ब्रेन स्टेंट के जरिए होगा लकवा का इलाज, दिल्ली एम्स के नेतृत्व में सफल ट्रायल

Dec 13, 2025 09:05 pm ISTKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, रणविजय सिंह, नई दिल्ली
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लकवा (ब्रेन स्ट्रोक) के इलाज के लिए एक नई तरकीब सामने आई है। दिल्ली एम्स के नेतृत्व में एक अमेरिकी कंपनी द्वारा निर्मित अत्याधुनिक ब्रेन स्टेंट का ट्रायल पूरा कर लिया गया है। यह ट्रायल सफल रहा है।

ब्रेन स्टेंट के जरिए होगा लकवा का इलाज, दिल्ली एम्स के नेतृत्व में सफल ट्रायल

दिल्ली एम्स के नेतृत्व में लकवा (ब्रेन स्ट्रोक) के इलाज के लिए एक अमेरिकी कंपनी द्वारा निर्मित सबसे अत्याधुनिक ब्रेन स्टेंट का ट्रायल पूरा कर लिया गया है। ट्रायल में यह स्टेंट सुरक्षित और लकवा के इलाज में प्रभावी पाया गया है। ट्रायल का नतीजा सामने आने के बाद सीडीएसओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) ने देश में लकवा के मरीजों के इलाज में इस स्टेंट का इस्तेमाल शुरू करने और देश में ही इसे बनाने की स्वीकृति दे दी है।

लकवा मरीजों को मिलेगी राहत

देश में इसका निर्माण होने से यह सस्ता हो सकेगा। इससे लकवा मरीजों को राहत मिलेगी। इसके ट्रायल के प्रमुख शोधकर्ता और एम्स के न्यूरो सेंटर के प्रमुख डॉ. शैलेश बी गायकवाड़ ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस ट्रायल में एम्स सहित देश के पांच अस्पताल शामिल थे। जिसमें हैदराबाद के दो, कोलकाता व अहमदाबाद के एक-एक अस्पताल शामिल थे।

मस्तिष्क में दूर किया ब्लॉकेज

पिछले वर्ष इस ग्रासरूट ट्रायल की शुरुआत की गई थी। इसके तहत 15 अगस्त 2024 को एम्स में सबसे पहले एक मरीज को अमेरिकी कंपनी का सबसे अत्याधुनिक स्टेंट लगाया गया था। इसके बाद पांचों अस्पतालों में लकवा से पीड़ित कुल 32 मरीजों को यह स्टेंट डालकर मस्तिष्क की धमनियों का ब्लॉकेज दूर किया गया। इसके परिणाम उत्साह जनक है।

छह घंटे में स्टेंट डालने से परिणाम होता है बेहतर

डॉ. गायकवाड़ ने बताया कि देश में 17 लाख लोक लकवा से पीड़ित होते हैं। पश्चिमी देशों की तुलना में यहां कम उम्र में लोगों को यह बीमारी होती है। इसमें से दस प्रतिशत मरीजों को ही ठीक से इलाज मिल पाता है। 90 प्रतिशत मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल पाता।

स्टेंट डालकर दूर किया जाता है ब्लॉकेज

मस्तिष्क की धमनियों में ब्लॉकेज होने के कारण लकवा होने पर स्टेंट डालकर ब्लॉकेज को दूर कर दिया जाता है। लकवा होने के 24 घंटे में स्टेंट डालना जरूरी होता है। लकवा होने के छह घंटे के भीतर स्टेंट डालने से इलाज का परिणाम बेहतर होता है और ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं।

महंगा है ब्रेन स्टेंट

उन्होंने बताया कि ब्रेन स्टेंट की कीमत पौने दो लाख से दो लाख रुपये है। कीमत महंगा होना से भी आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए इसका इस्तेमाल आसान नहीं होता।

40 से 50 फीसदी सस्ती हो जाएगी कीमत

उन्होंने बताया कि अमेरिका के सुपरनोवा स्टेंट को भारतीय इंजीनियरों ने ही डिजाइन किया है। जल्द ही भारत में इसके निर्माण के लिए फैक्ट्री लगेगी। तब यह स्टेंट भारत में बनने से इसकी कीमत 40 से 50 प्रतिशत कम हो जाएगी। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

Krishna Bihari Singh

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Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


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परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

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