Hindi Newsएनसीआर NewsIn Delhi, one in every seven deaths is caused by toxic air; study
दिल्ली में हर 7 में से 1 मौत की वजह जहरीली हवा, 2023 में 17 हजार से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान

दिल्ली में हर 7 में से 1 मौत की वजह जहरीली हवा, 2023 में 17 हजार से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान

संक्षेप:

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में होने वाली हर सात मौत में से एक की वजह शहर में मौजूद जहरीली हवा है। लेटेस्ट ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) डेटा के एनालिसिस के मुताबिक, साल 2023 में दिल्ली में होने वाली सभी मौतों में से लगभग 15 फीसदी हवा में मौजूद प्रदूषण के कारण हुईं थीं।

Tue, 4 Nov 2025 08:52 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share Share
Follow Us on

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। डॉक्टरों और डाटा के मुताबिक यहां रहना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बनता जा रहा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में होने वाली हर सात मौत में से एक की वजह शहर में मौजूद जहरीली हवा है। लेटेस्ट ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) डेटा के एनालिसिस के मुताबिक, साल 2023 में दिल्ली में होने वाली सभी मौतों में से लगभग 15 फीसदी हवा में मौजूद प्रदूषण के कारण हुईं थीं।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

इस महीने की शुरुआत में इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) द्वारा जारी डेटा पर आधारित इस एनालिसिस में अनुमान लगाया गया है कि पिछले साल राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 17,188 मौतें पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) पॉल्यूशन के लंबे समय तक संपर्क में रहने से जुड़ी थीं। इसका मतलब है कि दिल्ली में होने वाली हर सात में से एक मौत शहर की जहरीली हवा के कारण हुई।

ये भी पढ़ें:दिल्ली अक्टूबर में देश का छठा सबसे प्रदूषित शहर, NCR के 8 शहर टॉप 10 में शामिल
ये भी पढ़ें:क्या दिल्ली मेट्रो के कैमरे वाकई खराब हो गए हैं? DMRC ने बताई छिपी हुई सच्चाई

इन चिंताजनक आंकड़ों के बावजूद, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि एयर पॉल्यूशन को सीधे तौर पर मृत्यु दर से जोड़ने का “कोई पक्का सबूत नहीं है”। मंत्रालय ने पलूशन को मौत में योगदान देने वाले कई कारकों में से एक बताया है। हालांकि तमाम विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है।

GBD एनालिसिस से पता चलता है कि दिल्ली में एयर पॉल्यूशन से संबंधित मौतें 2018 में 15,786 से बढ़कर 2023 में 17,188 हो गईं। इसी दौरान हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से होने वाली मौतें भी बढ़ीं, लेकिन वे एयर पॉल्यूशन से होने वाली मौतों से कम रहीं। CREA के रिसर्चर्स ने कहा कि साल-दर-साल उतार-चढ़ाव के बावजूद, पार्टिकुलेट मैटर पॉल्यूशन से होने वाली मौतों की संख्या लगातार ज़्यादा रही है।

CREA के एक एनालिस्ट डॉ. मनोज कुमार ने कहा, “अब एयर पॉल्यूशन को सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि सबसे पहले एक सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के रूप में माना जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, भारत में पहले से ही 250 से ज़्यादा एपिडेमियोलॉजिकल स्टडीज़ हैं जो प्रदूषित हवा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कई तरह के प्रभावों के बीच संबंध स्थापित करती हैं।

डॉ. कुमार ने बताया कि पार्टिकुलेट मैटर पॉल्यूशन फेफड़ों से कहीं ज़्यादा मानव शरीर को प्रभावित करता है। जब सांस ली जाती है, तो ये महीन कण फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं, एल्वियोली तक पहुँच सकते हैं, और ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश कर सकते हैं। समय के साथ, ये कण रक्त वाहिकाओं में जमा हो जाते हैं, जिससे हृदय और मस्तिष्क में ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे स्ट्रोक, दिल का दौरा और अन्य पुरानी बीमारियाँ हो सकती हैं।

Ratan Gupta

लेखक के बारे में

Ratan Gupta
IIMC दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद लाइव हिन्दुस्तान में बतौर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। खबरों की दुनिया के अलावा साहित्य पढ़ना, फिल्में देखना और गाने सुनना पसंद है। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News , Delhi Blast, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज , धर्म ज्योतिष , एजुकेशन न्यूज़ , राशिफल और पंचांग पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।