‘ऐसी बातें मुझे असहज करती हैं’, लोगों की किन टिप्पणियों से निराश हुए सोनम वांगचुक

पीटीआई, नई दिल्ली
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कॉकरोच जनता पार्टी की मांगों के समर्थन में सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 14वें दिन में प्रवेश कर गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर आंदोलन का समर्थन करने के लिए लोगों का शुक्रिया अदा किया। साथ ही कहा कि वह सिर्फ एक आम नागरिक हैं, आधुनिक गांधी या कोई हीरो नहीं।

Sonam Wangchuk on hunger strike

शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि वह बस एक आम नागरिक हैं, न कि आधुनिक गांधी या कोई हीरो। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी और को अपना लीडर मानने के बजाय अपनी जिंदगी के खुद हीरो बनें। परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शनिवार को 14वें दिन में प्रवेश कर गया। वहीं, सीजेपी का विरोध प्रदर्शन 22वें दिन में प्रवेश कर गया।

7.5 किलो कम हो गया वजन

पार्टी की ओर से जारी हेल्थ अपडेट के मुताबिक, उपवास शुरू करने के बाद से वांगचुक वजन 7.5 किलोग्राम कम हो गया है और उनका ब्लड प्रेशर 106/74 दर्ज किया गया। शुक्रवार रात एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में वांगचुक ने कहा कि उन्हें पिछले दिन की तुलना में कम ऊर्जा महसूस हो रही है, लेकिन वे आंदोलन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि आज मेरे उपवास का 13वां दिन है। मुझे कल जैसी ऊर्जा महसूस नहीं हो रही है। मैं थोड़ा थका हुआ महसूस कर रहा हूं। ऐसा होता है कि कुछ दिन अच्छे होते हैं और कुछ नहीं।

मैं बस एक आम नागरिक हूं

सोशल मीडिया पर आंदोलन का समर्थन करने के लिए लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए वांगचुक ने कहा कि दो तरह की टिप्पणियों ने उन्हें निराश किया। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग मुझे 21वीं सदी का गांधी या आधुनिक गांधी कहते हैं। कुछ लोग मुझे हीरो भी कहते हैं। ऐसी बातें सुनकर मुझे असहज महसूस होता है। मैं न तो गांधी हूं और न ही कोई हीरो। मैं बस एक आम नागरिक हूं जिसने अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश की है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे हीरो की तलाश करने के बजाय एक नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि कृपया किसी और में हीरो न ढूंढें। अपनी जिंदगी के हीरो खुद बनें। एक नागरिक के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाएं।

कम से कम एक दिन जंतर-मंतर पर आएं

परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की वजह से छात्रों की आत्महत्याओं का जिक्र करते हुए वांगचुक ने लोगों से अपील की कि वे चुपचाप बैठे रहने के बजाय इस आंदोलन में शामिल हों। उन्होंने कहा कि अगर उन छात्रों में से कोई आपकी बहन या बेटी होती तो आप हमारे साथ जरूर जुड़ते। ऐसा होने का इंतजार न करें। अगर आप रोज यहां नहीं आ सकते तो कम से कम एक दिन जंतर-मंतर पर हमारे साथ जुड़ें। अगर आप दिल्ली नहीं आ सकते तो आप जहां भी हैं, वहीं उपवास रखें और अपना संदेश शेयर करें।

उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को संसद तक होने वाले प्रस्तावित मार्च में शामिल होने की अपनी अपील दोहराई। उन्होंने कहा कि हमारी तरह आपको भूखा रहने की जरूरत नहीं है। खाना खाकर आइए। लेकिन एक नागरिक के तौर पर जिम्मेदारी निभाइए और 20 जुलाई को हमारे साथ जुड़िए।

… तो यह हमारे अधिकारों का उल्लंघन होगा

शुक्रवार को वांगचुक ने कहा कि उपवास के शुरुआती दिनों के बाद उनकी भूख स्थिर हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें विरोध स्थल से हटाने की कोई भी कोशिश शांतिपूर्ण विरोध करने के उनके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन होगी। उन्होंने कहा कि मैं अपनी मर्जी से यहां हूं और मेरी जान को कोई खतरा नहीं है। अगर वे मुझे यहां से हटाते हैं तो यह हमारे अधिकारों का उल्लंघन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे उन छात्रों के समर्थन में अपना अनशन जारी रखे हुए हैं जो परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही और लद्दाख से जुड़े मुद्दों के जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।

28 जून से भूख हड़ताल पर हैं

सीजेपी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उन छात्रों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग कर रहा है जिन्होंने कथित तौर पर परीक्षा में गड़बड़ियों के कारण आत्महत्या कर ली। पार्टी ने मॉनसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की भी घोषणा की है। सीजेपी का विरोध प्रदर्शन 20 जून को शुरू हुआ था जबकि सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

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