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दिल्ली में 90 कॉलोनियों को कब तक तोड़ा जाएगा? DDA का NGT को क्या जवाब

दिल्ली में 90 कॉलोनियों को कब तक तोड़ा जाएगा? DDA का NGT को क्या जवाब

संक्षेप:

यमुना को प्रदूषण और अतिक्रमण से मुक्त कराने की दिशा में एक चुनौती सामने आई है। यमुना डूब क्षेत्र (ओ-जोन) में बनी 90 अवैध कॉलोनियों में रहने वाले करीब 20-25 लाख लोगों के विस्थापन का फैसला फिलहाल कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है।

Nov 07, 2025 07:41 am ISTSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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यमुना को प्रदूषण और अतिक्रमण से मुक्त कराने की दिशा में एक चुनौती सामने आई है। यमुना डूब क्षेत्र (ओ-जोन) में बनी 90 अवैध कॉलोनियों में रहने वाले करीब 20-25 लाख लोगों के विस्थापन का फैसला फिलहाल कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में हलफनामा दायर करते हुए कहा है कि स्पष्ट कानूनी दिशानिर्देश और पुनर्वास नीति के बिना कार्रवाई संभव नहीं है।

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यह मामला जनवरी 2024 में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर एनजीटी द्वारा स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद सामने आया था। इन कॉलोनियों से बिना उपचारित सीवेज सीधे यमुना में जा रहा है, जिससे नदी के जल की गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।

एनजीटी ने सात अप्रैल 2025 को आदेश दिया था कि यमुना किनारे अवैध कॉलोनियों को हटाने और नदी को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए रोडमैप और समय-सीमा प्रस्तुत की जाए। इसके जवाब में दाखिल हलफनामे में डीडीए ने साफ कहा कि दो कानूनों के बीच विरोधाभास होने के कारण तत्काल कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

कानूनों में है विरोधाभास

डीडीए के मुताबिक, 2019 के अनधिकृत कॉलोनी विनियमों के तहत ओ-जोन में स्थित ये 90 कॉलोनियां दिल्ली सरकार द्वारा चिह्नित की गई 1731 अनधिकृत कॉलोनियों की सूची में शामिल हैं। इन्हें न तो नियमित किया गया है और न ही कोई मालिकाना हक दिए गए हैं। ये सभी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) द्वितीय अधिनियम, 2011 की धारा तीन के तहत 31 दिसंबर 2026 तक संरक्षित हैं। अर्थात इस कानूनी संरक्षण के चलते इन कॉलोनियों पर किसी भी तरह की सीधी कार्रवाई फिलहाल संभव नहीं है।

मंत्रालय से मांगे हैं दिशा-निर्देश: प्राधिकरण ने हलफनामे में कहा है कि मामले में कार्रवाई की अनुमति के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया है। निर्देश मांगे गए हैं कि क्या इन कॉलोनियों पर कार्रवाई कर हटाया जा सकता है। यदि हां,तो पुनर्वास की बताएं। मामले की अगली सुनवाई तीन फरवरी 2026 को होगी।

करीब 22 किलोमीटर इलाके में फैला है रिहायशी क्षेत्र

राजधानी में वजीराबाद से ओखला बैराज तक डूब क्षेत्र करीब 22 किमी हिस्से में फैला हुआ है। इसमें मयूर विहार खादर क्षेत्र, न्यू अरुणा नगर कॉलोनी (मजनू का टीला), उस्मानपुर गांव, गढ़ी मेंढ़ू, आईटीओ, कालंदी कुंज, मोनेस्ट्री मार्केट, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार, यमुना पुश्ता खादर क्षेत्र सहित अन्य शामिल हैं।

कब क्या हुआ

2024 जनवरी-मीडिया रिपोर्ट पर एनजीटी ने स्वतः संज्ञान लिया।

2024 सितंबर-अवैध कॉलोनियों में सीवर लाइन डालने के लिए डीडीए की अनुमति पर एनजीटी ने सवाल उठाए।

2025 अप्रैल- डीडीए से अवैध कॉलोनियों को हटाने के लिए मांगा था रोडमैप।

Sudhir Jha

लेखक के बारे में

Sudhir Jha
डिजिटल और प्रिंट मीडिया में डेढ़ दशक का अनुभव। भारतीय राजनीति के साथ एशियाई और वैश्विक मामलों की समझ। अर्थशास्त्र और खेल में भी रुचि। जम्मू-कश्मीर, लखनऊ और दिल्ली में पत्रकारिता कर चुके हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले आज समाज, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, न्यूज ट्रैक, नवभारत टाइम्स में सेवा दे चुके हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएशन डिप्लोमा से पहले कंप्यूटर साइंस में ग्रैजुएशन किया है। जन्म बिहार में हुआ और पले-बढ़े मेरठ में। और पढ़ें
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