HC से संगीतकार इलैयाराजा को झटका; सारेगामा के रिकॉर्डिंग पर नहीं जता पाएंगे हक

Feb 16, 2026 08:15 pm ISTKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
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दिल्ली हाई कोर्ट ने संगीतकार इलैयाराजा पर सारेगामा की ओर से दावा किए गए गानों का इस्तेमाल या लाइसेंस देने पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने माना कि तय समझौतों के तहत इन गानों के कॉपीराइट अधिकार सारेगामा के पास हैं। 

HC से संगीतकार इलैयाराजा को झटका; सारेगामा के रिकॉर्डिंग पर नहीं जता पाएंगे हक

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा को एक बड़ा झटका देते हुए सारेगामा इंडिया लिमिटेड के पक्ष में अंतरिम आदेश सुनाया है। अदालत ने इलैयाराजा को उन गानों और साउंड रिकॉर्डिंग्स का इस्तेमाल करने या उन्हें किसी और को लाइसेंस देने पर रोक लगा दी है जिन पर म्यूजिक लेबल सारेगामा अपना कॉपीराइट होने का दावा करता है। अदालत ने यह फैसला सारेगामा की ओर से दाखिल किए गए दायर एक कमर्शियल सूट पर सुनवाई करते हुए दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई एकतरफा रोक

दिल्ली हाईकोर्ट ने सारेगामा इंडिया लिमिटेड के पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक लगाई है, जिससे मशहूर म्यूजिक संगीतकार इलैयाराजा को कंपनी द्वारा दावा किए गए कुछ कॉपीराइटेड साउंड रिकॉर्डिंग व म्यूजिकल कामों का फायदा उठाने या लाइसेंस देने से रोक दिया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने म्यूजिक लेबल द्वारा दाखिल किए गए एक व्यावसायिक मामले की सुनवाई करते हुए दिया है।

सारेगामा की क्या दलील?

सारेगामा ने पीठ को बताया कि वर्ष 1976 व 2001 के बीच फिल्म प्रोड्यूसर्स के साथ किए गए असाइनमेंट समझौते के आधार पर कई भारतीय भाषाओं में फिल्म म्यूजिक व साउंड रिकॉर्डिंग की एक बड़ी सूची में उसका कॉपीराइट है।

इलैयाराजा पर क्या आरोप?

कंपनी के अनुसार, इन समझौतों ने उसे अलग-अलग सिनेमैटोग्राफ फिल्मों का हिस्सा बनने वाले कामों को दोबारा बनाने, लाइसेंस देने व व्यावसायिक इस्तेमाल करने के विशेष, विश्वभर व लगातार अधिकार दिए हैं। मुकदमे में आरोप है कि फरवरी 2026 में इलैयाराजा ने तीसरे पक्ष को लाइसेंस देना शुरू कर दिया। अमेजॉन म्यूजिक, आईटयून्स व जियो सावन जैसे प्लेटफॉर्म पर गाने अपलोड करने लगे, साथ ही काम पर मालिकाना हक का दावा भी किया।

फिल्म प्रोड्यूसर ही मालिक

सारेगामा ने कहा कि ये काम उल्लंघन के बराबर है। रिकॉर्डिंग पर उसके कानूनी हक को लेकर भ्रम पैदा किया गया। सारेगामा की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर एम. लाल ने तर्क दिया कि कॉपीराइट एक्ट के तहत फिल्म प्रोड्यूसर को फिल्मों के लिए बनाए गए म्यूजिक व साउंड रिकॉर्डिंग का पहला मालिक माना जाता है, जब तक कि कोई अनुबंध ऐसा न हो जिसमें कुछ और कहा गया हो।

पीठ ने माना सारेगामा की दलीलों में दम

उन्होंने काम पर सारेगामा के खास अधिकारों का दावा करने के लिए प्रोड्यूसर द्वारा कंपनी के पक्ष में किए गए असाइनमेंट समझौते पर भरोसा किया। शिकायत, दस्तावेज व अन्य दलीलों की जांच करने के बाद पीठ ने पाया कि सारेगामा ने पहली नजर में एक मामला बनाया है।

30 दिनों के अंदर लिखित बयान दाखिल करने के निर्देश

पीठ देखा कि असाइनमेंट समझौते व रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री से पता चलता है कि सुविधा का संतुलन वादी के पक्ष में है। लगातार इस्तेमाल से ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई पैसे से नहीं की जा सकती। पीठ ने मुकदमे में समन भी जारी किया है। प्रतिवादियों को मिलने के 30 दिनों के अंदर एक लिखित बयान दाखिल करने का निर्देश दिया है। अंतरिम रोक की अर्जी का जवाब चार हफ़्ते के अंदर दायर करना है। यह मामला 2 अप्रैल 2026 को पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया है।

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Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


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