INDIA गठबंधन से दूरी और कांग्रेस पर जोरदार प्रहार; AAP के हमलों की क्या वजह?
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक से दूरी बनाए रखी। यही नहीं बैठक के दौरान AAP ने कांग्रेस पर तीखे हमले भी किए। आम आदमी पार्टी के इस रुख की क्या है वजह? जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट…

दिल्ली में सोमवार को हुई INDIA गठबंधन की बैठक से आम आदमी पार्टी ने दूरी बनाए रखा। यही नहीं AAP ने कांग्रेस पर जोरदार हमले भी किए। AAP नेता सोमनाथ भारती ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन का कोई भविष्य नहीं है। कांग्रेस पर्दे के पीछे BJP से मिली हुई है। वैसे इंडिया गठबंधन की बैठक में आम आदमी पार्टी इसलिए भी नहीं थी क्योंकि उसने जुलाई 2025 में औपचारिक रूप से गठबंधन छोड़ दिया था। एक समय तो उसने यह भी कह दिया था कि कांग्रेस को ही INDIA गठबंधन से बाहर किया जाना चाहिए। हालांकि जानकार आम आदमी पार्टी के इस रवैये के पीछे पंजाब को मानते हैं।
AAP नेता सोमनाथ भारती ने कहा कि जब तक कांग्रेस INDIA गठबंधन की अगुवाई करेगी तब तक गठबंधन का कोई भविष्य नहीं है। कांग्रेस एक तरफ कहती है कि हम गठबंधन के तौर पर लड़ेंगे लेकिन पर्दे के पीछे वह BJP के साथ नजर आती है।
सोमनाथ भारती ने 2024 में AAP और कांग्रेस के बीच गठबंधन में लड़े गए लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तब दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों को 3:4 के फॉर्मूले के तहत आपस में बांटा था। अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस की 3 सीटों के लिए खुलकर प्रचार किया जबकि राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के किसी नेता ने AAP की चार सीटों के लिए वोट नहीं मांगे। नतीजतन भाजपा सातों सीटें जीत गई।
सोमनाथ भारती यहीं नहीं रुके उन्होंने 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में कोई सीट नहीं जीत पाने के बाद भी कांग्रेस नेताओं ने BJP के हाथों AAP की शिकस्त का जश्न मनाया था। वहीं सोमवार को कांग्रेस ने भी गठबंधन की बैठक से दूरी बनाने वाली पार्टियों पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं होने वाली पार्टियां BJP के साथ मिली हुई हैं।
बाकी बातें तो बहाना, असल वजह है पंजाब
जानकारों की मानें तो दिल्ली की लड़ाई की बातें करना तो एक बहाना है असल वजह पंजाब है। अरविंद केजरीवाल की AAP और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। इतिहास देखें तो 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP ने 117 में से 92 सीटें जीतकर सत्ता में बैठी कांग्रेस को हटा दिया था। वह पंजाब की सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी।
पंजाब को लेकर दोनों नहीं आए साथ
इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव आए। इस चुनाव में AAP और कांग्रेस ने दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, चंडीगढ़ और गोवा जैसी जगहों पर 'INDIA' गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन पंजाब में दोनों के बीच समझौता नहीं हुआ। पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में कांग्रेस ने 7 पर जीत दर्ज की जबकी सूबे की सत्ता में होने के बाद भी AAP को महज 3 सीटों से संतोष करना पड़ा था। बाकी सीटों में एक सीट शिरोमणि अकाली दल ने जीती और दो पर निर्दलीय विजयी हुए थे।
पंजाब AAP का आखिरी गढ़
इसके बाद जब पंजाब में विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए तब भी दोनों के बीच कांटे की लड़ाई देखी गई। पंजाब के अलावा हरियाणा के 2024 विधानसभा चुनाव में भी दोनों के बीच गठबंधन नहीं हो पाया था। अब चूंकि AAP और कांग्रेस दोनों ही 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही हैं। अरविंद केजरीवाल के लिए पंजाब आखिरी गढ़ के तौर पर बचा है।
पंजाब में समझौता मुश्किल
विश्लेषकों की मानें तो आने वाले दिनों में पंजाब में AAP-कांग्रेस के बीच समझौता मुश्किल लग रहा है। खासकर तब जब पंजाब कांग्रेस के नेताओं का लंबे समय से मानना है कि AAP के साथ गठबंधन से केवल अकाली दल और BJP को फायदा होगा। इससे कांग्रेस का अपना आधार कमजोर होगा।
पंजाब पर AAP नहीं हटेगी पीछे
चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर आशुतोष कुमार कहते हैं कि मौजूदा वक्त में पंजाब की सियासी पिच पर AAP और कांग्रेस ही दो मुख्य पार्टियां हैं। AAP हरियाणा, गोवा, गुजरात और अन्य राज्यों में भी जगह बनाने की कोशिश में है। ऐसे में वह पंजाब जैसे मजबूत किले को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहेगी।
दोनों के बीच गठबंधन का कारण रणनीतिक
वहीं इतिहासकार और पॉलिटिकल कॉलमिस्ट हरजेश्वर पाल सिंह का कहना है कि AAP ने जिन राज्यों में सफलता हासिल की है (जैसे दिल्ली, पंजाब, गुजरात, गोवा) वहां उसने काफी हद तक उस जगह को ही कब्जाया है जो पहले कांग्रेस की थी। गठबंधन करने की बात है तो इस मसले पर दोनों का रवैया हमेशा से रणनीतिक रहा है। दोनों के बीच गठबंधन की वजह विचारधारा नहीं रहा है।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
संक्षिप्त विवरण
कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।
रिपोर्टिंग एवं विशेषज्ञता: कृष्ण बिहारी सिंह राजनीति, जिओ पॉलिटिक्स, जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। कृष्ण बिहारी सिंह ने अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में नेशनल, इंटरनेशनल, बिजनेस, रिसर्च एवं एक्सप्लेनर और संपादकीय टीमों के साथ लंबे समय तक काम किया है। यही वजह है कि खबर के पीछे छिपे एजेंडे की समझ रखने वाले केबी समसामयिक घटनाक्रमों पर गहरा विश्लेषण करते हैं।
पत्रकारिता का उद्देश्य: कृष्ण बिहारी सिंह 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ काम करते हैं। केबी का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी उसका राष्ट्र और लोक कल्याण है। केबी खबरों को पहले प्रमाणिकता की कसौटी पर कसते हैं, फिर आम जनमानस की भाषा में उसे परोसने का काम करते हैं। केबी का मानना है कि रिपोर्टिंग का उद्देश्य पाठकों को न केवल सूचना देना वरन उन्हें सही और असल जानकारी देना है।


