ब्रेन स्टेंट के जरिए होगा लकवा का इलाज, दिल्ली एम्स के नेतृत्व में सफल ट्रायल
लकवा (ब्रेन स्ट्रोक) के इलाज के लिए एक नई तरकीब सामने आई है। दिल्ली एम्स के नेतृत्व में एक अमेरिकी कंपनी द्वारा निर्मित अत्याधुनिक ब्रेन स्टेंट का ट्रायल पूरा कर लिया गया है। यह ट्रायल सफल रहा है।

दिल्ली एम्स के नेतृत्व में लकवा (ब्रेन स्ट्रोक) के इलाज के लिए एक अमेरिकी कंपनी द्वारा निर्मित सबसे अत्याधुनिक ब्रेन स्टेंट का ट्रायल पूरा कर लिया गया है। ट्रायल में यह स्टेंट सुरक्षित और लकवा के इलाज में प्रभावी पाया गया है। ट्रायल का नतीजा सामने आने के बाद सीडीएसओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) ने देश में लकवा के मरीजों के इलाज में इस स्टेंट का इस्तेमाल शुरू करने और देश में ही इसे बनाने की स्वीकृति दे दी है।
लकवा मरीजों को मिलेगी राहत
देश में इसका निर्माण होने से यह सस्ता हो सकेगा। इससे लकवा मरीजों को राहत मिलेगी। इसके ट्रायल के प्रमुख शोधकर्ता और एम्स के न्यूरो सेंटर के प्रमुख डॉ. शैलेश बी गायकवाड़ ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस ट्रायल में एम्स सहित देश के पांच अस्पताल शामिल थे। जिसमें हैदराबाद के दो, कोलकाता व अहमदाबाद के एक-एक अस्पताल शामिल थे।
मस्तिष्क में दूर किया ब्लॉकेज
पिछले वर्ष इस ग्रासरूट ट्रायल की शुरुआत की गई थी। इसके तहत 15 अगस्त 2024 को एम्स में सबसे पहले एक मरीज को अमेरिकी कंपनी का सबसे अत्याधुनिक स्टेंट लगाया गया था। इसके बाद पांचों अस्पतालों में लकवा से पीड़ित कुल 32 मरीजों को यह स्टेंट डालकर मस्तिष्क की धमनियों का ब्लॉकेज दूर किया गया। इसके परिणाम उत्साह जनक है।
छह घंटे में स्टेंट डालने से परिणाम होता है बेहतर
डॉ. गायकवाड़ ने बताया कि देश में 17 लाख लोक लकवा से पीड़ित होते हैं। पश्चिमी देशों की तुलना में यहां कम उम्र में लोगों को यह बीमारी होती है। इसमें से दस प्रतिशत मरीजों को ही ठीक से इलाज मिल पाता है। 90 प्रतिशत मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल पाता।
स्टेंट डालकर दूर किया जाता है ब्लॉकेज
मस्तिष्क की धमनियों में ब्लॉकेज होने के कारण लकवा होने पर स्टेंट डालकर ब्लॉकेज को दूर कर दिया जाता है। लकवा होने के 24 घंटे में स्टेंट डालना जरूरी होता है। लकवा होने के छह घंटे के भीतर स्टेंट डालने से इलाज का परिणाम बेहतर होता है और ज्यादातर मरीज ठीक हो जाते हैं।
महंगा है ब्रेन स्टेंट
उन्होंने बताया कि ब्रेन स्टेंट की कीमत पौने दो लाख से दो लाख रुपये है। कीमत महंगा होना से भी आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए इसका इस्तेमाल आसान नहीं होता।
40 से 50 फीसदी सस्ती हो जाएगी कीमत
उन्होंने बताया कि अमेरिका के सुपरनोवा स्टेंट को भारतीय इंजीनियरों ने ही डिजाइन किया है। जल्द ही भारत में इसके निर्माण के लिए फैक्ट्री लगेगी। तब यह स्टेंट भारत में बनने से इसकी कीमत 40 से 50 प्रतिशत कम हो जाएगी। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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