा के इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य संदिग्धों की भी पुलिस तलाश कर रही है, ताकि विदेशी हैंडलरों और स्थानीय सहायकों की पहचान की जा सके। पुलिस को शक है कि इन संदिग्धों के मॉड्यूल से कुछ अन्य स्थानीय लोग भी जुड़े थे, जिनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है।


