हरियाणा के बजट में फरीदाबाद को ग्लोबल सिटी बनाने पर जोर, शहर के लिए कई घोषणाएं

Mar 04, 2026 06:36 am ISTSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान/फरीदाबाद
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हरियाणा सरकार के वर्ष 2026-27 के बजट में फरीदाबाद को ग्लोबल सिटी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। परिवहन, औद्योगिक विकास, शहरी सुविधाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में नई योजनाएं शामिल की गई हैं।

हरियाणा के बजट में फरीदाबाद को ग्लोबल सिटी बनाने पर जोर, शहर के लिए कई घोषणाएं

हरियाणा सरकार के वर्ष 2026-27 के बजट में फरीदाबाद को ग्लोबल सिटी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। परिवहन, औद्योगिक विकास, शहरी सुविधाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में नई योजनाएं शामिल की गई हैं।

हरियाणा सरकार के वर्ष 2026-27 के बजट को जनभागीदारी पर आधारित बताते हुए तीन मंत्रियों विपुल गोयल, राजेश नागर और गौरव गौतम ने मंगलवार को अलग-अलग पत्रकार वार्ता में कहा कि यह विकास और विश्वास का दस्तावेज है। उन्होंने दावा किया कि 2.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक के इस बजट में फरीदाबाद को ग्लोबल सिटी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है।

मंत्रियों के अनुसार बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और किसानों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। परिवहन, औद्योगिक विकास, शहरी सुविधाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में नई योजनाएं शामिल की गई हैं। आरआरटीएस कॉरिडोर, औद्योगिक निवेश को बढ़ावा, न्यूनतम मजदूरी वृद्धि और सामाजिक योजनाओं के विस्तार को अहम कदम बताया गया।

लाडो लक्ष्मी योजना की आय सीमा बढ़ी

युवाओं के लिए एआई मिशन के तहत प्रशिक्षण, ग्रामीण कौशल योजना और आईटीआई को उद्योगों से जोड़ने की पहल की जाएगी। किसानों को जैविक खेती पर सब्सिडी और ट्यूबवेल कनेक्शन में राहत मिलेगी। महिलाओं के लिए लाडो लक्ष्मी योजना की आय सीमा बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये की गई है और तीन लाख ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में नए डायलिसिस केंद्र और एंबुलेंस सेवाएं बढ़ाई जाएंगी।

आरआरटीएस कॉरिडोर से कनेक्टिविटी मजबूत होगी

मंत्रियों ने कहा कि फरीदाबाद के लिए 100 किलोमीटर सड़कों के अपग्रेड, नहर पार क्षेत्र में मास्टर रोड निर्माण, जिला अस्पताल की क्षमता 400 बेड तक बढ़ाने और 8 हजार ईडब्ल्यूएस फ्लैट देने की घोषणा की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। दिल्ली-फरीदाबाद-नोएडा-जेवर आरआरटीएस कॉरिडोर से कनेक्टिविटी मजबूत होगी। पानी-सीवर सरचार्ज माफी, संपत्ति कर ब्याज में छूट और ग्रीन फंड स्थापना भी प्रस्तावित है।

पर्यावरण संरक्षण के तहत कदम उठाए गए

पर्यावरण संरक्षण के तहत ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंस फंड, सौर ऊर्जा परियोजनाएं और क्लीन एयर प्रोजेक्ट लागू होंगे। कानून व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए एटीएस इकाइयां स्थापित की जाएंगी। पलवल में स्टेडियम, एमआरआई सुविधा और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की भी घोषणा की गई है। मंत्रियों ने कहा कि यह बजट प्रदेश को ग्लोबल ग्रोथ जोन के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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