सत्य निकेतन हादसा: मलबे में दबी जिंदगियों तक कैसे पहुंची टीमें, रॉकी-विक्की और किंग की खास भूमिका
सत्य निकेतन हादसे के बाद मलबे में दबे छात्रों को ढूंढने के लिए एनडीआरएफ की डॉग स्क्वाड ने खास भूमिका निभाई। राहत अभियान के आखिरी चरण में भी डॉग स्क्वाड की मदद ली गई।

राजन शर्मा
दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद शुरू हुए राहत एवं बचाव अभियान में एनडीआरएफ की डॉग स्क्वाड ने मलबे में दबे लोगों की तलाश में अहम भूमिका निभाई। स्क्वायड में शामिल रॉकी, विक्की और किंग ने अपनी सूंघने की क्षमता से राहतकर्मियों को उन स्थानों तक पहुंचने में मदद की, जहां लोगों के दबे होने की संभावना ज्यादा थी।
एनडीआरएफ के लिए सबसे बड़ी चुनौती भारी मलबे के बीच जिंदा लोगों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना था। इसके लिए डॉग स्क्वाड के तीनों खोजी कुत्तों को मौके पर उतारा गया। उनकी मदद से शुरुआती चरण में ही राहतकर्मियों को मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने में मदद मिली और कई लोगों को निकालकर अस्पताल भेजा गया। हालांकि देर रात और सोमवार सुबह तक मलबे से निकाले गए कई अन्य लोगों को बचाया नहीं जा सका।
डॉग स्क्वायड के कमांडर शंकर ने बताया कि किंग को ऐसे अभियानों का चार साल का अनुभव है। वह दिल्ली-एनसीआर में अब तक 17 बचाव अभियानों में शामिल हो चुका है। वहीं रॉकी और विक्की को करीब एक साल का अनुभव है। दोनों उत्तराखंड के धराली और श्रीलंका में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी खोज एवं बचाव अभियानों में भूमिका निभा चुके हैं।
अंतिम चरण में भी साबित हुए मददगार
राहत अभियान के अंतिम चरण में भी रॉकी और विक्की की मदद ली गई। मुख्य मलबा हटने के बाद दोनों को बेसमेंट में जमा मलबे और इमारत के आसपास अलग-अलग स्थानों पर रखे मलबे की सघन जांच के लिए भेजा गया। दोनों की जांच में किसी व्यक्ति के दबे होने का संकेत नहीं मिला। इसके बाद एनडीआरएफ ने पूरे इलाके में किसी के और फंसे नहीं होने की पुष्टि करते हुए करीब 26 घंटे बाद राहत अभियान समाप्त कर दिया।


