
'खुदकुशी के ख्याल आते हैं, नींद नहीं आती'; साकेत कोर्ट के अहलमद ने सुसाइड नोट में क्या-क्या लिखा
दिल्ली के साकेत कोर्ट में काम करने वाले एक अहलमद ने शुक्रवार को कोर्ट परिसर में ही पांचवी मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली। पुलिस को मृतक हरीश सिंह महार के शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें उन्होंने आत्महत्या के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
दिल्ली के साकेत कोर्ट में काम करने वाले एक अहलमद (क्लर्क) ने शुक्रवार को कोर्ट परिसर में ही पांचवी मंजिल से कूदकर खुदकुशी कर ली। पुलिस को मृतक हरीश सिंह महार के शव के पास से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें उन्होंने आत्महत्या के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। उन्होंने काम के दबाव की वजह से जान देने की बात लिखी है। हरीश ने लिखा है कि जब से वह अहलमद बने हैं खुदकुशी के ख्याल आते हैं और नींद नहीं आती। पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।
हरीश मानसिक रूप से परेशान थे
पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़ित हरीश परिवार के साथ फरीदाबाद में रहते थे। परिवार मूलत: उत्तराखंड का रहने वाला था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे कोर्ट परिसर में एक युवक के पांचवीं मंजिल से कूदने की सूचना मिली। साकेत थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल हरीश को अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस को उनके पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ। पुलिस इसकी जांच कर रही है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि हरीश मानसिक रूप से परेशान थे। इससे वह अपने काम और निजी जिंदगी पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे।
कोर्ट स्टाफ ने साथी के लिए मांगा इंसाफ
साकेत जिला अदालत में अहलमद हरीश की आत्महत्या के बाद शुक्रवार को अदालत परिसर में शोक और आक्रोश का माहौल देखा गया। कोर्ट स्टाफ और वकीलों ने अदालत परिसर में प्रदर्शन किया और ‘हरीश को न्याय दो’ के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने काम के अत्यधिक दबाव और कोर्ट कर्मचारियों पर बढ़ते मानसिक तनाव का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।
साकेत कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव धीर सिंह कसाना ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पूरे कोर्ट स्टाफ और वकीलों में शोक और गुस्सा फैल गया। वकील और कोर्ट स्टाफ एकजुट होकर उनके लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
सुसाइड नोट में युवा कर्मी ने बयां की अपनी परेशानी
सुसाइड नोट में लिखा था कि मेरा नाम हरीश सिंह महार है। आज मैं कार्यालय में काम के दबाव की वजह से सुसाइड कर रहा हूं। मैं अपनी मर्जी से सुसाइड कर रहा हूं, इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। मैं जब से अहलमद बना हूं, मुझे आत्महत्या के ख्याल आ रहे हैं। मैं 60% दिव्यांग हूं और यह नौकरी मेरे लिए बहुत मुश्किल है, इसलिए मैं प्रेशर में आ गया। मैं जब से अहलमद बना हूं, मुझे नींद नहीं आती और मैं बहुत ज्यादा सोचता रहता हूं, अगर मैं जल्दी रिटायरमेंट भी ले लूं, तो भी मुझे अपनी सेविंग्स या पेंशन 60 साल की उम्र में मिलेगी, इसलिए आत्महत्या ही एकमात्र ऑप्शन है।





