बरसों की पहचान, विदेश में सा​थ घूमे, फिर रेप कैसा; हाईकोर्ट ने रद्द की FIR

Aditi Sharma लाइव हिन्दुस्तान, गुरुग्राम
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गुरुग्राम की एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करने वाली एक महिला की ओर से अपने सहकर्मी पर रेप की एफआईआर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है।

बरसों की पहचान, विदेश में सा​थ घूमे, फिर रेप कैसा; हाईकोर्ट ने रद्द की FIR

गुरुग्राम की एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करने वाली एक महिला की ओर से अपने सहकर्मी पर रेप की एफआईआर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता महिला और आरोपी पुरुष एक ही ऑफिस के सहकर्मी हैं। दोनों के बीच सालों की जान-पहचान है। दोनों साथ में कई बार विदेश भी जा चुके हैं। इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने पाया कि इन विशेष परिस्थितियों में अपराध के लिए जरूरी तत्व मौजूद नहीं हैं।

पति से चल रहा था तलाक का केस

हाईकोर्ट में मई 2024 में गुरुग्राम के सेक्टर 51 के महिला पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस एन.एस शेखावत ने पाया कि शिकायतकर्ता पहले से ही शादीशुदा थी और उसके अपने पति के साथ अच्छे संबंध नहीं थे। उसने मई, 2016 में अपने पति के साथ कानूनी कार्यवाही शुरू की थी और अक्टूबर 2023 में तलाक हो गया था। जस्टिस शेखावत ने टिप्पणी की कि जब शिकायतकर्ता महिला की मुलाकात याचिकाकर्ता आरोपी से फरवरी 2022 में पहली बार हुई, तब वह किसी अन्य व्यक्ति से विवाहित थी। यह असंभव है कि याचिकाकर्ता ने उसे शादी का प्रस्ताव दिया हो।

फरवरी-मार्च 2022 में वह खुद भी याचिकाकर्ता से शादी करने के योग्य भी नहीं थी। इसके अलावा, याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता पिछले कई सालों से एक ही कंपनी में काम कर रहे थे और जाहिर तौर पर एक-दूसरे को जानते थे।

इतनी पढ़ी-लिखी होने के बावजूद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई ?

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता तलाक लेने से पहले ही 9 अक्टूबर, 2022 से 17 अक्टूबर, 2022 तक याचिकाकर्ता के साथ बाली गई थी। दोनों एक ही होटल में साथ ठहरे। 16 सितंबर, 2023 से 27 सितंबर, 2023 तक मिस्र भी गई थी और यहां शारीरिक संबंध होने की बात स्वीकार की गई है लेकिन इतनी पढ़ी लिखी होने और एक मल्टीनैशनल कंपनी में काम करने के बावजूद उसने कई महीनों तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई।

जस्टिस शेखावत ने टिप्पणी की कि वर्तमान मामले के तथ्यों से भी स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता और प्रतिवादी के बीच दोस्ताना संबंध हो गए थे और वे एक-दूसरे से मिलने आते-जाते रहते थे। हाईकोर्ट यह भी यह मानने को तैयार नहीं है कि इतनी पढ़ी लिखी म​हिला याचिकाकर्ता जबरदस्ती वाले व्यवहार को समझने में असमर्थ रही। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि दोनों के बीच पहले दोस्ती हुई और बाद में शारीरिक संबंध बने।

रिपोर्ट: मोनी देवी

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अदिति शर्मा

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