काम की बात: क्या आपको SIR फॉर्म भरने में गलती का नोटिस मिला है? परेशान न हों, ये दस्तावेज दिखाएं
अगर आपको एसआईआर फार्म भरने के बाद खामियों की वजह से चुनाव कार्यालय की ओर से नोटिस मिला है तो परेशान न हों। नोटिस का जवाब देने और मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए 12 अधिकृत दस्तावेज में से कोई एक दिखाना अनिवार्य होगा। मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने इसकी सूची जारी की है।

दिल्ली में चल रहे एसआईआर में बड़ी संख्या में मतदाताओं को अपना पुराना रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है। पता बदल जाने या गणना प्रपत्र में कोई त्रुटि रह जाने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किया जा सकता है। इसका जवाब देने और मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए 12 अधिकृत दस्तावेज में से कोई एक दिखाना अनिवार्य होगा।
इनमें से कोई भी एक कागजात आएगा काम
● सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी को जारी किया गया पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश
● सरकार, प्राधिकरणों, बैंकों, डाकघर, एलआईसी या पीएसयू की ओर से एक जुलाई 1987 से पहले जारी कोई पहचान पत्र, प्रमाणपत्र या दस्तावेज
● सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी जन्म प्रमाण पत्र
● पासपोर्ट
● मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी शैक्षिक प्रमाण पत्र
● स्थायी निवास प्रमाण पत्र
● वन अधिकार प्रमाण पत्र
● ओबीसी/एससी/एसटी या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया कोई भी जाति प्रमाण पत्र
● राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर
● सरकारी अधिकारियों द्वारा किसी वैधानिक नियम के तहत रखा गया पारिवारिक रजिस्टर
● सरकार की ओर से जारी कोई भी भूमि/मकान आवंटन प्रमाण पत्र
● आधार कार्ड, लेकिन इसके लिए बीते साल जारी किए गए निर्देश लागू होंगे
विशेष परिस्थितयां
● अगर माता-पिता विदेशी हैं तो आपके जन्म के समय उनके वैध पासपोर्ट और वीजा की कॉपी देनी होगी।
● अगर भारत के बाहर जन्म हुआ है तो विदेश में स्थित भारतीय दूतावास की ओर से जारी जन्म पंजीकरण का प्रमाण संलग्न करना होगा।
● अगर भारतीय नागरिकता प्राप्त की है तो नागरिकता पंजीकरण का प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा।
डेढ़ फीसदी मतदाताओं को गणना प्रपत्र मिलने बाकी
दिल्ली में अब सिर्फ 1.5 फीसदी मतदाता ऐसे बचे हैं जिनके पास गणना प्रपत्र पहुंचाना बाकी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बताया कि कुल 1,45,10,298 मतदाता हैं और इनमें से 98.57 फीसदी यानी 1,43,02,626 मतदाताओं के पास गणना प्रपत्र पहुंच गया है। इसके साथ-साथ बीएलओ ने मतदाताओं से फार्म भरकर वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। सीईओ कार्यालय के मुताबिक मतदाता इस गणना प्रपत्र को ऑनलाइन भरने में भी काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। दिल्ली में अब तक 12.17 फीसदी यानी 17,66,553 मतदाता ऑनलाइन फार्म भर चुके हैं।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


